राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जहां एक विधायक पर विकास कार्यों के दौरान अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला स्वर्णरेखा परियोजना से जुड़ा है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और इंजीनियरों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
घर बुलाकर मारपीट करने का आरोप
स्वर्णरेखा नगर परियोजना के कार्यपालक अभियंता शिवराम गगराई और एसडीओ विजय तिर्की ने आरोप लगाया है कि उन्हें विधायक ने अपने आवास पर बुलाया था। आरोप के मुताबिक, जब अधिकारियों से एक परियोजना के शिलान्यास और उससे जुड़े सबूतों को लेकर पूछताछ की गई और जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ गया, तब स्थिति बिगड़ गई। अधिकारियों का दावा है कि उन्हें न केवल गालियां दी गईं बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई। इस घटना के बाद से इंजीनियर समुदाय में भारी रोष देखा जा रहा है।
मामले से जुड़ा सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना प्रकरण
घटना के बाद से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है।
इंजीनियरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
इस घटना के विरोध में झारखंड अभियंता संघ और डिप्लोमा संघ ने आपात बैठक बुलाई। बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की गई कि यदि विधायक ने दो दिनों के भीतर सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगी, तो सभी इंजीनियर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इतना ही नहीं, विरोध स्वरूप शुक्रवार से ही इंजीनियर काली पट्टी बांधकर काम करने की बात कह रहे हैं। संघ का कहना है कि इस तरह के बर्ताव से मैदानी इलाकों में काम करना मुश्किल हो जाएगा और जनप्रतिनिधियों को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
विधायक और स्थानीय लोगों का पक्ष
दूसरी ओर, आरोपी विधायक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि जनता को हो रही परेशानियों के समाधान के लिए उन्हें अधिकारियों से कड़े सवाल पूछने पड़े और उन्होंने केवल डांटा था, मारपीट जैसी कोई घटना नहीं हुई है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल भी अधिकारियों के खिलाफ समर्थन में आगे आया है और उनका दावा है कि विधायक पर लगाए गए मारपीट के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
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