नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में एक बार फिर बयानों का दौर पूरी तरह तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद डॉ. संबित पात्रा ने हाल ही में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों और खासकर कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। पात्रा ने राजनीतिक बयानों के बीच एक नया तंज कसते हुए कहा कि आज के समय में बीजेपी की मदद चुनाव आयोग के अधिकारी नहीं बल्कि भगवान गणेश कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बहुत तेजी से शुरू हो गई हैं और विपक्षी दलों की तरफ से भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अपनी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने कांग्रेस पार्टी के सामने कुल दस बड़े और तीखे सवाल रखे। उन्होंने इन सवालों के जरिए राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेताओं को घेरा। बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर बेवजह सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष चुनाव हारता है तो वह अपनी कमियां देखने के बजाय सीधे तौर पर संस्थाओं और प्रक्रिया की निष्पक्षता पर शक जताने लगता है। पात्रा ने तर्कों के साथ यह साबित करने की कोशिश की कि जनता का मूड पूरी तरह साफ है और बीजेपी की जीत का कारण जनता का अटूट समर्थन है।
संबित पात्रा ने कांग्रेस से पूछे दस अहम सवाल
संबित पात्रा ने कांग्रेस पार्टी से सीधे तौर पर पूछा कि क्या उनके बड़े नेता भी चुनावी जीत और हार के नियमों से ऊपर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सांसद बनने की प्रक्रिया पर भी वही नियम लागू होते हैं जो दूसरों पर होते हैं। बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी सुविधानुसार बयानों को तोड़ती-मरोड़ती है और देश की जनता अब सब कुछ बहुत अच्छी तरह समझ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव जीतने के लिए जमीन पर मेहनत करनी पड़ती है, जो कांग्रेस पार्टी करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है और इसी वजह से वे लगातार मैदान में पिछड़ते जा रहे हैं।
संबित पात्रा के इस गणेश वाले बयान पर विपक्षी दलों की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस बयान पर अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सत्ता पक्ष इस तरह के बयानों के जरिए असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। देश में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं जैसे गंभीर मुद्दे पीछे छूट रहे हैं और राजनीतिक दलों के बीच केवल जुबानी जंग ही मुख्य खबर बनती जा रही है।
संसद और बयानों के बाजार में राजनीतिक पारा हाई
दिल्ली के राजनीतिक हलकों में इस समय संबित पात्रा के इन दस सवालों की गूंज साफ सुनी जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है। दोनों तरफ के नेता एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। एक तरफ जहां बीजेपी इसे अपनी वैचारिक और संगठनात्मक जीत मान रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश बता रहे हैं। आम जनता भी टीवी और सोशल मीडिया के जरिए इस पूरी राजनीतिक खींचतान पर अपनी नजर बनाए हुए है।
जमीनी स्तर पर देखा जाए तो इस तरह के बयानों से चुनावी और राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। कार्यकर्ता और नेता अपने-अपने दलों के पक्ष में बयानबाजी करने में जुटे हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि आने वाले समय में इन बयानों का जमीनी राजनीति पर क्या और कितना असर पड़ेगा। फिलहाल देश की राजनीति में जुबानी जंग का यह नया अध्याय काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ हर एक बयान के बहुत बड़े राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक चाल
विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि वे इन सवालों और बयानों का संसद से लेकर सड़क तक पुरजोर विरोध करेंगे। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि बीजेपी जनता के असली सवालों के जवाब देने से बचना चाहती है इसलिए ऐसे धार्मिक और प्रतीकात्मक बयानों का सहारा लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी इन दस सवालों का कोई आधिकारिक जवाब देती है या फिर यह विवाद सिर्फ जुबानी बयानबाजी तक ही सीमित रहकर शांत हो जाता है। हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग बताती है कि जनता इन सभी राजनीतिक गतिविधियों को बहुत गौर से देख रही है।






