विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/देश/कर्नाटक सरकार को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने रद्द किया SC-ST आरक्षण बढ़ाने का फैसला
देशपढ़ने में समय: 4 मिनट

कर्नाटक सरकार को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने रद्द किया SC-ST आरक्षण बढ़ाने का फैसला

कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण बढ़ाने के पिछले फैसले को असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने साफ किया है कि सरकार 50 प्रतिशत की कुल आरक्षण सीमा को पार नहीं कर सकती है। इस बड़े फैसले से राज्य की राजनीति और सरकारी भर्तियों में नया मोड़ आ गया है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•15 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•31
🌐Read in English →
शेयर करें:
कर्नाटक सरकार को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने रद्द किया SC-ST आरक्षण बढ़ाने का फैसला
📷 कर्नाटक सरकार को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने रद्द किया SC-ST आरक्षण बढ़ाने का फैसला — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण बढ़ाने के पिछले फैसले को असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने साफ किया है कि सरकार 50 प्रतिशत की कुल आरक्षण सीमा को पार नहीं कर सकती है। इस बड़े फैसले से राज्य की राजनीति और सरकारी भर्तियों में नया मोड़ आ गया है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

बेंगलुरु/ग्राउंड ब्यूरो — कर्नाटक की राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य की पिछली सरकार द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति यानी एससी-एसटी वर्ग का कोटा बढ़ाने के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने सख्त फैसले में साफ कह दिया है कि आरक्षण की तय सीमा को लांघना कानून के दायरे में सही नहीं है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद से राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है और कानूनी जानकारों के बीच इस पर लंबी चर्चा शुरू हो गई है। यह मामला काफी समय से अदालत में चल रहा था जिस पर अब जाकर बड़ा फैसला आया है।

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में वह फैसला है जिसके तहत राज्य सरकार ने एससी और एसटी जातियों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मिलने वाले कोटे को बढ़ाने का कदम उठाया था। सरकार के इस कदम के बाद कुल आरक्षण का दायरा पचास प्रतिशत की संवैधानिक सीमा को पार कर गया था। अदालत में इस बात को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं जिनमें इसे संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ बताया गया था। सुनवाई के दौरान वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं और अंत में अदालत ने इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने का बड़ा आदेश सुना दिया।

पचास प्रतिशत की सीमा को नहीं तोड़ सकती सरकार

अदालत ने अपने फैसले में बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश का संविधान सामाजिक न्याय के साथ-साथ समानता के अधिकार पर भी पूरा जोर देता है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने दोहराया कि किसी भी राज्य में कुल आरक्षण का आंकड़ा पचास प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता है। जब तक कोई बेहद असाधारण और विशेष परिस्थिति साबित न हो, तब तक इस तयशुदा लक्ष्मण रेखा को तोड़ा नहीं जा सकता। कर्नाटक सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम इस कानूनी दायरे में खरा नहीं उतरा, जिसके कारण न्यायपालिका को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा।

इस फैसले के आने के बाद से राज्य के उन युवाओं और छात्रों की धड़कनें तेज हो गई हैं जो इस बढ़े हुए कोटे के तहत उम्मीद लगाए बैठे थे। सरकार के स्तर पर भी इस फैसले के दूरगामी परिणामों पर मंथन शुरू हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि पहले से पूरी हो चुकी भर्तियों या चल रही प्रवेश प्रक्रियाओं पर इस अदालत के आदेश का क्या और कितना असर पड़ेगा। राज्य के मंत्रियों और कानूनी सलाहकारों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है ताकि आगे की रणनीति बनाई जा सके।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल और बैठकों का दौर

दूसरी तरफ, कर्नाटक की राजनीति में इस अदालती झटके के बाद बयानों का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इसे सरकार की अदूरदर्शिता और कानूनी विफलता बता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा फैसला लिया था जो अदालत में टिक नहीं पाया। वहीं सत्ताधारी दल के नेता इस पूरे मामले का अध्ययन करने की बात कह रहे हैं। वे यह भी विचार कर रहे हैं कि क्या इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जानी चाहिए या नहीं। इस बीच दिल्ली में चल रही अन्य बैठकों के साथ-साथ राज्य के इस सियासी मुद्दे ने भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं.

आम जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों की नजरें भी अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि इस अदालती फैसले के बाद उनके अधिकारों और भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा। राज्य का प्रशासनिक तंत्र हर स्थिति से निपटने के लिए अपने स्तर पर कानूनी पहलुओं को खंगाल रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने की पूरी उम्मीद है क्योंकि चुनाव और आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय हमेशा से जनता से जुड़े रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले से जुड़े हर एक नए अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है।

प्रायोजित • SPONSORED
❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

संबंधित खबरें

पुनीत राजकुमार को मरणोपरांत कर्नाटक रत्न सम्मान, सरकार ने की बड़ी घोषणा

पुनीत राजकुमार को मरणोपरांत कर्नाटक रत्न सम्मान, सरकार ने की बड़ी घोषणा

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा नोटिस

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट बैन पर घिरे गृह सचिव गोविंद मोहन, अदालत में बिना शर्त मांगी माफी

सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट बैन पर घिरे गृह सचिव गोविंद मोहन, अदालत में बिना शर्त मांगी माफी

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, मुख्य चुनाव आयुक्त से मांगा गया जवाब

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, मुख्य चुनाव आयुक्त से मांगा गया जवाब

दिल्ली में इंटरनेट बैन मामला: सुप्रीम कोर्ट में गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

दिल्ली में इंटरनेट बैन मामला: सुप्रीम कोर्ट में गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बड़ी तैयारी: क्या केंद्र सरकार बुलाने जा रही है विशेष सत्र?

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बड़ी तैयारी: क्या केंद्र सरकार बुलाने जा रही है विशेष सत्र?

अंकिता भंडारी मर्डर केस: पिता वीरेंद्र भंडारी ने रखीं पांच मांगें, राहुल गांधी ने कहा- न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी

अंकिता भंडारी मर्डर केस: पिता वीरेंद्र भंडारी ने रखीं पांच मांगें, राहुल गांधी ने कहा- न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी

राहुल गांधी और शृंगेरी मठ के सीअर को लेकर वायरल हुआ फर्जी दावा, बूम की जांच में सच आया सामने

राहुल गांधी और शृंगेरी मठ के सीअर को लेकर वायरल हुआ फर्जी दावा, बूम की जांच में सच आया सामने

✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘gyanesh-kumar-supreme-court-notice’ व देश से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

पुनीत राजकुमार को मरणोपरांत कर्नाटक रत्न सम्मान, सरकार ने की बड़ी घोषणाPOLITICS

पुनीत राजकुमार को मरणोपरांत कर्नाटक रत्न सम्मान, सरकार ने की बड़ी घोषणा

15 अक्टू॰38
राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा नोटिसNATIONAL

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा नोटिस

15 अक्टू॰25
सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट बैन पर घिरे गृह सचिव गोविंद मोहन, अदालत में बिना शर्त मांगी माफीNATIONAL

सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट बैन पर घिरे गृह सचिव गोविंद मोहन, अदालत में बिना शर्त मांगी माफी

15 अक्टू॰43
राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, मुख्य चुनाव आयुक्त से मांगा गया जवाबNATIONAL

राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, मुख्य चुनाव आयुक्त से मांगा गया जवाब

15 अक्टू॰37
दिल्ली में इंटरनेट बैन मामला: सुप्रीम कोर्ट में गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफीNATIONAL

दिल्ली में इंटरनेट बैन मामला: सुप्रीम कोर्ट में गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

15 अक्टू॰30
संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बड़ी तैयारी: क्या केंद्र सरकार बुलाने जा रही है विशेष सत्र?NATIONAL

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बड़ी तैयारी: क्या केंद्र सरकार बुलाने जा रही है विशेष सत्र?

16 अक्टू॰34
अंकिता भंडारी मर्डर केस: पिता वीरेंद्र भंडारी ने रखीं पांच मांगें, राहुल गांधी ने कहा- न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगीNATIONAL

अंकिता भंडारी मर्डर केस: पिता वीरेंद्र भंडारी ने रखीं पांच मांगें, राहुल गांधी ने कहा- न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी

15 अक्टू॰26
राहुल गांधी और शृंगेरी मठ के सीअर को लेकर वायरल हुआ फर्जी दावा, बूम की जांच में सच आया सामनेPOLITICS

राहुल गांधी और शृंगेरी मठ के सीअर को लेकर वायरल हुआ फर्जी दावा, बूम की जांच में सच आया सामने

15 अक्टू॰40
विज्ञापन • ADVERTISEMENT