नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर तनाव और हंगामे के आसार बन गए हैं। राजधानी के इस प्रमुख धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन की इजाजत न मिलने के बाद विवाद गहराता जा रहा है। हालात तब और बिगड़ गए जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने पुलिस के खिलाफ खुली भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। आयोजकों ने साफ कह दिया है कि वे पुलिस की रोक के बावजूद पीछे नहीं हटेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रिंकु यादव का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खुलेआम जिम जाने वाले लड़कों और पहलवानों से अपील की गई है कि वे अपने साथ लट्ठ लेकर जंतर-मंतर पहुंचें। इस तरह की बयानोंबाजी के सामने आने के बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह के भड़काऊ संदेशों के पीछे कौन लोग हैं और युवाओं को गुमराह क्यों किया जा रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत न मिलने पर भड़के आयोजक
प्रशासन की तरफ से साफ मनाही के बाद भी प्रदर्शनकारी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सौरव दास ने प्रशासन और पुलिस के रवैये पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस आखिर कौन होती है किसी को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने से रोकने वाली। उनका यह भी कहना है कि यदि प्रशासन ने सख्ती दिखाने की कोशिश की तो स्थिति बेकाबू हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन और प्रशासन की होगी।
दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है कि ऐसे आयोजनों को कौन हवा दे रहा है। दिल्ली की राजनीति में पहले से ही कई मुद्दों पर गर्माहट बनी हुई है। पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अनहोनी या उपद्रव को समय रहते रोका जा सके।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयानों की बाढ़ और पुलिस की नजर
आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी छोटी बात को पलभर में बड़ा मुद्दा बना देता है। इस मामले में भी इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। जिम के नाम पर युवाओं को इकट्ठा करने और उनके हाथ में लाठी-डंडे थमाने जैसी अपीलें सीधे तौर पर कानून और व्यवस्था के लिए खुली चुनौती हैं। साइबर सेल की टीमें ऐसे सभी अकाउंट्स की पहचान करने में जुट गई हैं जो इस तरह की भड़काऊ सामग्री को बढ़ावा दे रहे हैं।
जमीनी स्तर पर हमारे रिपोर्टर ने पाया कि जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय दुकानदारों और आम लोगों में इस बात को लेकर डर का माहौल है कि कहीं फिर से रास्ते बंद न हो जाएं और आम जनजीवन प्रभावित हो। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की कड़ी चेतावनी और आगे के हालात
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति के किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे भड़काऊ संदेशों को आगे न बढ़ाएं। प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियों को भी बैकअप के रूप में तैयार रखा गया है।
इस पूरे मामले में द फ्रीलान्स की टीम लगातार जमीनी हकीकत पर नजर रखे हुए है। जैसे-जैसे प्रदर्शन की तारीख और समय नजदीक आ रहा है, पुलिस और आयोजकों के बीच टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इन चेतावनियों के बीच कानून व्यवस्था को कैसे नियंत्रित करता है और क्या ये लोग अपनी जिद पर कायम रहते हैं।




