रिश्तों की बदलती परिभाषा पर खुलकर बोलीं किरण राव
बॉलीवुड की जानी-मानी फिल्ममेकर और निर्देशक किरण राव इन दिनों अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपने बेबाक बयानों के चलते भी खासी चर्चा में बनी हुई हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने आज के दौर की युवा पीढ़ी और उनके रोमांटिक रिश्तों को लेकर काफी दिलचस्प बातें साझा कीं। किरण राव का मानना है कि आज का युवा वर्ग पिछली पीढ़ियों के मुकाबले काफी अलग सोच रखता है और उनके जीवन जीने के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज की जनरेशन पुराने जमाने के सामाजिक दबावों और रूढ़िवादी सोच से बाहर निकल चुकी है और अपने फैसले खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है।
डायरेक्टर ने समाज में आ रहे इन बदलावों को बहुत करीब से महसूस किया है और अपनी फिल्मों की कहानियों में भी वे अक्सर इसी आधुनिक जीवनशैली की झलक पेश करती हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि उनकी कहानियों में नजर आने वाले युवा अक्सर रिश्तों के मामले में बहुत ज्यादा पारंपरिक नहीं होते, तो उन्होंने इसे नकारात्मक रूप से देखने के बजाय एक सकारात्मक और स्वतंत्र सोच करार दिया। किरण राव का कहना है कि आज के दौर में युवा अपनी भावनाओं को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं और वे समाज की परवाह किए बिना अपने जीवन के अहम फैसले खुद ले रहे हैं।
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'फ्रिवोलस' नहीं, बल्कि 'आज़ाद' है आज की युवा पीढ़ी
बातचीत के दौरान जब किरण राव के सामने यह शब्द रखा गया कि क्या आज की पीढ़ी रिश्तों के मामले में थोड़ी गैर-गंभीर या 'फ्रिवोलस' होती जा रही है, तो उन्होंने इस पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करने के बजाय हमें इसे 'आजादी' के रूप में देखना चाहिए। उनके मुताबिक, आज की पीढ़ी के पास खुद को अभिव्यक्त करने के अनगिनत रास्ते हैं और वे किसी भी तरह के मानसिक या सामाजिक दबाव में जीने को मजबूर नहीं हैं। दुनिया बहुत तेजी से बदल चुकी है और इंसानी सोच के दायरे भी काफी चौड़े हो गए हैं।
फिल्ममेकर ने अपने जमाने और आज के दौर की तुलना करते हुए बताया कि पहले के समय में लोगों से एक तयशुदा ढांचे में जीने की उम्मीद की जाती थी। समाज ने जो नियम तय कर दिए थे, हर किसी को उनका पालन करना अनिवार्य सा लगता था। लेकिन आज की तारीख में स्थितियां बिल्कुल बदल चुकी हैं। युवा वर्ग किसी भी कृत्रिम बंधन में बंधकर अपनी खुशी का सौदा करने को तैयार नहीं है। वे रिश्तों में आने वाली जटिलताओं को समझते हैं और अपनी सहूलियत और आपसी सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं।
शादी से पहले फिजिकल रिलेशन अब कोई बड़ा मुद्दा नहीं
रिश्तों की गहराई और शारीरिक संबंधों पर बात करते हुए किरण राव ने बहुत ही बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में शादी से पहले फिजिकल रिलेशन होना कोई हैरानी या अचरज की बात नहीं रह गई है। समाज की दबी-छिपी सोच से आगे बढ़कर युवा अब इस सच को सामान्य रूप से स्वीकार करने लगे हैं। लोग बिना शादी के भी गहरे, मजबूत और भावनात्मक रूप से संतुष्टि देने वाले रिश्ते बना रहे हैं।
"मुझे लगता है कि अब लोग शादी किए बिना भी गहरे, मजबूत, भावनात्मक और शारीरिक रूप से संतुष्टि देने वाले रिश्ते बनाते हैं। आज की दुनिया ऐसी ही है और हमने अपनी कहानियों में इसी सच को दिखाने की कोशिश की है।" — किरण राव, फिल्ममेकर
उन्होंने आगे समझाया कि पहले के दौर में ऐसा माना जाता था कि किसी भी तरह का शारीरिक या गहरा भावनात्मक रिश्ता सिर्फ शादी के बाद ही संभव है। अरेंज मैरिज या पारंपरिक विवाह के बाद ही लोगों से यह उम्मीद की जाती थी कि वे एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे। लेकिन आज की आधुनिक दुनिया में यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है। आज के युवा पहले एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं, मानसिक रूप से जुड़ते हैं और फिर अपने भविष्य को लेकर कोई फैसला लेते हैं।
फिल्मों में भी नजर आता है आधुनिक सोच का प्रभाव
किरण राव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सिनेमा हमेशा से समाज का आईना रहा है। जब समाज बदलता है, तो कहानियों और किरदारों में भी वह बदलाव साफ तौर पर दिखाई देना चाहिए। उनकी हालिया चर्चित फिल्मों में भी इसी आधुनिकता और स्वतंत्रता की झलक देखने को मिलती है। दो युवा जो किसी पारंपरिक बंधन में नहीं बंधे हैं, वे एक-दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं और फिर उनके जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव दर्शकों को एक नया दृष्टिकोण देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के रिश्तों को पर्दे पर दिखाना और उन पर खुलकर बात करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह आज के समाज की जमीनी हकीकत है। आंखें मूंद लेने से बदलाव रुक नहीं जाते, इसलिए जरूरी है कि हम इन विषयों पर सहजता से बात करें। किरण राव का यह बयान सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं।







