बिहार की राजनीति में एक बार फिर कानून के पालन और संवेदनशीलता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ताजा मामला जमुई जिले से जुड़ा है, जहां कुछ दिन पहले एक नाबालिग छात्रा के साथ सड़क पर हुई बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई थी। अब इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने के बाद उसे डिलीट कर दिया गया। विपक्षी दलों ने इसे कानून का खुला उल्लंघन करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जमुई की घटना और पीड़ित परिवार की मुख्यमंत्री से मुलाकात
बता दें कि जमुई जिले के मड़वा पहाड़ के पास 19 सितंबर की शाम को एक चौदह वर्षीय दसवीं की छात्रा के साथ कुछ उपद्रवियों ने गंभीर बदसलूकी की थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित छात्रा का परिवार न्याय की गुहार लगाने पटना पहुंचा था। गुरुवार को इस परिवार ने राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी, जहां उन्हें आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया था।
मुलाकात के बाद परिवार ने राहत की सांस ली थी और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर संतोष जताया था। परिजनों का कहना था कि प्रशासन ने उन्हें यह आश्वासन दिया है कि इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाया जाएगा और बहुत जल्द सभी दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस बीच प्रशासनिक स्तर पर भी तेजी दिखाते हुए दो वरिष्ठ महिला अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है ताकि कोर्ट में कानूनी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
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सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करना पड़ा भारी
विवाद की असली शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पीड़ित परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीरें बिना किसी ब्लर के सार्वजनिक कर दी गईं। इन तस्वीरों में नाबालिग पीड़िता के परिजनों के चेहरे साफ नजर आ रहे थे। हालांकि, इस पोस्ट को करीब पंद्रह मिनट के भीतर ही हटा लिया गया, लेकिन तब तक विपक्ष की नजर इस पर पड़ चुकी थी। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
विपक्षी नेताओं का तर्क है कि कानून के मुताबिक पोक्सो एक्ट के तहत किसी भी नाबालिग पीड़िता या उसके परिवार की पहचान को गोपनीय रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है ताकि उनकी सुरक्षा पर कोई आंच न आए। जब देश और राज्य के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोग ही इस तरह के नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जा सकती है। इसी को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं और मामले ने तूल पकड़ लिया है।
राजद ने खोला मोर्चा, थाने में दर्ज कराने पहुंचे शिकायत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने आक्रामक रुख अपना लिया है। राजद की वरिष्ठ नेता और सांसद मीसा भारती के नेतृत्व में पार्टी के कई नेता सचिवालय थाने पहुंचे। उन्होंने मांग की कि पोक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप में मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। हालांकि, थाना प्रभारी ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर कानून के दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
"पोक्सो एक्ट के तहत नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की पहचान को सार्वजनिक करना कानूनी रूप से अपराध है। कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए, चाहे वह पद पर बैठा कोई व्यक्ति ही क्यों न हो। हम इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे।" — मीसा भारती, राजद सांसद
विपक्ष का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में वीडियो वायरल करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ तो तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन पहचान उजागर करने वाले नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई से क्यों बचा जा रहा है। उनका आरोप है कि गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मुखिया के स्तर पर इस तरह की लापरवाही न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े करती है।
पुलिस की कार्रवाई और एनकाउंटर का पहलू
जमुई कांड के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने शुरुआती सुस्ती के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी नंदन यादव के साथ पुलिस की मुठभेड़ की भी खबर आई थी जिसमें उसके पैर में गोली लगी और वह पुलिस हिरासत में उपचाराधीन है। इसके अलावा पुलिस ने तीन नाबालिगों समेत कुल छह आरोपियों को दबोच लिया है। स्थानीय स्तर पर पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि आखिर घटना के इतने घंटों तक स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
प्रशासन की ओर से लगातार यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जिला प्रशासन ने पंद्रह से बीस दिनों के भीतर अदालत के माध्यम से सजा दिलाने का लक्ष्य तय किया है। बहरहाल, फोटो डिलीट होने और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना से बढ़कर बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।




