झारखंड में शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो की बड़ी पहल
झारखंड की राजनीति में तेजी से उभरते चेहरे और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो इन दिनों लगातार जनता के बीच अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। इसी क्रम में उन्होंने हाल ही में लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड स्थित टिको में अविराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन का दौरा किया। इस दौरे के दौरान उनके साथ पार्टी के उपाध्यक्ष एवं जाने-माने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विशेष रूप से मौजूद रहे। महाविद्यालय पहुंचने पर कॉलेज प्रबंधन और विद्यार्थियों ने दोनों नेताओं का जोरदार स्वागत किया, जिसके बाद एक उच्चस्तरीय शैक्षणिक और सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य के युवाओं की शिक्षा, बेरोजगारी की समस्या और उससे उपजी पलायन की विभीषिका रही। झारखंड के ग्रामीण इलाकों से हर साल बड़ी संख्या में युवाओं और कामगारों का पलायन दूसरे राज्यों की ओर होता है। इस गंभीर विषय पर चिंता जताते हुए जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो ने कहा कि जब तक राज्य के युवाओं को उनकी अपनी ही धरती पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक इस पलायन के चक्र को रोकना पूरी तरह असंभव बना रहेगा।
बैठक के दौरान महाविद्यालय के सभागार में विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श किया गया। इसमें नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम, कैंपस सुरक्षा विशेषकर महिला सुरक्षा, और कौशल विकास कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने जैसे संवेदनशील विषयों को प्रमुखता से उठाया गया। उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर एकमत होकर बल दिया कि मौजूदा पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से आगे बढ़कर छात्रों को व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान से लैस करना वक्त की सबसे बड़ी मांग है।
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कौशल विकास और व्यावहारिक शिक्षा से ही बदलेगी झारखंड की तस्वीर
अविराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन के दौरे के दौरान कॉलेज के सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने महाविद्यालय में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों और नवाचारों की पूरी रूपरेखा नेताओं के सामने रखी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार संस्थान केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावहारिक और व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रहा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कॉलेज परिसर में कई तरह के वोकेशनल कोर्स चलाए जा रहे हैं।
सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि विद्यार्थियों को पारंपरिक डिग्री के साथ-साथ मत्स्य पालन, आधुनिक बागवानी, कृषि तकनीक और अन्य स्वरोजगारपरक गतिविधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिग्री पूरी होने के बाद छात्र नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय खुद रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें और ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।
इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था मेंतालीम के साथ-साथ हुनर का होना उतना ही जरूरी है जितना कि सांस लेना। उन्होंने कहा कि झारखंड के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच, सही दिशा और कौशल आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। यदि शिक्षण संस्थान इसी तरह व्यावहारिक शिक्षा पर जोर देने लगें, तो राज्य का युवा किसी भी परिस्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर नहीं पड़ेगा।
युवाओं की भूमिका और प्रतियोगी परीक्षाओं के आंदोलनों पर खुलकर हुई चर्चा
बैठक में छात्र नेता एवं जेएलकेएम उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भी युवाओं और छात्र हित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि झारखंड के युवाओं ने पिछले कुछ वर्षों में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ जिस तरह से एकजुट होकर सड़कों पर संघर्ष किया है, वह राज्य के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ है। युवाओं के इन आंदोलनों ने व्यवस्था को झकझोरने का काम किया है और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत जनचेतना फैलाई है।
देवेंद्र महतो ने आगे कहा कि आंदोलन करना केवल एक पड़ाव था, अब समय आ गया है कि युवा ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ते हुए शैक्षणिक सुधारों और रचनात्मक कार्यों में लगाया जाए। जेएलकेएम का मुख्य उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि राज्य के हर कोने तक शिक्षा की अलख जगाना और युवाओं को उनके संवैधानिक तथा रोजगार के अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खोलने के लिए पार्टी लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही है।
बैठक में शामिल शिक्षाविदों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने भी माना कि झारखंड में प्रतिभाओं की भरमार है, लेकिन नीतिगत मोर्चे पर इच्छाशक्ति की कमी के कारण वे पिछड़ जाते हैं। नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप अब राज्य के हर कॉलेज और स्कूल को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा ताकि विद्यार्थियों का चौतरफा व्यक्तित्व विकास हो सके।
पलायन रोककर स्थानीय स्तर पर अवसर पैदा करने की है सख्त जरूरत
झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए नेताओं ने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि यहां के संसाधनों पर पहला अधिकार यहां के स्थानीय युवाओं का होना चाहिए। यदि जल, जंगल, जमीन से समृद्ध इस राज्य में ही रोजगार के पर्याप्त साधन विकसित कर दिए जाएं, तो किसी भी युवा को अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिवार को छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने या धक्के खाने नहीं जाना पड़ेगा। पलायन झारखंड का एक ऐसा नासूर बन चुका है जिसे खत्म करने के लिए शिक्षा और औद्योगिक नीतियों में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है।
विधायक जयराम महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा तभी जाकर समग्र विकास का सपना साकार हो सकता है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके लिए रोजगार के विशेष अवसर सृजित करना भी हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि नारी शक्ति भी आत्मनिर्भर बनकर समाज के विकास में बराबर की हिस्सेदार बन सके।
"राज्य के युवाओं को केवल कागजी डिग्रियां नहीं, बल्कि हाथों में हुनर और मजबूत रोजगार चाहिए। जब तक झारखंड के हर गांव और हर शिक्षण संस्थान में गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक शिक्षा नहीं पहुंचेगी, तब तक पलायन के इस दर्द को पूरी तरह से खत्म करना नामुमकिन रहेगा। हमारी पार्टी शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर बिना थके निरंतर संघर्ष करती रहेगी।" — जयराम कुमार महतो, केंद्रीय अध्यक्ष, जेएलकेएम एवं डुमरी विधायक
निष्कर्ष: आने वाले दिनों में और तेज होगी जन-जागृति अभियान की मुहिम
लोहरदगा के कुड़ू स्थित अविराम कॉलेज में हुई यह उच्चस्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि झारखंड में आगामी राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की धुरी अब शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे बनने लगे हैं। जयराम महतो और देवेंद्र नाथ महतो के इस दौरे और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ संवाद ने यह साफ कर दिया है कि युवा नेतृत्व अब पारंपरिक राजनीति से ऊपर उठकर जमीनी समाधानों की तलाश में जुटा है।
बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि आने वाले समय में झारखंड के अन्य जिलों के शिक्षण संस्थानों और युवाओं के बीच जाकर इस संवाद को और व्यापक बनाया जाएगा। नई शिक्षा नीति के मानकों के तहत कॉलेजों में कौशल विकास, नवाचार और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार की जाएगी, ताकि राज्य का हर छात्र न केवल शिक्षित बने, बल्कि अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा होकर एक सशक्त झारखंड के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे सके।








