रोजगार मेलों की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दावे
देशभर में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाले रोजगार मेलों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि इनके जरिए हजारों युवाओं के भविष्य को संवारा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक महानगर कानपुर में भी प्रादेशिक सेवायोजन कार्यालय के अधिकारियों ने साल के अंत तक हजारों शिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने का बड़ा दावा किया था। हालांकि, जब इन दावों की परख जमीनी स्तर पर हुई, तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई। स्थानीय स्तर पर आयोजित एक बड़े रोजगार मेले में प्रशासनिक तैयारियों और युवाओं के रुख के बीच भारी अंतर देखने को मिला, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।
सोमवार को शहर के किदवई नगर इलाके स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज परिसर में एक वृहद रोजगार मेले का आयोजन किया गया था। इस मेले का मुख्य उद्देश्य विभिन्न कंपनियों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरियां दिलाना था। विभागीय अधिकारियों और योजनाकारों ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। कंपनियों के प्रतिनिधि, स्थानीय जन प्रतिनिधि और प्रशासनिक अमला तय समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच चुका था, लेकिन जिस वर्ग के लिए यह पूरी कवायद की गई थी, यानी नौकरी की आस लगाए बैठे युवा, उनकी संख्या बेहद निराशाजनक रही।
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12 हजार फोन कॉल्स के बावजूद क्यों खाली रहे काउंटर
इस रोजगार मेले को सफल बनाने के लिए विभागीय स्तर पर किस तरह की तैयारियां की गई थीं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल कागजी विज्ञापनों पर भरोसा नहीं किया गया। अधिकारियों के निर्देश पर विकास भवन में बने विशेष कॉल सेंटर के जरिए लगभग 12 हजार पंजीकृत युवाओं को फोन करके इस मेले में आने का निमंत्रण दिया गया था। इसके अलावा प्रादेशिक सेवायोजन कार्यालय की ओर से डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों से भी बड़े पैमाने पर इसका प्रचार-प्रसार किया गया था ताकि अधिक से अधिक संख्या में युवा इस अवसर का लाभ उठा सकें।
तमाम कोशिशों के बावजूद जब मेला शुरू हुआ, तो वहां का नजारा उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत था। भारी-भरकम प्रशासनिक तैयारियों और हजारों कॉल्स के बाद भी साक्षात्कार कक्षों के बाहर युवाओं की लंबी कतारें देखने को नहीं मिलीं। अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधिजवानों का इंतजार करते रहे, लेकिन कुल मिलाकर महज 657 छात्र-छात्राएं ही इस मेले में अपनी किस्मत आजमाने पहुंचे। इस सुस्त प्रतिक्रिया ने विभागीय अधिकारियों को भी हैरान कर दिया, क्योंकि जिस महानगर में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है, वहां इस तरह का रुख चौंकाने वाला था।
2600 पदों के मुकाबले सिर्फ 290 युवाओं का चयन
किदवई नगर के राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में लगे इस रोजगार मेले में विभिन्न कंपनियों की ओर से कुल 2600 पदों पर नियुक्तियां होनी थीं। तकनीकी, प्रशासनिक और मार्केटिंग समेत कई क्षेत्रों की रिक्तियों के साथ कंपनियां यहां पहुंची थीं। आयोजकों का अनुमान था कि भारी भीड़ होगी और युवाओं को छांटना कंपनियों के लिए मुश्किल होगा। मगर जब कुल 657 अभ्यर्थी ही पहुंचे, तो पूरी चयन प्रक्रिया बहुत सीमित दायरे में सिमट कर रह गई।
दिनभर चली प्रक्रिया के बाद अंततः कंपनियों ने विभिन्न पदों के लिए केवल 290 युवाओं को योग्य पाया और उन्हें मौके पर ही चयन पत्र यानी ऑफर लेटर सौंप दिए। इस प्रकार देखा जाए तो उपलब्ध कुल नौकरियों के मुकाबले बहुत ही कम युवाओं को रोजगार मिल पाया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी और दक्षिण जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने चयनित युवाओं का उत्साहवर्धन किया, लेकिन कम उपस्थिति ने आयोजकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
क्यों युवाओं ने रोजगार मेले से बनाई दूरी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब कारणों की समीक्षा की गई, तो कई ऐसे पहलू सामने आए जो युवाओं की मानसिकता और मौजूदा श्रम बाजार की वास्तविकताओं को दर्शाते हैं। प्रादेशिक सेवायोजन कार्यालय, कानपुर मंडल के सहायक निदेशक उज्ज्वल सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मेले में कम संख्या में युवाओं के पहुंचने के पीछे कुछ व्यावहारिक कारण रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पिछले दिनों हुई बारिश के कारण भी आवागमन प्रभावित हुआ, जिसके चलते कई युवा तय समय पर नहीं पहुंच सके।
"मेले में जिन कंपनियों ने हिस्सा लिया था, उनमें से अधिकांश की नौकरियां अहमदाबाद, हरियाणा, नोएडा और अन्य महानगरों के लिए थीं। कई युवाओं ने घर से दूर दूसरे राज्यों में जाकर काम करने के विकल्प को नहीं चुना, जिसके कारण वे चयन प्रक्रिया से दूर रहे या ऑफर ठुकरा दिए।" — उज्ज्वल सिंह, सहायक निदेशक, सेवायोजन कानपुर मंडल
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर युवाओं की प्राथमिकता अपने गृह नगर या आसपास के जिलों में ही नौकरी करने की होती है। दूर-दराज के राज्यों में मिलने वाले वेतन और वहां रहने के खर्च का संतुलन कई युवाओं को रास नहीं आता। इसके अलावा, कई बार ऑफर किए जाने वाले वेतनमान और योग्यता के बीच का तालमेल भी युवाओं को आकर्षित नहीं कर पाता है।
भविष्य की रणनीतियां और कॉलेजों में अभियान
रोजगार मेले में मिली इस आंशिक सफलता के बाद अब श्रम और सेवायोजन विभाग ने अपनी रणनीति में बदलाव करने का मन बना लिया है। अधिकारियों का कहना है कि केवल एक स्थान पर बड़ा मेला आयोजित करने के बजाय अब युवाओं तक सीधे पहुंच बनाई जाएगी। आने वाले दिनों में शहर के विभिन्न डिग्री कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में विशेष रोजगार अभियानों का संचालन किया जाएगा।
विभाग का मानना है कि यदि कॉलेज परिसरों में जाकर छात्रों की काउंसलिंग की जाए और उन्हें कंपनियों की आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से समझाया जाए, तो परिणाम बेहतर हो सकते हैं। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और युवाओं को बाहर जाने से जुड़ी झिझक को दूर करने के लिए भी मार्गदर्शन सत्र आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अगली बार जब इस तरह के आयोजन हों, तो उनका लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके।







