देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर खाकी और कानून की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले मामले सामने आते रहते हैं। ताजा मामला झारखंड से जुड़ा है, जहां एक आदिवासी महिला के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा क्रूरता की हदें पार करने का आरोप लगा है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही सामाजिक संगठनों और आम जनता में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राज्य के मुख्यमंत्री ने भी खुद इसमें हस्तक्षेप किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय शुरू हुई जब एक ग्रामीण महिला अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थी। झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से साझा की गई रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिला अपने खेत में बकरियां चरा रही थी, तभी कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में वहां पहुंचे और महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि महिला को जबरन थाने लाया गया और वहां उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
गंभीर आरोप और आदिवासी संगठनों की नाराजगी
इस घटना के तूल पकड़ने के बाद विभिन्न आदिवासी संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठनों का आरोप है कि थाने के भीतर महिला के साथ बेरहमी की गई, उसे टांगकर पीटा गया और जातिसूचक गालियां दी गईं। करीब एक दिन तक हिरासत में रखने के बाद महिला को छोड़ा गया। कार्यकर्ताओं और संगठनों ने मांग की है कि इस मामले में सिर्फ विभागीय जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कड़ा रुख
मामले के सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने और चौतरफा आलोचना के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर त्वरित प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' के जरिए पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से यह भी कहा गया है कि इस तरह के कृत्यों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।
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