नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और रूस के आपसी रिश्तों को लेकर पिछले चौबीस घंटों में कई नए और अहम तथ्य सामने आए हैं। इंटरनेट पर 'रूस' यानी 'रशिया' शब्द को देश के भीतर बहुत बड़े पैमाने पर खोजा जा रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि मौजूदा समय में दोनों देशों की सरकारों के बीच किन बड़े मुद्दों पर बातचीत चल रही है। कच्चे तेल के व्यापार से लेकर रक्षा क्षेत्र की पुरानी डील तक, हर मोर्चे पर नई हलचल देखने को मिल रही है। हमारी टीम ने इस पूरे मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए कई जानकारों से बात की है।
बीते कुछ महीनों में भारत और रूस के बीच आर्थिक लेन-देन का दायरा काफी तेजी से बढ़ा है। पश्चिमी देशों के तमाम दबाव के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सबसे पहले रखा है। रूस से आने वाला कच्चा तेल हमारे देश की रिफाइनरियों तक पहुंच रहा है जिससे ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हालांकि, भुगतान प्रणाली को लेकर दोनों देशों के व्यापारियों को अभी भी कुछ छोटी-मोटी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग स्तर पर इन समस्याओं को सुलझाने के लिए लगातार नई बैठकों का दौर जारी है।
रूस के साथ व्यापार में भुगतान की नई व्यवस्था
व्यापारिक जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रुपया और रूबल में भुगतान के विकल्पों को परखा जा रहा है। भारतीय निर्यातकों को रूस के बाजार में अपने उत्पाद भेजने के लिए नए रास्ते मिल रहे हैं। खासकर दवाइयों, कृषि उत्पादों और इंजीनियरिंग के सामानों की मांग वहां लगातार बनी हुई है। बैंक अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस व्यवस्था को और अधिक सरल बनाया जाएगा।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भी भारत का रुख बहुत स्पष्ट और संतुलित रहा है। भारत ने हमेशा से यही कहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। देश के विदेश मंत्रालय ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही शांति का रास्ता निकाला जाना चाहिए। रूस के साथ हमारे संबंध दशकों पुराने और बेहद भरोसेमंद रहे हैं। बदलते वैश्विक हालात के बावजूद भारत ने अपनी विदेश नीति की इस स्वायत्तता को बहुत मजबूती के साथ कायम रखा है।
संबंधित खबरें
रक्षा समझौतों और तकनीकी साझेदारी का ताजा हाल
भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग का पुराना इतिहास रहा है। थल सेना, वायु सेना और नौसेना के कई बड़े हथियार रूस की तकनीक पर आधारित हैं। मौजूदा समय में स्पुतनिक और अन्य रक्षा उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम चल रहा है। भारत चाहता है कि मेक इन इंडिया के तहत रक्षा उपकरणों का उत्पादन देश के भीतर ही किया जाए। रूस की कंपनियों ने भी भारत में तकनीक साझा करने और संयुक्त रूप से उत्पादन करने में गहरी रुचि दिखाई है।
आम जनता के बीच भी रूस को लेकर एक अलग प्रकार की जिज्ञासा हमेशा से बनी रहती है। छात्र पढ़ाई के लिए रूस के विश्वविद्यालयों में जाते हैं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम भी समय-समय पर होते रहते हैं। वीजा नियमों को और आसान बनाने को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है ताकि पर्यटकों और छात्रों का आना-जाना सुगम हो सके। आने वाले हफ्तों में कुछ उच्च स्तरीय वार्ताओं के जरिए कई नए समझौतों पर मुहर लगने की पूरी उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर
वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रूस की स्थिति बहुत अहम है और इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देता है। घरेलू बाजार में महंगाई को काबू में रखने के लिए रूस से मिल रहा सस्ता कच्चा तेल एक बड़ा मददगार साबित हुआ है। नीति निर्माताओं का मानना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया आधिकारिक बयान आएगा, हम पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाएंगे।




