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जम्मू-कश्मीर में बदलेगा राशन वितरण का सिस्टम: नई दुकानों के गठन और पुराने नेटवर्क के युक्तिकरण की तैयारी, जानें क्या होगा असर

जम्मू-कश्मीर में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन की दुकानों के पूरे नेटवर्क को नए सिरे से खंगाला जा रहा है। सरकार आर्थिक व्यवहार्यता और दूरदराज के इलाकों में पहुंच को आधार बनाकर नई दुकानें खोलने और पुरानी दुकानों का युक्तिकरण करने जा रही है।
The Freelance ब्यूरो
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22 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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जम्मू-कश्मीर में बदलेगा राशन वितरण का सिस्टम: नई दुकानों के गठन और पुराने नेटवर्क के युक्तिकरण की तैयारी, जानें क्या होगा असर
📷 जम्मू-कश्मीर में बदलेगा राशन वितरण का सिस्टम: नई दुकानों के गठन और पुराने नेटवर्क के युक्तिकरण की तैयारी, जानें क्या होगा असर — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • जम्मू-कश्मीर में उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) के नेटवर्क की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है।
  • नई दुकानें खोलने और पुरानी दुकानों के युक्तिकरण के लिए आर्थिक व्यवहार्यता और भौगोलिक पहुंच को मुख्य आधार बनाया गया है।
  • दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में राशन कवरेज को बेहतर बनाने के लिए विशेष समितियों का गठन किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में राशन दुकानों के नेटवर्क की हो रही है समीक्षा

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार ने उचित मूल्य की दुकानों (FPS) के पूरे नेटवर्क की नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक, विशेषकर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को आसानी से खाद्यान्न मिल सके। इसके लिए मौजूदा दुकानों के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ नई दुकानों की जरूरत का भी बारीकी से आकलन किया जा रहा है।

विधानसभा सत्र के दौरान खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सतीश शर्मा ने इस पूरी योजना का खाका सबके सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल दुकानों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि राशन वितरण व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित हो रही है। इसके तहत दुकानों की आर्थिक स्थिति, उनसे जुड़े राशन कार्ड धारकों की संख्या और तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता जैसे तमाम पहलुओं पर गंभीर मंथन किया जा रहा है।

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किन आधारों पर तय होगी नई राशन दुकानों की जरूरत?

नई उचित मूल्य की दुकानें खोलने के प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए सरकार ने कुछ कड़े और व्यावहारिक मानक तय किए हैं। इनमें सबसे अहम पैमाना 'आर्थिक व्यवहार्यता' यानी इकोनॉमिक वाइबिलिटी है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जो भी नई दुकान खुले, वह आर्थिक रूप से टिकाऊ हो ताकि डीलर को भी उचित आय मिल सके। इसके अलावा, संबंधित क्षेत्र में कुल राशन कार्डों की संख्या और भौगोलिक स्थिति को भी प्रमुखता से परखा जा रहा है।

तकनीकी मानकों का अनुपालन भी इस पूरी चयन प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया गया है। नई दुकानों के प्रस्तावों में ई-पॉस मशीन, इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन और आधार प्रमाणीकरण जैसी तकनीकों की उपलब्धता को अनिवार्य माना जा रहा है। इससे न केवल खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों पर सरकार का विशेष फोकस

पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए राशन प्राप्त करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में पर्याप्त कवरेज सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। कई ऐसे इलाके हैं जहां आबादी बिखरी हुई है और एक निश्चित दायरे में राशन कार्डों की संख्या कम होती है, जिसके कारण पारंपरिक मानदंडों के तहत वहां दुकान खोलना संभव नहीं हो पाता था।

इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार ने पहले ही एक विशेष समिति का गठन कर दिया है। यह समिति बिखरी हुई आबादी वाले क्षेत्रों के लिए एफपीएस स्थापित करने के मौजूदा नियमों और मानदंडों में छूट देने की सिफारिशों पर काम कर रही है। समिति की इन सिफारिशों के आधार पर ही दूरदराज के गांवों और ढाणियों तक राशन की पहुंच को आसान बनाया जाएगा।

सारथक-पीडीएस योजना और डीलरों की सुनिश्चित आय का मॉडल

उचित मूल्य दुकान डीलरों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की 'सार्थक-पीडीएस' अंब्रेला योजना के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस योजना के माध्यम से राशन के परिवहन, हैंडलिंग और डीलरों के मार्जिन से जुड़े तकनीकी सुधारों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। मंत्री सतीश शर्मा ने सदन में जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए संशोधित मानदंडों से डीलरों की आय सुनिश्चित होगी।

जब डीलरों की आय तय होगी और उन्हें समय पर मार्जिन मिलेगा, तो वे अपनी सेवाएं और अधिक ईमानदारी व बेहतर तरीके से दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस आर्थिक सुधार मॉडल से पूरी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ मजबूत होगी और डीलर तथा उपभोक्ता दोनों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

"जम्मू-कश्मीर में राशन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जन-कल्याणकारी बनाया जा रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में कोई भी नागरिक इस बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे, इसके लिए नियमों की समीक्षा की जा रही है और समितियों की रिपोर्ट के आधार पर हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।" — सतीश शर्मा, मंत्री, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

पाम्पोर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण और जमीनी हकीकत

वितरण व्यवस्था की स्थिति को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने पाम्पोर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि फिलहाल पाम्पोर में ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जो राशन की दुकान की सुविधा से वंचित हो। वहां के आंकड़ों के अनुसार, अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत 2,679 राशन कार्डों से 10,163 लाभार्थी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) श्रेणी में 15,470 राशन कार्डों से 67,157 और गैर-प्राथमिकता वाले परिवार (NPHH) श्रेणी में 9,776 राशन कार्डों से 40,457 लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

इस तरह अकेले पाम्पोर क्षेत्र में कुल 27,925 राशन कार्डों के माध्यम से 1,17,777 लाभार्थी नियमित रूप से राशन प्राप्त कर रहे हैं। सरकार इसी मॉडल को पूरे केंद्र शासित प्रदेश में लागू करने की योजना बना रही है ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में राशन आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह से बना रहे।

युक्तिकरण प्रक्रिया से क्या होगा बड़ा बदलाव?

मौजूदा उचित मूल्य की दुकानों के युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) की प्रक्रिया के तहत उन दुकानों पर विशेष नजर रखी जा रही है जहां जरूरत से ज्यादा राशन कार्ड जुड़े हुए हैं, जिससे डीलरों और उपभोक्ताओं दोनों को परेशानी होती है। ऐसे स्थानों पर नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं ताकि भीड़ को बांटा जा सके और सुगम तरीके से वितरण हो सके।

यह पूरी प्रक्रिया 19 जनवरी 2023 को जारी एसओ-41 के तहत निर्धारित मानदंडों के दायरे में पूरी की जा रही है। आने वाले दिनों में इन सुधारों के लागू होने से जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों को राशन प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और सरकारी अनाज सीधे वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा।

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