श्रीनगर और बडगाम के सीमावर्ती जंगलों से आ रही ग्राउंड रिपोर्टिंग बताती है कि आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। पहलगाम हमले के आरोपी और लश्कर-ए-तैयबा के खतरनाक कमांडर हाशिम मूसा के खात्मे के साथ ही खुफिया एजेंसियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हमारी जमीनी पड़ताल और सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मूसा पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों की रडार पर था और लगातार ठिकाने बदल रहा था।
गोली लगने के बाद गहरी छिपाव की रणनीति
सुरक्षा बलों के साथ हुई एक शुरुआती झड़प के दौरान मूसा को गोली लग गई थी। इस गंभीर चोट के बावजूद वह अस्पताल जाने के बजाय घने जंगलों में जा छिपा। आतंकवादियों के बीच आमतौर पर यह रणनीति अपनाई जाती है कि वे पकड़े जाने के डर से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों या मेडिकल स्टोर्स से दूर रहते हैं। मूसा ने भी यही रास्ता चुना और किसी पेशेवर डॉक्टर की मदद लेने के जोखिम से बचने के लिए जंगल में ही अपनी चिकित्सा का इंतजाम किया।
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घाव भरने के लिए शहद और जड़ी-बूटियों का सहारा
खुफिया दस्तावेजों और हमारे फील्ड स्रोतों से यह बात सामने आई है कि हाशिम मूसा अपने घाव को संक्रमण से बचाने और उसे तेजी से भरने के लिए प्राकृतिक शहद का इस्तेमाल कर रहा था। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में शहद के एंटी-बैक्टीरियल गुणों को घाव ठीक करने में मददगार माना जाता है। मूसा ने जंगल में उपलब्ध कुछ खास जड़ी-बूटियों और शहद के मिश्रण से अपने जख्मों की मरहम-पट्टी खुद ही करनी शुरू कर दी थी ताकि दर्द कम हो सके और खून का बहाव रुके।
पहलगाम हमले से जुड़े थे तार
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मारा गया आतंकी मूसा केवल एक सामान्य कमांडर नहीं था, बल्कि वह घाटी में कई बड़े हमलों, विशेष रूप से पहलगाम क्षेत्र में हुई हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता था। सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान उसके ठिकाने से कुछ ऐसे दस्तावेज और मेडिकल सामग्री बरामद हुई है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि वह गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद लंबे समय तक जंगल में अकेले ही संघर्ष कर रहा था।
ऑपरेशन बडगाम और सुरक्षा बलों की सतर्कता
बडगाम इलाके में चलाए गए इस विशेष आतंकवाद विरोधी अभियान में भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त दलों ने हिस्सा लिया। खुफिया इनपुट के आधार पर जब जंगल की घेराबंदी की गई, तो मूसा ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसके शरीर की कमजोरी और पहले से लगे जख्मों ने उसकी रफ्तार धीमी कर दी थी। आखिरकार, मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया। इस कार्रवाई को घाटी में लश्कर के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।







