नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से जुड़े करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कई बड़े अपडेट सामने आए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और खबरों के बाजार में यह सवाल जोरों पर है कि क्या बीस हजार रुपये से पच्चीस हजार रुपये सैलरी होने पर पीएफ कटने का नियम बदल गया है। जानकारों के मुताबिक, सरकार कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा दायरे को बढ़ाने पर लगातार विचार कर रही है। इसके साथ ही सितंबर महीने का ईसीआर यानी इलेक्ट्रॉनिक चालान कम रिटर्न तय समय यानी पंद्रह अक्टूबर से पहले जमा करने के सख्त निर्देश कंपनियों को दिए गए हैं। तय तारीख तक भुगतान न करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, ताकि समय पर कर्मचारियों के खाते में पैसा पहुंच सके।
दूसरी तरफ, फरीदाबाद से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। यहां एक निजी कंपनी ने सरकारी योजना यानी एब्रिव का गलत फायदा उठाया। कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ का पैसा तो काटा, लेकिन उसे सही जगह जमा करने के बजाय सरकारी अनुदान का लाभ खुद उठा लिया। इस मामले में दो करोड़ चौबीस लाख रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़ी गई है। इस घटना के बाद से श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने सभी क्षेत्रीय दफ्तरों को निर्देश दिए हैं कि वे कंपनियों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करें। कोई भी कंपनी अगर नियमों के खिलाफ काम करती पाई जाएगी, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना वसूला जाएगा।
वेतन सीमा और पीएफ कटने के नए नियम
आम तौर पर अभी तक बीस हजार रुपये तक की मूल सैलरी पर ही ईपीएफ में पैसा जमा होने की बात सामने आती रही है। लेकिन अब वेतन सीमा को बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपये करने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। अगर यह बदलाव पूरी तरह लागू होता है, तो ज्यादा संख्या में कर्मचारियों को भविष्य निधि का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसका सीधा असर कर्मचारियों के मासिक वेतन पर पड़ेगा, क्योंकि उनके पीएफ खाते में ज्यादा योगदान जाएगा। हालांकि, कई कर्मचारियों का यह भी मानना है कि इससे उनके हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी कुछ कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह उनके बुढ़ापे और आपातकाल के लिए एक बड़ा सहारा साबित होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों को अपने वेतन पर्ची यानी सैलरी स्लिप की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए। कई बार कंपनियां कागजों पर कुछ और दिखाती हैं और पोर्टल पर कुछ और अपलोड करती हैं। फरीदाबाद के फर्जीवाड़े ने यह साबित कर दिया है कि कर्मचारियों को खुद भी अपने यूएएन पोर्टल पर जाकर हर महीने यह चेक करना चाहिए कि कंपनी ने उनका पैसा जमा किया है या नहीं। यदि किसी कर्मचारी के खाते में समय पर पैसा नहीं पहुंचता है, तो वह सीधे ईपीएफओ के पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। संगठन ने ऑनलाइन पोर्टल को अब और ज्यादा आसान बना दिया है, जिससे शिकायतों का निपटारा जल्दी हो रहा है।
पीएफ निकासी पर टैक्स और डेडलाइन की राहत
कर्मचारियों के मन में अक्सर यह डर रहता है कि जरूरत पड़ने पर पीएफ का पैसा निकालने पर भारी टैक्स देना पड़ेगा। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी पांच साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद अपना पीएफ निकालता है, तो उस पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं लगता है। इसके अलावा शादी, बीमारी, घर खरीदने या बच्चों की पढ़ाई जैसे विशेष मामलों में भी निकासी पर टैक्स छूट का प्रावधान है। हालांकि, यदि पांच साल से पहले बिना किसी वैध कारण के पैसा निकाला जाता है, तो टीडीएस कट सकता है। इसलिए निकासी करने से पहले कर्मचारियों को इन जरूरी शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए ताकि किसी प्रकार के आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
हाल ही में ईपीएफओ ने कुछ खास डेडलाइन में भी सोलह दिन की राहत दी है, जिससे उन कंपनियों और नियोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी कारणों से समय पर दस्तावेज या रिटर्न जमा नहीं कर पाए थे। इस डेडलाइन के बढ़ने से कर्मचारियों के पेंडिंग मामलों का निपटान भी तेजी से हो रहा है। देश भर के विभिन्न EPFO दफ्तरों में अटके पड़े दावों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से अब दावों का निपटारा कुछ ही दिनों में हो जाता है, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी पड़ताल यह कहती है कि ईपीएफओ के नियम जितने कागजों पर सरल दिखते हैं, जमीनी स्तर पर उनका पालन कराना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। फरीदाबाद जैसे मामले यह दिखाते हैं कि कुछ कंपनियां सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठाने से बाज नहीं आ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और ईपीएफओ प्रशासन और अधिक सख्ती बरते। कर्मचारियों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। हर महीने अपना पासबुक ऑनलाइन चेक करना और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत आवाज उठाना ही इस समस्या का सबसे पक्का समाधान है। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे भी हर नए अपडेट से आपको अवगत कराता रहेगा।




