उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग का पेच
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। सत्ता और विपक्ष की रणनीतियों के बीच अब 'इंडिया' गठबंधन के भीतर ही सीट शेयरिंग को लेकर खुलकर बयानबाजी सामने आने लगी है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चल रहा यह विवाद अब सार्वजनिक मंचों पर भी दिखने लगा है। दोनों दलों के नेताओं के बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी चुनावों से पहले सीट के आंकड़ों पर एक सहमति बनाना आसान नहीं होगा। गठबंधन के भीतर चल रही यह खींचतान राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।
इसी कड़ी में प्रतापगढ़ से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने एक बेहद तीखा और बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान ने कांग्रेस और सपा के बीच चल रही अंदरूनी कलार को और अधिक हवा दे दी है। सपा सांसद ने सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी की सांगठनिक स्थिति और उसके चुनावी जनाधार पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों दल उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद में जुटे हैं।
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सपा सांसद का तंज: कांग्रेस को 50 से ज्यादा सीटें देना हार की गारंटी
सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने खुलकर अपनी राय रखते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक सीटें देना किसी भी सूरत में न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पिछले चुनावी प्रदर्शन यानी 2022 और 2024 के स्ट्राइक रेट का आकलन किया जाए, तो उनकी हिस्सेदारी केवल 30 से 35 सीटों की ही बनती है। इसके बावजूद यदि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी दरियादिली दिखाते हैं, तब भी कांग्रेस को पचास सीटों से अधिक नहीं दी जानी चाहिए।
सांसद पटेल ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास ना तो मजबूत उम्मीदवार हैं और ना ही कोई ठोस जनाधार बचा है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत को दरकिनार करके बड़े दावे करना गठबंधन धर्म के अनुकूल नहीं है। सपा नेताओं का यह रुख साफ करता है कि वे राज्य में खुद को बड़े भाई की भूमिका में रखना चाहते हैं और कांग्रेस को उसकी पिछली सफलताओं के दायरे में ही रखना चाहते हैं।
अमेठी और रायबरेली के सियासी किस्से पर नया संग्राम
सपा सांसद ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए साल 2024 के लोकसभा चुनावों के कई अनसुने पहलुओं पर रोशनी डाली। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी अमेठी सीट से चुनाव लड़ने से कतरा रहे थे और वहां से हट गए थे। इतना ही नहीं, सांसद पटेल के अनुसार राहुल गांधी इतने दबाव में थे कि वे अपनी पारंपरिक पारिवारिक सीट रायबरेली से भी चुनाव लड़ने के बिल्कुल मूड में नहीं थे और दक्षिण भारत से ही चुनाव लड़ने का मन बना चुके थे।
अपने दावे को पुख्ता करते हुए सपा सांसद ने कहा कि ऐसी स्थिति में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगे बढ़कर राहुल गांधी को समझाया और उन्हें रायबरेली से चुनाव मैदान में उतरने के लिए राजी किया। उन्होंने बताया कि सपा ने पूरी ताकत झोंककर अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया था, जिसके बाद ही राहुल गांधी वहां से जीत हासिल कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस क्षेत्र में पूरी तरह समाजवादी पार्टी और उसके मतदाताओं के भरोसे पर ही आश्रित है।
"राहुल गांधी अमेठी से भाग गए थे और रायबरेली से भी लड़ने के मूड में नहीं थे। अखिलेश यादव ने उन्हें समझाया, तब जाकर वे चुनाव लड़ने को तैयार हुए और सपा ने पूरी ताकत लगाकर उन्हें जिताया।" — शिवपाल सिंह पटेल, सपा सांसद
कांग्रेस की ओर से 150 से 200 सीटों की मांग पर तकरार
एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी कांग्रेस को सीमित सीटें देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी अपने लिए बड़े हिस्से की मांग पर अड़ी हुई है। हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक बयान में कहा था कि पार्टी केवल 150 सीटों पर नहीं, बल्कि कम से कम 200 सीटों की हकदार है। उन्होंने देश के विकास में कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का पुराना इतिहास और उसका जनाधार सीटों के बंटवारे में साफ दिखना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि यदि पार्टी को मजबूत करना है और कार्यकर्ताओं में जोश भरना है, तो उन्हें सम्मानजनक संख्या में सीटें मिलनी चाहिए। इस मांग ने समाजवादी पार्टी के नेताओं को नाराज कर दिया है, क्योंकि वे कांग्रेस के दावों को जमीनी सच्चाइयों से कोसों दूर मानते हैं।
अखिलेश यादव की दो टूक: 'बात सीट की नहीं, जीत की है'
बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए सभी सहयोगियों को संयम बरतने का संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि चुनाव में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि किसे कितनी सीटें मिल रही हैं, बल्कि असली लक्ष्य यह होना चाहिए कि गठबंधन हर हाल में चुनाव जीते। अखिलेश यादव ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने और संविधान तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी दलों को आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होना पड़ेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में यदि 'इंडिया' गठबंधन को भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करना है, तो दोनों प्रमुख दलों को अपनी महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर आपसी तालमेल बिठाना ही होगा। फिलहाल नेताओं के तीखे बयानों से यह साफ है कि सीट शेयरिंग का रास्ता आसान नहीं रहने वाला है।






