नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रदर्शन के दौरान मचे बवेले और गंभीर आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। मौके पर मौजूद महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और यौन हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। पुलिस महकमा अब इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए हर संभव साक्ष्य जुटा रहा है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद जब लोग और आयोजक वहां इकट्ठा हुए तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस पर प्रदर्शनकारी बुरी तरह भड़क गए और मौके पर जमकर नारेबाजी हुई। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नाराजगी जताई। आयोजक सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को अपनी बात रखने से रोकने का अधिकार किसी को नहीं है।
महिला पत्रकारों पर हमले के आरोप और क्राइम ब्रांच की एंट्री
विरोध प्रदर्शन के दौरान रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और यौन हमले की खबरों ने तूल पकड़ लिया। महिला पत्रकारों का आरोप है कि भीड़ और प्रदर्शन के दौरान उन्हें निशाना बनाया गया और उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ। इस संवेदनशील मामले के तूल पकड़ते ही दिल्ली पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गया। बिना देर किए इस गंभीर मामले की फाइल क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई। क्राइम ब्रांच की टीमें अब उन सभी वीडियो फुटेज और तस्वीरों को खंगाल रही हैं जो घटना के दिन जंतर-मंतर पर रिकॉर्ड की गई थीं।
जांच के दायरे में केवल प्रदर्शनकारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि उस दौरान की गई पुलिस व्यवस्था और गैंग्स्टर-पुलिस गठजोड़ से जुड़े पुराने मामलों के तार भी खंगाले जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और पॉडकास्ट में इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि इस हंगामे के पीछे कुछ ऐसे तत्व भी सक्रिय थे जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। क्राइम ब्रांच की विशेष टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस विरोध प्रदर्शन को किसी बड़ी साजिश के तहत हिंसक रूप दिया गया था या यह केवल तात्कालिक आक्रोश का परिणाम था।
प्रशासनिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख और बॉडी कैमरा का आदेश
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जंतर-मंतर और शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में होने वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस मुस्तैदी पर अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक अब ड्यूटी पर तैनात हर पुलिसवाले को बॉडी कैमरा पहनना अनिवार्य किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आम जनता के बीच होने वाली हर झड़प का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और किसी भी पक्ष की तरफ से होने वाली गलती को आसानी से पकड़ा जा सके।
दूसरी तरफ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तरफ से प्रशासन के खिलाफ तीखे हमले जारी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में आम आदमी की आवाज को दबाया जा रहा है और केवल इस्तीफे से काम नहीं चलेगा बल्कि पूरे सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच का यह टकराव आने वाले दिनों में और गहरा सकता है क्योंकि क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कई नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जांच का दायरा और आगामी कार्रवाई की दिशा
फिलहाल जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और किसी भी नए प्रदर्शन को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। खुफिया एजेंसियां और क्राइम ब्रांच मिलकर उन मुख्य चेहरों की पहचान कर रही हैं जिन्होंने अनुमति न मिलने के बावजूद भीड़ को उकसाया था। महिला पत्रकारों पर हुए हमलों के मामले में दोषियों को बख्शने के संकेत नहीं दिए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा और कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा।




