देशभर में टैक्स से जुड़ी खबरें इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर टैक्स वसूली को आसान बनाने के प्रयास चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर चल रही गड़बड़ियां और फर्जीवाड़े भी सामने आ रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, आम नागरिकों से लेकर बड़ी कंपनियों तक, टैक्स का यह पूरा ताना-बाना इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है। चाहे वह स्थानीय स्तर पर हाउस टैक्स जमा करने के विशेष कैंप हों या फिर केंद्रीय एजेंसियों की बड़ी छापेमारी, हर जगह टैक्स एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
ताजा मामलों की कड़ी में पंजाब से एक बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान करीब 425 करोड़ रुपये के बड़े टैक्स फर्जीड़े का खुलासा हुआ है। इस तरह के मामलों ने साफ कर दिया है कि कागजों पर खेल कर कैसे सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं ताकि इसमें शामिल मुख्य चेहरों तक पहुंचा जा सके। दूसरी ओर, उत्तराखंड के रुद्रपुर में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीमों ने लगातार 40 घंटे तक छापेमारी कर सनसनी फैला दी। इस कार्रवाई में लखनऊ और कानपुर से आए अधिकारी भी शामिल थे, जिससे साफ है कि जांच का दायरा काफी बड़ा है।
रांची में टैक्स वसूली ठप और विशेष कैंपों का हाल
एक तरफ जहां बड़े फर्जीवाड़े और छापे पड़ रहे हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी की सुस्ती भी खुलकर सामने आ रही है। झारखंड की राजधानी रांची का एक मामला इन दिनों काफी चर्चा में है। यहां नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि महज 55 दिनों में 14 करोड़ रुपये वसूलने के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 75 लाख रुपये की ही टैक्स वसूली हो पाई है। काम ठप होने की वजह से स्थानीय निकाय के विकास कार्यों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। अधिकारियों की कार्यशैली और कर्मचारियों की सुस्ती के कारण आम जनता को भी जरूरी सेवाओं का लाभ मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
इसके उलट, देश के दूसरे हिस्सों में नागरिकों को राहत देने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। कई वार्डों में हाउस टैक्स जमा करने और उसमें आ रही गड़बड़ियों को ठीक कराने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। वार्ड 65 जैसे इलाकों में लगाए गए इन कैंपों में आम लोग लाइन में लगकर अपना रुका हुआ टैक्स जमा कर रहे हैं और अपने विवरण में संशोधन भी करा रहे हैं। इन कैंपों का मुख्य मकसद यही है कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े और वे आसानी से अपना टैक्स चुका सकें। लेकिन सवाल यह है कि एक तरफ जहां आम आदमी को नियमों के दायरे में बांधा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर हो रही टैक्स चोरी पर लगाम कैसे लगेगी।
घर में कितना सोना रख सकते हैं और क्या हैं नियम
टैक्स से जुड़ी इन तमाम खबरों के बीच आम जनता के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि वे अपने घर में कितना सोना या चांदी रख सकते हैं ताकि आयकर विभाग की रेड के दौरान कोई परेशानी न हो। वित्तीय जानकारों और नियमों के मुताबिक, यदि शादीशुदा महिला है तो वह अपने पास तय सीमा तक बिना किसी पूछताछ के सोना रख सकती है। इसी तरह अविवाहित महिलाओं और पुरुषों के लिए भी अलग-अलग नियम तय किए गए हैं। जब तक सोना इन तय सीमाओं के भीतर रहता है, तब तक इनकम टैक्स की रेड के दौरान इसे जब्त नहीं किया जा सकता। बशर्ते आपके पास उसकी वैध खरीद का बिल या पारिवारिक विरासत का पुख्ता प्रमाण होना चाहिए।
द फ्रीलान्स की इस पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि भारत में टैक्स का दायरा अब बहुत सख्त हो चुका है। सरकार जहां एक ओर डिजिटल माध्यमों से पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ फर्जीवाड़े करने वालों पर भी एजेंसियों की पैनी नजर है। आने वाले दिनों में इन छापों और छापों के बाद सामने आने वाले खुलासों से कई और बड़े राज बाहर आ सकते हैं। आम नागरिकों के लिए यही सलाह है कि वे अपने सभी टैक्स समय पर भरें और अपने वित्तीय दस्तावेजों को पूरी तरह दुरुस्त रखें ताकि किसी भी अचानक कार्रवाई से बचा जा सके।


