ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बने कुश सिंह
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आज भी रोजगार एक बड़ी समस्या बनी हुई है। पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश युवा शहरों की ओर रुख करते हैं, जहां उन्हें छोटी-मोटी नौकरियों से संतोष करना पड़ता है। लेकिन कुछ युवा ऐसे भी होते हैं जो लीक से हटकर सोचते हैं और अपनी मेहनत के दम पर सफलता की नई इबारत लिखते हैं। ऐसे ही युवाओं में एक नाम लखीमपुर खीरी जिले के मझहरिया गांव के रहने वाले कुश सिंह का भी है। कुश ने यह साबित कर दिखाया है कि यदि इरादे मजबूत हों और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो महानगरों में भटकने के बजाय अपने गांव और घर के पास रहकर भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
आज कुश सिंह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, जोखिम उठाने की क्षमता और पक्के इरादे से डेयरी कारोबार को एक नई दिशा दी है। कभी महीने के दस हजार रुपये कमाने वाले कुश आज अपने इस व्यवसाय के जरिए न केवल खुद आर्थिक रूप से बेहद मजबूत हो चुके हैं, बल्कि अपने गांव के कई अन्य युवाओं को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं। उनकी यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा है जो बेरोजगारी से जूझ रहे हैं या फिर कम वेतन वाली नौकरी में फंसे हुए हैं।
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नौकरी को बनाया सीखने की पाठशाला
हर सफल व्यक्ति की तरह कुश सिंह की राह भी इतनी आसान नहीं थी। अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सबसे पहले रोजगार की तलाश शुरू की। इस दौरान उन्हें पलिया की एक स्थानीय डेयरी में नौकरी मिल गई। शुरुआत में उन्हें इस नौकरी के एवज में महज 10,000 रुपये प्रतिमाह का वेतन मिलता था। कई लोग इस तनख्वाह को देखकर नौकरी छोड़ देते या हताश हो जाते, लेकिन कुश ने इस अवसर को एक चुनौती और सीखने के मंच के रूप में लिया।
नौकरी के दौरान कुश ने डेयरी उद्योग से जुड़े हर बारीकी को बहुत ही नजदीक से समझा। उन्होंने दूध संग्रह करने की प्रक्रिया, दूध की गुणवत्ता परखने के तरीकों, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), बाजार की वास्तविक मांग और ग्राहकों की जरूरतों का बारीकी से अध्ययन किया। उनके लिए यह नौकरी सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं थी, बल्कि यह उनके भविष्य के बड़े बिजनेस का ब्लूप्रिंट तैयार करने का एक प्रशिक्षण केंद्र बन चुका था। उन्होंने तभी यह समझ लिया था कि सिर्फ दूध बेचने के बजाय यदि इसके मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर ध्यान दिया जाए, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।
सरकारी योजना से मिली पंख और वित्तीय मजबूती
किसी भी व्यवसाय को शुरू करने के लिए पूंजी यानी पैसों की जरूरत सबसे बड़ी बाधा होती है। कुश सिंह के पास भी सीमित संसाधन थे, लेकिन उनके पास स्पष्ट विजन था। अपने इस सपने को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मुख्यमंत्री युवा रोजगार सृजन कार्यक्रम' का सहारा लिया। इस योजना के तहत उन्होंने लगभग पांच लाख रुपये का ऋण (लोन) प्राप्त किया।
सरकारी मदद मिलते ही उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया। इस आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने डेयरी और दूध प्रसंस्करण से जुड़ी आधुनिक इकाइयां स्थापित करने में किया। उन्होंने दूध का संग्रह करने के साथ-साथ उसके शीतलीकरण (कोल्ड स्टोरेज) और प्रोसेसिंग की पुख्ता व्यवस्था तैयार की। शुरुआत में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय किसानों का भरोसा जीतना और पर्याप्त मात्रा में प्रतिदिन दूध उपलब्ध कराना था, जिसे उन्होंने अपनी ईमानदारी और बेहतर प्रबंधन से पार कर लिया।
आधुनिक मशीनों और प्रसंस्करण से बदली तस्वीर
कुश सिंह ने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए दूध को सीधे बेचने की बजाय उससे बनने वाले उत्पादों पर ज्यादा फोकस किया। आज उनकी यूनिट में प्रतिदिन करीब छह क्विंटल दूध एकत्र किया जाता है। इस दूध से खोया, पनीर, लस्सी और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बुलंदशहर और लखनऊ से आधुनिक मशीनें मंगवाकर उन्होंने अपने काम को और आसान और तेज बना दिया है।
अपने व्यवसाय के विस्तार को लेकर कुश सिंह ने साझा किया कि साधारण दूध बेचने की तुलना में उसके उत्पादों की मांग बाजार में लगातार तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा,
"नौकरी छोड़कर हमने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया, जिससे हमने न सिर्फ अपनी स्थिति सुधारी बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दिया। दूध से बने उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए हमने खोया बनाने की दो बड़ी मशीनें और सात फ्रीजर खरीदे हैं, जिससे काम बहुत आसान हो गया है।" — कुश सिंह, उद्यमी
बाजार में बढ़ी मांग और भविष्य की योजनाएं
कुश द्वारा तैयार किए गए खोए, पनीर और अन्य उत्पादों की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी इनकी जबरदस्त मांग है। विशेषकर खोया बनाने वाली मशीन उनके लिए बेहद कारगर साबित हुई है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से कम समय में और बहुत ही कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला खोया तैयार हो जाता है, जिससे समय की बचत भी होती है और मुनाफा भी अधिक मिलता है।
लखीमपुर खीरी के ग्रामीण अंचल से शुरू हुआ यह सफर आज इस बात का प्रमाण है कि यदि युवा पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर उद्यमिता (Entrepreneurship) की राह चुनें, तो सरकार की योजनाएं उनके सपनों को नई उड़ान दे सकती हैं। कुश सिंह की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए वरदान साबित हुई है, बल्कि पूरे इलाके के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक नया रास्ता दिखा रही है।





