यदि आपको हाल ही में बाजार में आए नए स्मार्टफोन बेहद महंगे नजर आ रहे हैं, तो आने वाले वक्त में आपकी जेब पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर तकनीक बाजार में चल रहे बदलावों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जो सीधे तौर पर हर टेक प्रेमी और मोबाइल खरीदार को प्रभावित करने वाली है। दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रोडक्ट्स की लागत लगातार ऊपर जा रही है, और इसके पीछे एक ऐसा घटक मुख्य वजह है जिसे आम ग्राहक फोन के बाहर से कभी नहीं देख पाता है—वह है इंटरनल मेमोरी चिप।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूख और मेमोरी की बढ़ती किल्लत
बीते कुछ वर्षों में तकनीकी दुनिया का पूरा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर टिक गया है। हर छोटी-बड़ी कंपनी अपने डिवाइस में स्मार्ट फीचर्स जोड़ने की होड़ में लगी हुई है। इन फीचर्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी मात्रा में डेटा प्रोसेसिंग और हाई-स्पीड रैम की आवश्यकता होती है। इसके लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं, जिनमें हाई बैंडविड्थ मेमोरी की मांग आसमान छू रही है।
सैमसंग, माइक्रोन और एसके हाइग्निक्स जैसी वैश्विक चिप निर्माता कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस हाई-एंड कमर्शियल मेमोरी की आपूर्ति की तरफ मोड़ दिया है। इस वजह से स्मार्टफोन और अन्य पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगने वाली सामान्य रैम और स्टोरेज चिप्स पर सप्लाई का भारी दबाव बन गया है। जब मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होती है, तो स्वाभाविक रूप से कीमतों में उछाल आना तय माना जाता है।
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मेमोरी चिप की कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी
उद्योग जगत से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले वर्षों में आईफोन निर्माता कंपनी ऐपल को भी मेमोरी के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है। एलपीडीडीडीआर5एक्स रैम और एनएएनडी स्टोरेज जैसी जरूरी तकनीकों की कीमतें वर्तमान दरों की तुलना में काफी ज्यादा आंकी जा रही हैं। जानकारों का अनुमान है कि प्रीमियम स्मार्टफोन की कुल निर्माण लागत में अकेले मेमोरी का हिस्सा तीस प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है।
यानी जिस एआई तकनीक को उपभोक्ता अपने फोन में अधिक स्मार्ट और तेज फीचर्स पाने के लिए पसंद कर रहे हैं, वही तकनीक अप्रत्यक्ष रूप से डिवाइस की निर्माण लागत को बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण बनती जा रही है। डिवाइस निर्माता कंपनियों के लिए अपने प्रो-माडल और फ्लैगशिप फोन तैयार करना और अधिक खर्चीला साबित हो रहा है।
"तकनीक के इस दौर में यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए हार्डवेयर पर निवेश बढ़ाना पड़ रहा है, लेकिन सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें पूरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।"— टेक इंडस्ट्री विशेषज्ञ, द फ्रीलांस
क्या ग्राहकों को चुकानी होगी भारी कीमत?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या निर्माण लागत में होने वाली इस बढ़ोतरी का सीधा बोझ आम ग्राहकों पर डाला जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐपल जैसी कंपनियां अपनी रणनीति के तहत इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर सकती हैं, सप्लायर्स के साथ नए समझौते कर सकती हैं या फिर अपने फोन के स्टोरेज कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि, यदि वैश्विक बाजार में मेमोरी की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले मॉडल्स की लॉन्चिंग कीमतों में इजाफा होना लगभग तय माना जा रहा है।
इसका असर केवल एक ब्रांड तक सीमित नहीं रहने वाला है। ओप्पो, वीवो, शाओमी और वनप्लस जैसे अन्य लोकप्रिय एंड्राइड ब्रांड्स भी इन्हीं सप्लायर्स से रैम और स्टोरेज खरीदते हैं। ऐसे में पूरी मोबाइल इंडस्ट्री पर कीमतों का दबाव साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है और आने वाले दिनों में बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक के गैजेट्स महंगे हो सकते हैं।
भविष्य में स्मार्टफोन खरीदना होगा और अधिक चुनौतीपूर्ण
आने वाले समय में जब ग्राहक नया फोन खरीदने बाजार जाएंगे, तो उन्हें कम कीमत में ज्यादा रैम और स्टोरेज मिलने के विकल्प सीमित नजर आ सकते हैं। औसत प्रीमियम फोन में रैम की मात्रा लगातार बढ़कर 12 जीबी तक पहुंच चुकी है, क्योंकि आधुनिक एआई फीचर्स को रन करने के लिए उच्च क्षमता अनिवार्य हो गई है। ऐसे में कंपनियों को यह तय करना होगा कि वे अपने मुनाफे के मार्जिन से समझौता करती हैं या फिर ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमतों का सामना करने के लिए तैयार करती हैं।






