नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार इन दिनों किसी roller coaster की तरह ऊपर-नीचे हो रहा है। कभी बाजार खुलते ही सेंसेक्स एक हजार से पंद्रह सौ अंक तक उछल जाता है, तो कभी अचानक बिकवाली आने से सूचकांक धड़ाम हो जाते हैं। पिछले कुछ सत्रों में बाजार का यह मिजाज निवेशकों के लिए सिरदर्द बन गया है। कभी आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिलती है, तो अगले ही दिन ऊर्जा, तेल-गैस और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर औंधे मुंह गिर जाते हैं। आम निवेशक इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर बाजार में यह उठापटक क्यों मची हुई है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस उठापटक के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार हो रही बिकवाली है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालते हैं, तो बड़े शेयरों पर दबाव बन जाता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था के हालात भी हमारे बाजार को सीधा प्रभावित कर रहे हैं। कभी तेल के दाम नरम होते हैं तो बाजार में राहत की सांस ली जाती है, और भाव चढ़ते ही बिकवाली हावी हो जाती है।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल का सच
हाल ही के कारोबारी सत्रों में बाजार में अचानक ऐसी तेजी आई कि सेंसेक्स चौहत्तर हजार के पार निकल गया और निफ्टी ने भी बाईस हजार नौ सौ का आंकड़ा पार कर लिया। इस तूफानी तेजी में सबसे बड़ा योगदान देश की बड़ी आईटी कंपनियों का रहा। तकनीकी शेयरों में लिवाली लौटने से बाजार के निवेशकों को कुछ पलों के लिए बड़ी राहत मिली। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब दुनिया भर के बाजारों से अच्छे संकेत मिलते हैं, तो भारतीय बाजार में भी खरीदार सक्रिय हो जाते हैं और निचले स्तरों पर शेयरों की खरीदारी शुरू कर देते हैं।
लेकिन यह खुशी ज्यादा लंबी नहीं टिकती है और बाजार में मुनाफावसूली हावी हो जाती है। जैसे ही बाजार ऊपरी स्तरों पर पहुंचता है, बड़े निवेशक अपने शेयर बेचकर मुनाफा निकाल लेते हैं। इससे सूचकांक फिर से नीचे लुढ़क जाते हैं। यही वजह है कि निफ्टी एक बार फिर से बाईस हजार छह सौ पचास के नीचे आ गया है। इस लुकाछिपी के खेल में सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और रिटेल निवेशकों का हो रहा है, जो बाजार के इस रुख को भांप नहीं पाते हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से क्यों डरे हैं लोग?
भारतीय शेयर बाजार की चाल काफी हद तक विदेशी निवेशकों के इशारे पर तय होती है। जब वे भारतीय शेयरों में पैसा झोंकते हैं, तो बाजार आसमान छूने लगता है। इसके विपरीत, जब वे बिकवाली का रुख अपनाते हैं, तो बाजार में हाहाकार मच जाता है। हाल ही के हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की है। इसका सीधा असर एनर्जी, मीडिया, तेल-गैस और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों पर पड़ा है। इन सेक्टरों के इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की गाढ़ी कमाई खतरे में पड़ गई है।
इसके अलावा, देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी समय-समय पर बड़े फैसले और कानूनी झटके सामने आ रहे हैं, जो बाजार के सेंटीमेंट को बिगाड़ते हैं। यस बैंक से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो या फिर सरकारी विनिवेश से जुड़ी नीतियां, हर बड़ी खबर का सीधा असर शेयर के भाव पर पड़ता है। हालांकि, सरकार और वित्तीय मंत्रालय की तरफ से अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बाजार की नब्ज काफी संवेदनशील बनी हुई है।
शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
मौजूदा हालात को देखते हुए वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि आम निवेशकों को बिना सोचे-समझे किसी भी शेयर में पैसा नहीं लगाना चाहिए। बाजार में जब तक स्थिरता नहीं आती, तब तक जोखिम बहुत ज्यादा रहता है। निवेशकों को हमेशा अच्छी कंपनियों के फंडामेंटल देखकर ही निवेश करना चाहिए। एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करना समझदारी मानी जाती है, ताकि बाजार के गिरने पर नुकसान को कम किया जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल कहती है कि बाजार का यह रूप अभी कुछ और दिन बना रह सकता है। वैश्विक स्तर पर हो रहे घटनाक्रम और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में निवेशकों को सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से दूर रहना चाहिए और अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेकर ही कोई बड़ा कदम उठाना चाहिए। धैर्य और संयम ही इस समय शेयर बाजार में टिके रहने का सबसे बड़ा हथियार है।




