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द लैंसेट की चौंकाने वाली रिपोर्ट: भारत में हर साल लाखों कैंसर मामलों के पीछे संक्रमण, जानिए वजह

प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट की हालिया शोध रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में कैंसर के लाखों मामले विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से जुड़े हुए हैं। इनमें ह्यूमन पैपिलोमावायरस और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी जैसे संक्रामक एजेंट सबसे बड़े जोखिम कारक के रूप में सामने आए हैं।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•30 सितंबर 2026 • अपडेटेड•43
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द लैंसेट की चौंकाने वाली रिपोर्ट: भारत में हर साल लाखों कैंसर मामलों के पीछे संक्रमण, जानिए वजह
📷 द लैंसेट की चौंकाने वाली रिपोर्ट: भारत में हर साल लाखों कैंसर मामलों के पीछे संक्रमण, जानिए वजह — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • वर्ष 2024 के दौरान देश में कैंसर के करीब 15.6 लाख नए मामलों का अनुमान लगाया गया है।
  • कुल मामलों में से लगभग 1.9 लाख कैंसर की घटनाओं का सीधा संबंध विभिन्न संक्रमणों से पाया गया है।
  • ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) और एच. पाइलोरी बैक्टीरिया संक्रमण के प्रमुख वाहक के रूप में चिन्हित किए गए हैं।

कैंसर के बढ़ते मामलों पर द लैंसेट की नई रिपोर्ट

चिकित्सा जगत की दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शुमार 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक नए शोध ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इस ताजा अध्ययन के अनुसार, भारत में कैंसर के मामलों और संक्रामक बीमारियों के बीच एक गहरा और चिंताजनक वैज्ञानिक संबंध सामने आया है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 के दौरान देश में कैंसर के लगभग 15 लाख 62 हजार नए मामले सामने आने का अनुमान था। इस भयानक आंकड़े के साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया कि इसी समयावधि में देश भर में करीब 9 लाख से अधिक लोगों की जान इस घातक बीमारी के कारण जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन कुल आंकड़ों में से लगभग 1.9 लाख मामले ऐसे थे, जिन्हें सीधे तौर पर विभिन्न प्रकार के वायरल, बैक्टीरियल या अन्य संक्रमणों से जोड़ा गया है। हालांकि, इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि शरीर में प्रवेश करने वाला हर सूक्ष्मजीव या संक्रमण स्वतः ही कैंसर का रूप ले लेता है। शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में केवल उन्हीं संक्रमणों को शामिल किया है, जिनका कुछ खास किस्म के ट्यूमर या कैंसर से पुराना और प्रमाणित वैज्ञानिक नाता स्थापित हो चुका है।

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ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) और सर्वाइकल कैंसर का खतरा

लैंसेट की इस व्यापक रिसर्च के मुताबिक, भारत में संक्रमण जनित कैंसर के मामलों में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। देश में केवल एचपीवी से जुड़े कैंसर मामलों की संख्या एक लाख से भी ज्यादा आंकी गई है। इस वायरस का सबसे प्रमुख और खतरनाक संबंध महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से पाया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक शरीर में बने रहने वाला हाई-रिस्क एचपीवी संक्रमण आगे चलकर इस जानलेवा बीमारी का कारण बनता है.

राहत की बात यह है कि इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए आज के समय में चिकित्सा विज्ञान के पास कारगर उपाय मौजूद हैं। एचपीवी संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बाजार में वैक्सीन उपलब्ध है, जिसे समय रहते लगवाने से इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। इसके अलावा, नियमित रूप से सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग करवाना भी बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी की शुरुआत में ही इसके लक्षणों को पकड़कर समय पर उचित इलाज शुरू किया जा सके।

पेट के कैंसर की मुख्य वजह बनता है एच. पाइलोरी बैक्टीरिया

संक्रमण से होने वाले कैंसर की फेरबलिस्ट में दूसरा बड़ा नाम 'हेलिकोबैक्टर पाइलोरी' (H. pylori) बैक्टीरिया का है। इस बैक्टीरिया से जुड़े करीब 47 हजार कैंसर मामलों का अनुमान भारत के संदर्भ में लगाया गया है। यह बेहद सूक्ष्म बैक्टीरिया मुख्य रूप से मानव पेट की अंदरूनी परत को प्रभावित करता है और वहां लगातार सूजन, दर्द तथा अल्सर जैसी समस्याओं को जन्म देता है। यदि समय रहते इस संक्रमण का उचित उपचार न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे पेट के गंभीर कैंसर का रूप धारण कर सकता है।

वैश्विक स्तर पर भी एच. पाइलोरी की स्थिति काफी चिंताजनक रही है। दुनिया भर में इस बैक्टीरिया के कारण वर्ष 2024 में लगभग 7.6 लाख कैंसर के मामले सामने आए, जो कुल वैश्विक कैंसर मामलों का करीब चार प्रतिशत हिस्सा है। इस बारे में विस्तार से बताते हुए मैक्स हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की चेयरमैन डॉ. मीनू वालिया ने स्पष्ट किया है कि यह कोई दुर्लभ बैक्टीरिया नहीं है, बल्कि इसका संक्रमण आम तौर पर लोगों में देखा जाता है।

बैक्टीरिया संक्रमण का मतलब यह नहीं कि कैंसर होगा ही

डॉ. मीनू वालिया के अनुसार, एच. पाइलोरी से संक्रमित होने मात्र से यह नहीं मान लेना चाहिए कि उस व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर हो जाएगा। कई लोगों में इस बैक्टीरिया का संक्रमण बचपन के दिनों में ही हो जाता है और यह बिना किसी खास लक्षण के शरीर में लंबे समय तक शांत बना रह सकता है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्तियों में से केवल कुछ गिने-चुने लोगों में ही यह संक्रमण आगे चलकर गंभीर पेट की बीमारियों या कैंसर की तरफ अग्रसर होता है।

"एच. पाइलोरी से संक्रमित होना अपने आप में कैंसर की गारंटी नहीं है। यह संक्रमण अक्सर बचपन में हो जाता है और वर्षों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में रह सकता है। जिन लोगों में अन्य जोखिम कारक मौजूद होते हैं और यह बैक्टीरिया लंबे समय तक टिक जाता है, उनमें खतरा बढ़ जाता है।" — डॉ. मीनू वालिया, मेडिकल ऑन्कोलॉजी चेयरमैन, मैक्स हॉस्पिटल

बीमारी की प्रक्रिया और रोकथाम के उपाय

चिकित्सकीय विश्लेषण के मुताबिक, जब एच. पाइलोरी बैक्टीरिया पेट में वर्षों तक बना रहता है, तो यह वहां की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल्स का निर्माण करता है। इससे पेट की परत लगातार सूजन से ग्रस्त रहती है, जिसे मेडिकल भाषा में एट्रोपिक गैस्ट्राइटिस कहा जाता है। समय बीतने के साथ यह स्थिति डिस्प्लेसिया में बदल सकती है, जो अंततः पेट के कैंसर का कारण बन सकती है।

इस पूरी शोध रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि स्वच्छता और समय पर संक्रमण की जांच करवाकर कैंसर के एक बड़े हिस्से को रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों का भी यही मानना है कि विशेषकर विकासशील देशों में यदि संक्रमण नियंत्रण और टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूती दी जाए, तो कैंसर के वैश्विक बोझ को उल्लेखनीय रूप से कम किया जा सकता है। आम जनता को भी अपने खान-पान, साफ-सफाई और स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर अब अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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