रसोई गैस सब्सिडी के नियमों में फेरबदल
देशभर के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर सामने आई है। यदि आप भी एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ उठाते हैं, तो अब आपको एक खास नियम का पालन करना होगा। केंद्र सरकार की ओर से एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और सब्सिडी वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब रेगुलर रिटेल सेलिंग प्राइस पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा उठाने के लिए उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन यानी BAA की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सरकारी सहायता का पैसा केवल वास्तविक और पात्र परिवारों तक ही पहुंचे। यदि कोई उपभोक्ता इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली रसोई गैस सब्सिडी रोक दी जाएगी। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा, बल्कि सब्सिडी राशि बंद होने के बाद ग्राहकों को पूरी कीमत यानी मार्केट रेट पर ही सिलेंडर खरीदना पड़ेगा।
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस व्यवस्था के जरिए घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडरों के कमर्शियल या इंडस्ट्रियल इस्तेमाल पर लगाम लगाना है। कई बार ऐसा देखने में आता है कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों का डायवर्जन व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए कर दिया जाता है। इस नई व्यवस्था से ऐसे तमाम फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र कनेक्शनों की पहचान करने में भी काफी मदद मिलेगी, जिससे सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोका जा सके।
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कैसे पूरा करें बायोमेट्रिक आधार सत्यापन
आम नागरिकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखते हुए सरकार और तेल विपणन कंपनियों ने बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया बेहद आसान बना दी है। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी भी लंबी कतार में खड़े होने या बार-बार गैस एजेंसी के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। सबसे आसान तरीका यह है कि जब भी आपके घर एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी करने डिलीवरी मैन पहुंचे, आप उसी वक्त उससे बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करवा सकते हैं। डिलीवरी एजेंटों के पास इसके लिए डिजिटल डिवाइस और जरूरी तकनीकी इंतजाम मौजूद रहते हैं।
इसके अलावा, यदि कोई उपभोक्ता डिलीवरी के समय यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता है, तो वह सीधे अपने संबंधित गैस वितरक यानी एजेंसी के कार्यालय जा सकता है। वहां जाकर काउंटर पर बायोमेट्रिक मशीन के जरिए अपना आधार ऑथेंटिकेशन आसानी से पूरा कराया जा सकता है। यह सेवा पूरी तरह निशुल्क है और इसमें महज कुछ ही मिनटों का समय लगता है। देश के करोड़ों उपभोक्ता पहले ही इस प्रक्रिया को सफलतापवूवर्क पूरा कर चुके हैं और जो लोग बाकी रह गए हैं, वे समय रहते इसे पूरा कर लें ताकि उनकी सब्सिडी में कोई रुकावट न आए।
इस पूरी व्यवस्था के संबंध में पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि देश में बड़ी संख्या में लोगों ने इस नियम का पालन कर लिया है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कुल सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं में से एक बहुत बड़ा हिस्सा पहले ही इस सुरक्षा चक्र को अपना चुका है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि अधिकांश जनता डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन कर रही है।
घर बैठे मोबाइल ऐप से भी कर सकते हैं काम
यदि आप गैस एजेंसी के दफ्तर जाने से बचना चाहते हैं या आपके पास समय का अभाव है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने अपने आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए घर बैठे ही यह सुविधा उपलब्ध करा दी है। आप अपने स्मार्टफोन की मदद से घर बैठे कुछ ही क्लिक में बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। इसके लिए कंपनियों ने अलग-अलग डेडिकेटेड ऐप्स लॉन्च किए हैं जो गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर आसानी से मिल जाते हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि आपका कनेक्शन इंडियन ऑयल यानी इंडेन का है, तो आप 'IndianOil ONE' ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। वहीं, भारत गैस के उपभोक्ताओं के लिए 'HelloBPCL' ऐप और एचपी गैस के ग्राहकों के लिए 'HP PAY' ऐप के जरिए यह सुविधा दी गई है। इन ऐप्स में लॉगिन करने के बाद आपको डिजिटल केवाईसी या आधार ऑथेंटिकेशन का विकल्प मिल जाएगा, जिसके निर्देशानुसार आप अपनी उंगलियों के निशान या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकते हैं।
"सरकार का यह कदम रसोई गैस वितरण व्यवस्था में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हर एक रुपये की सब्सिडी सीधे जरूरतमंदों के बैंक खातों तक पहुंचे। अपात्र लोगों द्वारा सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह तकनीकी बदलाव बेहद जरूरी था।"— ऊर्जा विशेषज्ञ एवं विश्लेषक
किन लोगों को नहीं है दोबारा प्रक्रिया दोहराने की जरूरत
कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या यह नियम उन लोगों पर भी लागू होता है जिन्होंने पहले ही अपना आधार सीडिंग या ई-केवाईसी का काम पूरा करवा लिया है। इस पर स्पष्ट किया गया है कि जिन उपभोक्ताओं ने हाल के महीनों में या पहले ही किसी अभियान के तहत अपना बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा कर लिया है, उन्हें दोबारा इस प्रक्रिया से गुजरने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनका डेटा सिस्टम में पहले से ही अपडेटेड है और उन्हें निरंतर सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा।
हालांकि, जिन लोगों ने अभी तक अपने गैस कनेक्शन के साथ आधार को बायोमेट्रिक रूप से लिंक नहीं कराया है, उन्हें बिना किसी देरी के यह काम पूरा कर लेना चाहिए। समय रहते सत्यापन पूरा न होने की स्थिति में त्योहारी सीजन के दौरान आपके घरेलू बजट पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। बाजार मूल्य पर सिलेंडर खरीदने से बचने का यही एकमात्र उपाय है कि आप तय समय सीमा के भीतर इस अनिवार्य औपचारिकता को पूरा कर लें।
यह अभियान पिछले काफी समय से चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है और सरकार ने इसके लिए पर्याप्त समय भी दिया है। अब जबकि यह नियम पूरी तरह से सख्ती से लागू होने जा रहा है, सभी घरेलू गैस उपभोक्ताओं का यह कर्तव्य बनता है कि वे अपने नजदीकी माध्यम से या मोबाइल ऐप की मदद से इस प्रक्रिया को तुरंत पूरा कर लें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।




