नई दिल्ली/मुंबई: त्योहारी सीजन की आहट के बीच देश के आम आदमी और छोटे कारोबारियों की जेब पर महंगाई का एक और भारी बोझ पड़ गया है। अक्टूबर की पहली तारीख से ही एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर के दामों में इजाफा कर दिया गया है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम ने जब दिल्ली से लेकर मुंबई, पटना और अन्य महानगरों के बाजारों का जायजा लिया, तो यह साफ हुआ कि इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर पड़ना तय है, जो फेस्टिव सीजन में अपनी आय की उम्मीद लगाए बैठे थे।
कमर्शियल सिलेंडर पर सीधे प्रहार
तेल विपणन कंपनियों ने 1 अक्टूबर से कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। चूंकि यह समय नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों का है, ऐसे में मिठाइयों, खान-पान और कैटरिंग का काम बड़े पैमाने पर बढ़ जाता है। ऐसे में गैस के दामों का बढ़ना सीधे तौर पर तैयार उत्पादों की लागत को महंगा कर देगा। दिल्ली से लेकर पटना और लखनऊ तक के बाजारों में कमर्शियल उपभोक्ताओं ने इस पर अपनी गहरी नाराजगी और चिंता जाहिर की है।
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त्योहारी सीजन में बढ़ेगी थाली की लागत
बाजार के जानकारों और स्थानीय दुकानदारों से बातचीत में यह बात सामने आई है कि कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़ने से होटल और रेस्टोरेंट का संचालन महंगा हो जाता है। इसका असर अंततः त्योहारी सीजन में ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। त्योहारों के इस दौर में जब लोग परिवार के साथ बाहर खाने या मिठाइयां खरीदने निकलते हैं, तो उन्हें बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, शुरुआती राहत के तौर पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं, लेकिन कमर्शियल बढ़ोतरी का परोक्ष असर आम आदमी की रसोई के बजट पर भी पड़ता है।
प्रमुख महानगरों में बदले हुए रेट्स
- दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वाणिज्यिक (कमर्शियल) एलपीजी सिलेंडर के नए रेट लागू होने के बाद व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना होगा।
- मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई में भी गैस एजेंसियों द्वारा नए और बढ़े हुए दाम अपडेट कर दिए गए हैं।
- पटना और अन्य शहर: बिहार की राजधानी पटना सहित देश के अन्य हिस्सों में भी अक्टूबर के पहले दिन से बढ़े हुए दामों ने कारोबारियों का गणित बिगाड़ दिया है।
आम जनता और कारोबारियों का रिएक्शन
"त्योहारों के समय हर कोई थोड़ी राहत की उम्मीद करता है, लेकिन महीने के पहले दिन ही गैस के दाम बढ़ा दिए जाना हमारे जैसे छोटे होटल और कैटरिंग कारोबारियों के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अब मुनाफा कमाने के बजाय लागत निकालना ही मुश्किल हो जाएगा।" - स्थानीय ढाबा संचालक, नई दिल्ली
हमारी मैदानी पड़ताल बताती है कि सरकार और तेल कंपनियों के इस कदम से भले ही सरकारी खजाने या कंपनियों के घाटे को पाटने में मदद मिलती हो, लेकिन जमीन पर आम जनता और मध्यम वर्गीय कारोबारियों के लिए यह त्योहारी सीजन की खुशियों फीकी करने जैसा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार घरेलू सिलिंडर की तरह कमर्शियल कीमतों पर भी कोई नियंत्रण या राहत के उपाय सोचती है या नहीं।







