ओपनएआई के सह-संस्थापक ने बनाई फोर्ब्स की सूची में जगह
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की दुनिया में जब भी किसी बड़े नाम की चर्चा होती है, तो सबसे पहले ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन का नाम जुबान पर आता है। दुनिया भर में यह माना जाता है कि चैटजीपीटी जैसी क्रांतिकारी तकनीक लाने वाले सैम ऑल्टमैन ही इस सफलता के सबसे बड़े चेहरे और वित्तीय रूप से सबसे आगे रहने वाले शख्स हैं। लेकिन हाल ही में सामने आए फोर्ब्स के आंकड़ों ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। ओपनएआई के सह-संस्थापक (Co-founder) ग्रेग ब्रॉकमैन ने फोर्ब्स 400 की प्रतिष्ठित सूची में पहली बार अपनी जगह बनाई है और उनकी संपत्ति ने सबको चौंका दिया है।
फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेग ब्रॉकमैन की अनुमानित नेटवर्थ (Net Worth) 25.5 अरब डॉलर यानी लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी रकम ने उन्हें इस साल फोर्ब्स 400 में शामिल होने वाला सबसे अमीर नया सदस्य बना दिया है। मौजूदा समय में वह अमेरिका के 45वें सबसे अमीर व्यक्ति बन चुके हैं। उनकी यह बेहिसाब दौलत मुख्य रूप से ओपनएआई में उनकी शुरुआती और भारी हिस्सेदारी की वजह से आई है। अदालती दस्तावेजों में दिए गए बयानों के मुताबिक, कंपनी में उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू 20 अरब डॉलर से लेकर 30 अरब डॉलर के बीच हो सकती है।
एआई तकनीक की बढ़ती मांग और वैश्विक बाजार में ओपनएआई के बढ़ते दबदबे ने इसके शुरुआती संस्थापकों की किस्मत रातों-रात बदल दी है। ग्रेग ब्रॉकमैन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि तकनीकी दुनिया में सही समय पर लिया गया जोखिम और दूरगामी सोच किस तरह से इतिहास बदल सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर ग्रेग ब्रॉकमैन के पास इतनी दौलत कैसे आई और वह अपने ही संस्थान के सीईओ सैम ऑल्टमैन से इतने आगे कैसे निकल गए।
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सैम ऑल्टमैन से क्यों पीछे हैं ओपनएआई के सीईओ?
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ओपनएआई का चेहरा माने जाने वाले सैम ऑल्टमैन के पास ग्रेग ब्रॉकमैन जितनी संपत्ति नहीं है। फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार, सैम ऑल्टमैन की कुल अनुमानित नेटवर्थ करीब 3.3 अरब डॉलर है। इसके मुकाबले ग्रेग ब्रॉकमैन की संपत्ति कई गुना ज्यादा है। सवाल यह उठता है कि जिस कंपनी को दुनिया भर में खड़ा करने में सैम ऑल्टमैन की सबसे बड़ी भूमिका रही, उसके मुखिया के पास इतनी कम दौलत क्यों है?
इस अंतर के पीछे एक बड़ा तकनीकी और कानूनी कारण है। सैम ऑल्टमैन के पास ओपनएआई में कोई सीधी इक्विटी (Direct Equity) यानी मालिकाना शेयर नहीं है। जब ओपनएआई की शुरुआत एक नॉन-प्रॉफिट रिसर्च लैब के रूप में हुई थी, तब सैम ऑल्टमैन ने इसमें भारी वित्तीय हिस्सेदारी के बजाय इसकी मिशन-ड्रिवन सोच पर फोकस किया था। हालांकि उनके पास अन्य वेंचर्स और स्टार्टअप्स में निवेश के जरिए संपत्ति है, लेकिन ओपनएआई के मूल्यांकन का सीधा फायदा उनके व्यक्तिगत बैंक बैलेंस में शेयर के रूप में नहीं जुड़ता है।
दूसरी ओर, ग्रेग ब्रॉकमैन ने कंपनी के शुरुआती दिनों से ही इसके तकनीकी ढांचे और सिस्टम को मजबूत करने में अपना सब कुछ झोंक दिया था। कंपनी के पास जैसे-जैसे दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों से फंडिंग आई और इसका वैल्यूएशन आसमान छूने लगा, ब्रॉकमैन के पास मौजूद हिस्सेदारी की कीमत भी अरबों डॉलर में बदल गई। आज हालत यह है कि तकनीकी कर्मचारी और को-फाउंडर होने के नाते ब्रॉकमैन संपत्ति के मामले में कई स्थापित उद्योगपतियों को टक्कर दे रहे हैं।
"एआई का भविष्य सिर्फ कोड और एल्गोरिदम पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के समर्पण पर टिका है जिन्होंने इसके शुरुआती दौर में बिना किसी गारंटी के इसमें अपनी पूरी जिंदगी झोंक दी थी।" — तकनीकी विश्लेषक
हार्वर्ड और एमआईटी छोड़ने से लेकर स्ट्राइप तक का सफर
ग्रेग ब्रॉकमैन की सफलता की कहानी रातों-रात नहीं लिखी गई है। इसके पीछे उनका संघर्ष, तकनीकी के प्रति जुनून और लीक से हटकर फैसले लेने की क्षमता शामिल है। ब्रॉकमैन ने अपनी उच्च शिक्षा के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। लेकिन उनका मन पारंपरिक कक्षाओं और किताबी पढ़ाई में नहीं लगा। उन्होंने महज एक साल के भीतर ही हार्वर्ड छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का रुख किया, जो तकनीक और इंजीनियरिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
लेकिन एमआईटी का सफर भी ज्यादा लंबा नहीं चला और उन्होंने वहां से भी डिग्री पूरी किए बिना ही कॉलेज छोड़ दिया। पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद उन्होंने टेक इंडस्ट्री में कदम रखा। वह मशहूर फिनटेक कंपनी 'स्ट्राइप' (Stripe) से जुड़े और कंपनी के शुरुआती चुनिंदा कर्मचारियों में अपनी जगह बनाई। स्ट्राइप के शुरुआती दौर में काम करने के दौरान उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और तकनीकी सिस्टम को गहराई से समझा, जिसने आगे चलकर उन्हें एआई की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल करने में मदद की।
स्ट्राइप में कुछ साल बिताने के बाद, साल 2015 में ब्रॉकमैन ने वह फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। उन्होंने स्ट्राइप की नौकरी छोड़कर एलन मस्क, सैम ऑल्टमैन और अन्य दिग्गजों के साथ मिलकर ओपनएआई की नींव रखी। शुरुआती दिनों में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर संशय में थी, तब ब्रॉकमैन ने कंपनी के तकनीकी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को खड़ा करने में दिन-रात एक कर दिए थे।
चैटजीपीटी के आने से कैसे बदली दुनिया और ब्रॉकमैन की किस्मत?
साल 2022 के आखिर में जब ओपनएआई ने चैटजीपीटी (ChatGPT) को आम जनता के लिए लॉन्च किया, तो पूरी दुनिया की तकनीकी तस्वीर ही बदल गई। रातों-रात एआई हर आम और खास इंसान की चर्चा का विषय बन गया। इस एक उत्पाद ने ओपनएआई को दुनिया की सबसे मूल्यवान प्राइवेट कंपनियों में ला खड़ा किया। आज आलम यह है कि ओपनएआई का कुल वैल्यूएशन बढ़कर करीब 852 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
कंपनी के इस जादुई विस्तार का सीधा असर इसके शुरुआती संस्थापकों की नेटवर्थ पर पड़ा। चूंकि ग्रेग ब्रॉकमैन कंपनी के शुरुआती दिनों से ही इसके साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं, इसलिए कंपनी के वैल्यूएशन में आई इस ऐतिहासिक तेजी ने उनकी हिस्सेदारी के दाम कई गुना बढ़ा दिए। फोर्ब्स की सूची में उनकी यह शानदार एंट्री इस बात का सबूत है कि कैसे तकनीक और सही विजन मिलकर किसी आम इंसान को दुनिया के सबसे अमीर लोगों की कतार में लाकर खड़ा कर सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ग्रेग ब्रॉकमैन ने अपने शुरुआती दिनों में अपनी एक पर्सनल डायरी में यह तक लिखकर रखा था कि वह भविष्य में एक अरब डॉलर कैसे कमाएंगे। उस समय यह बात एक दिवास्वप्न जैसी लग सकती थी, लेकिन आज उनकी संपत्ति ने उस सपने को बहुत पीछे छोड़ दिया है। उनकी यह सफलता इस बात को साबित करती है कि अगर आपके पास किसी क्षेत्र में दूरदृष्टि है और आप सही दिशा में कड़ी मेहनत करते हैं, तो असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।






