होम/देश/बीमा पॉलिसी लेने वालों के लिए बड़ी खबर: एजेंटों के कमीशन और खर्च पर लगेगी लगाम, क्या अब घटेगा प्रीमियम?
देशपढ़ने में समय: 7 मिनट

बीमा पॉलिसी लेने वालों के लिए बड़ी खबर: एजेंटों के कमीशन और खर्च पर लगेगी लगाम, क्या अब घटेगा प्रीमियम?

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इंश्योरेंस कंपनियों के खर्च और डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर सख्त सीमाएं तय करने का नया प्रस्ताव पेश किया है। इस बदलाव से कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च में कमी आने की उम्मीद है, हालांकि क्या इसका सीधा फायदा ग्राहकों के प्रीमियम में कटौती के रूप में मिलेगा या नहीं, इस पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
बीमा पॉलिसी लेने वालों के लिए बड़ी खबर: एजेंटों के कमीशन और खर्च पर लगेगी लगाम, क्या अब घटेगा प्रीमियम?
📷 बीमा पॉलिसी लेने वालों के लिए बड़ी खबर: एजेंटों के कमीशन और खर्च पर लगेगी लगाम, क्या अब घटेगा प्रीमियम? — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • IRDAI के नए कंसल्टेशन पेपर में बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च (EoM) और एजेंटों के कमीशन को सीमित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
  • प्रस्ताव के अनुसार लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह सीमा आने वाले कुछ वर्षों में घटाकर 12.5 प्रतिशत तक लाई जा सकती है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि कमीशन घटने से कंपनियों की लागत जरूर घटेगी, लेकिन प्रीमियम में तुरंत भारी कमी आने की संभावना कम है।

बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, क्या आम आदमी की जेब को मिलेगी राहत

जब भी कोई आम नागरिक जीवन बीमा या स्वास्थ्य बीमा की पॉलिसी खरीदता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि उसे मिलने वाले कवरेज के बदले कितना प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है। अमूल्य सुरक्षा और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के नाम पर लोग हर साल अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा प्रीमियम के रूप में जमा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा भरे जाने वाले इस प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ जोखिम कवर के लिए नहीं होता? इस कीमत में पॉलिसी बेचने वाले एजेंटों का कमीशन, ब्रोकरेज और कंपनियों के प्रशासनिक खर्च भी शामिल होते हैं।

अब देश के बीमा सेक्टर को विनियमित करने वाली संस्था यानी भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इसी पूरी लागत संरचना को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। नियामक ने एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें इंश्योरेंस कंपनियों के खर्च और डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर सख्त नियंत्रण लगाने के प्रस्ताव रखे गए हैं। इस कदम का उद्देश्य बीमा बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों के पैसों का सही इस्तेमाल हो।

बीते एक दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो देश में बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम लगातार बढ़ता गया है, लेकिन ग्राहकों को मिलने वाले कवरेज का दायरा उस अनुपात में नहीं बढ़ा। कई मौकों पर यह देखा गया है कि बीमा कंपनियां ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के बजाय अपने डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों और ब्रोकर्स को भारी-भरकम कमीशन बांटने पर अधिक ध्यान देती रही हैं। इसी असंतुलन को पाटने के लिए अब नियामक ने दखल दिया है, जिसके दूरगामी परिणाम पूरे बीमा बाजार पर देखने को मिल सकते हैं।

संबंधित खबरें

बिहार के होटल में युवती से हैवानियत: कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

बिहार के होटल में युवती से हैवानियत: कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

कर्ज के दलदल से बाहर निकली दिग्गज ज्वेलरी कंपनी पीसी ज्वेलर, बाजार में मचे कोहराम के बीच निवेशकों की बल्ले-बल्ले

कर्ज के दलदल से बाहर निकली दिग्गज ज्वेलरी कंपनी पीसी ज्वेलर, बाजार में मचे कोहराम के बीच निवेशकों की बल्ले-बल्ले

इंस्टाग्राम पर छाया 'काला चश्मा' गाने पर लड़की का एनर्जेटिक डांस, आत्मविश्वास देख यूजर हैरान

इंस्टाग्राम पर छाया 'काला चश्मा' गाने पर लड़की का एनर्जेटिक डांस, आत्मविश्वास देख यूजर हैरान

बदलता मौसम बन रहा सेहत का दुश्मन: तेजी से फैल रहा वायरल बुखार, जुकाम और जोड़ों का दर्द

बदलता मौसम बन रहा सेहत का दुश्मन: तेजी से फैल रहा वायरल बुखार, जुकाम और जोड़ों का दर्द

Tata का बड़ा दांव: केवल 4.69 लाख में घर लाएं टाटा की इलेक्ट्रिक कार, जानिए कैसे काम करता है BaaS प्लान

Tata का बड़ा दांव: केवल 4.69 लाख में घर लाएं टाटा की इलेक्ट्रिक कार, जानिए कैसे काम करता है BaaS प्लान

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनावी रण: नामांकन प्रक्रिया शुरू, 23 अक्टूबर को होगा मतदान

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनावी रण: नामांकन प्रक्रिया शुरू, 23 अक्टूबर को होगा मतदान

डिलीवरी के बाद सांस फूलना और छाती का दर्द हो सकता है खतरनाक, नई माताएं न करें ये बड़ी भूल

डिलीवरी के बाद सांस फूलना और छाती का दर्द हो सकता है खतरनाक, नई माताएं न करें ये बड़ी भूल

कोलकाता-आलमनगर पूजा स्पेशल ट्रेन: दशहरा और दीवाली पर घर जाना आसान, रेलवे ने चलाए 14 फेरे

कोलकाता-आलमनगर पूजा स्पेशल ट्रेन: दशहरा और दीवाली पर घर जाना आसान, रेलवे ने चलाए 14 फेरे

मैनेजमेंट खर्च को चरणबद्ध तरीके से घटाने का प्रस्ताव

बीमा नियामक के नए प्रस्तावों के केंद्र में एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट यानी EoM (मैनेजमेंट खर्च) की सीमा तय करना है। अभी तक कंपनियों के पास प्रशासनिक और प्रबंधन खर्च के नाम पर काफी छूट रही है, जिससे ग्राहकों को सीधा वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहा था। IRDAI का नया फॉर्मूला यह है कि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए EoM की सीमा को उनकी ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) के साथ जोड़ा जाए।

प्रस्ताव के मुताबिक, इस सीमा को अगले दो वर्षों में घटाकर 15 प्रतिशत और पांच वर्षों के भीतर 12.5 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए। इसके अलावा, जो बीमा कंपनियां पहले से ही इस तय सीमा से नीचे काम कर रही हैं, उनके लिए पांच साल की अवधि में इसे और घटाकर 10 प्रतिशत तक लाने का दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को अपनी कमाई और खर्च के बीच एक सख्त संतुलन बनाना होगा।

केवल जीवन बीमा ही नहीं, बल्कि जनरल इंश्योरेंस यानी सामान्य बीमा कंपनियों के लिए भी नियमों को कड़ा किया जा रहा है। सामान्य बीमा कंपनियों के मामले में अभी तक ग्रॉस रिटेन प्रीमियम का उपयोग कैलकुलेशन के लिए होता था, जिसे अब डोमेस्टिक GDPI से जोड़ने की तैयारी है। इसके तहत भी पांच साल के भीतर EoM की सीमा को 20 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है, जबकि शुरुआती दो सालों के लिए 25 प्रतिशत का अंतरिम स्तर सुझाया गया है।

एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों के कमीशन पर कसेगा शिकंजा

बीमा कारोबार का एक बहुत बड़ा हिस्सा एजेंटों, ब्रोकर्स और विभिन्न डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों के नेटवर्क पर टिका होता है। पॉलिसी बेचने के एवज में इन्हें मिलने वाला कमीशन बीमा की कुल लागत को काफी हद तक बढ़ा देता है। नए प्रस्तावों में इस बात पर जोर दिया गया है कि अलग-अलग तरह के इंश्योरेंस उत्पादों और डिस्ट्रीब्यूशन माध्यमों के हिसाब से कमीशन की अलग और स्पष्ट सीमाएं तय की जाएं।

इस बदलाव के पीछे मुख्य सोच यह है कि एजेंटों को मिलने वाली भारी-भरकम रकम पर लगाम लगे, जिससे कंपनियों की कुल लागत में कमी आए। जब लागत घटेगी, तो कंपनियों के पास अपने ग्राहकों को बेहतर रिटर्न या अधिक प्रतिस्पर्धी दरें देने का अवसर होगा। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस व्यवस्था से छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में बीमा उत्पादों की पहुंच पर असर पड़ सकता है, क्योंकि कम कमीशन मिलने पर डिस्ट्रीब्यूशन चैनल अपना फोकस बदल सकते हैं।

"कमीशन कम होने का मतलब यह कतई नहीं है कि बीमा कंपनियों का प्रीमियम उसी अनुपात में तुरंत घट जाएगा। कंपनियां बची हुई इस राशि का इस्तेमाल अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने, क्लेम प्रोसेसिंग को तेज करने और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने में कर सकती हैं। इसलिए ग्राहकों को तुरंत किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।" — इंद्रनील चटर्जी, बीमा विशेषज्ञ

क्या सचमुच सस्ती हो जाएंगी बीमा पॉलिसियां

यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर पॉलिसीधारक के मन में उठ रहा है। क्या खर्च और कमीशन घटने के बाद हमें कम प्रीमियम में बेहतर पॉलिसियां मिलेंगी? वित्तीय सलाहकारों और उद्योग के विशेषज्ञों का इस मामले में मिला-जुला रुख है। उनका कहना है कि कागज पर लागत कम होना और ग्राहक की जेब पर उसका सीधा असर पड़ना दो अलग बातें हैं।

कई विशेषज्ञों का तर्क है कि बीमा कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन पर बचने वाले पैसे का इस्तेमाल अपनी आंतरिक सेवाओं को उन्नत करने में करेंगी। आज के डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी का अपग्रेडेशन, तेज क्लेम सेटलमेंट, अंडरराइटिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और पॉलिसीधारकों की शिकायतों का त्वरित समाधान करना कंपनियों के लिए बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। ऐसे में, बचत का एक बड़ा हिस्सा इन क्षेत्रों में निवेश किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, यदि छोटी राशि या कम प्रीमियम वाली पॉलिसियों पर डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाला कमीशन बहुत कम हो जाता है, तो उनका रुझान उन पॉलिसियों की तरफ कम हो सकता है। इससे खासकर छोटे ग्राहकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बीमा उत्पादों की सही जानकारी मिलने में शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

पॉलिसी खरीदते समय किन बातों का रखना होगा विशेष ध्यान

चूंकि ये सारे बदलाव अभी केवल कंसल्टेशन पेपर के स्तर पर हैं और IRDAI ने इस पर संबंधित पक्षों तथा आम जनता से प्रतिक्रियाएं मांगी हैं, इसलिए अंतिम नियमों के आने में अभी समय है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे केवल प्रीमियम के आंकड़ों के आधार पर कोई भी वित्तीय निर्णय न लें।

जब भी आप कोई नई पॉलिसी खरीदें या अपनी पुरानी पॉलिसी को रिन्यू कराएं, तो निम्नलिखित बिंदुओं पर जरूर गौर करें:

  • क कवरेज और एक्सक्लूशन्स: केवल यह न देखें कि प्रीमियम कितना कम या ज्यादा है, बल्कि यह जांचें कि पॉलिसी में किन-किन जोखिमों को कवर किया गया है और किन चीजों को बाहर रखा गया है।
  • क्लेम सेटलमेंट रेशियो: बीमा कंपनी का पिछला क्लेम भुगतान रिकॉर्ड और ग्राहकों का अनुभव कैसा रहा है, इसकी पूरी जानकारी प्राप्त करें।
  • सेवाओं की गुणवत्ता: कंपनी की ग्राहक सेवा, पॉलिसी की शर्तें और रिन्यूअल प्रक्रिया कितनी आसान है, इस पर विशेष ध्यान दें।
  • तुलना करना न भूलें: बाजार में उपलब्ध अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों के प्रोडक्ट्स की कीमतों और फायदों की आपस में तुलना जरूर करें।

अंत में यही कहा जा सकता है कि IRDAI का यह कदम बीमा बाजार को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाने की दिशा में एक स्वागत योग्य पहल है। हालांकि, इससे ग्राहकों को सीधा और तत्काल लाभ कितनी जल्दी मिलता है, यह पूरी तरह से अंतिम नियमों के स्वरूप और कंपनियों के व्यावसायिक आचरण पर निर्भर करेगा।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

बिहार के होटल में युवती से हैवानियत: कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंपNATIONAL

बिहार के होटल में युवती से हैवानियत: कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

29 सित॰
कर्ज के दलदल से बाहर निकली दिग्गज ज्वेलरी कंपनी पीसी ज्वेलर, बाजार में मचे कोहराम के बीच निवेशकों की बल्ले-बल्लेNATIONAL

कर्ज के दलदल से बाहर निकली दिग्गज ज्वेलरी कंपनी पीसी ज्वेलर, बाजार में मचे कोहराम के बीच निवेशकों की बल्ले-बल्ले

29 सित॰
इंस्टाग्राम पर छाया 'काला चश्मा' गाने पर लड़की का एनर्जेटिक डांस, आत्मविश्वास देख यूजर हैरानNATIONAL

इंस्टाग्राम पर छाया 'काला चश्मा' गाने पर लड़की का एनर्जेटिक डांस, आत्मविश्वास देख यूजर हैरान

29 सित॰
बदलता मौसम बन रहा सेहत का दुश्मन: तेजी से फैल रहा वायरल बुखार, जुकाम और जोड़ों का दर्दNATIONAL

बदलता मौसम बन रहा सेहत का दुश्मन: तेजी से फैल रहा वायरल बुखार, जुकाम और जोड़ों का दर्द

29 सित॰
Tata का बड़ा दांव: केवल 4.69 लाख में घर लाएं टाटा की इलेक्ट्रिक कार, जानिए कैसे काम करता है BaaS प्लानNATIONAL

Tata का बड़ा दांव: केवल 4.69 लाख में घर लाएं टाटा की इलेक्ट्रिक कार, जानिए कैसे काम करता है BaaS प्लान

29 सित॰
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनावी रण: नामांकन प्रक्रिया शुरू, 23 अक्टूबर को होगा मतदानNATIONAL

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनावी रण: नामांकन प्रक्रिया शुरू, 23 अक्टूबर को होगा मतदान

29 सित॰
डिलीवरी के बाद सांस फूलना और छाती का दर्द हो सकता है खतरनाक, नई माताएं न करें ये बड़ी भूलNATIONAL

डिलीवरी के बाद सांस फूलना और छाती का दर्द हो सकता है खतरनाक, नई माताएं न करें ये बड़ी भूल

29 सित॰
कोलकाता-आलमनगर पूजा स्पेशल ट्रेन: दशहरा और दीवाली पर घर जाना आसान, रेलवे ने चलाए 14 फेरेNATIONAL

कोलकाता-आलमनगर पूजा स्पेशल ट्रेन: दशहरा और दीवाली पर घर जाना आसान, रेलवे ने चलाए 14 फेरे

29 सित॰