नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी से लेकर छोटे कस्बों तक रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से परेशान आम जनता के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर दो सौ रुपये की सब्सिडी फिर से बहाल कर दी है। पिछले कुछ महीनों से आसमान छूती महंगाई के बीच रसोई चलाना आम आदमी के लिए बेहद मुश्किल हो गया था। इस नए फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं के बैंक खातों में सीधी सब्सिडी आनी शुरू हो जाएगी। 'द फ्रीलान्स' के पत्रकारों ने इस मुद्दे पर आम लोगों से बातचीत की और जमीनी हालात का जायजा लिया।
इस पूरी योजना पर अमल करने से सरकारी खजाने पर हर साल करीब दस हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम बोझ पड़ने वाला है। वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि वैश्विक बाजार में गैस के दाम भले ही ऊपर-नीचे हो रहे हों, लेकिन सरकार का मकसद आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहे दबाव को कम करना है। कोरोना काल के बाद से ही सब्सिडी के नियमों और दायरों में लगातार बदलाव किए जा रहे थे। अब इस नए आदेश के बाद देश के करोड़ों परिवारों को सीधा वित्तीय लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।
रसोई गैस के दामों में राहत से कितना बचेगा पैसा?
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत लंबे समय से एक हजार रुपये के पार बनी हुई थी। ऐसे में हर महीने या दो महीने पर सिलेंडर खरीदने वाले मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया था। दो सौ रुपये की सब्सिडी मिलने से अब हर सिलेंडर पर सीधा फायदा मिलेगा। गृहिणियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में यह छोटी दिखने वाली राहत भी महीने के बजट को संभालने में बहुत बड़ा सहारा साबित होगी। गैस एजेंसियों पर भी इस बात की चर्चा है कि बुकिंग के मामलों में अब तेजी आ सकती है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की प्रणाली को पूरी तरह दुरुस्त रखना सबसे बड़ी चुनौती है। कई ग्रामीण इलाकों से अभी भी ऐसी शिकायतें आती हैं कि सब्सिडी समय पर बैंक खातों में जमा नहीं होती है। तेल कंपनियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर पात्र उपभोक्ता तक इसका लाभ बिना किसी रुकावट के पहुंचे। आधार कार्ड और बैंक खातों का मिलान करने का काम तेजी से चल रहा है ताकि कोई भी असली हकदार इस योजना से वंचित न रह जाए।
क्या साल भर जारी रहेगी यह सब्सिडी व्यवस्था?
राजनीतिक गलियारों और आर्थिक जानकारों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या यह राहत केवल कुछ महीनों के लिए है या लंबे समय तक चलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए दस हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आगामी त्योहारों और चुनावों के माहौल को देखते हुए इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है। आम लोग भी यह जानना चाहते हैं कि क्या आने वाले दिनों में सब्सिडी की इस राशि को और बढ़ाया जा सकता है या यह इतनी ही बनी रहेगी।
जमीनी स्तर पर हमारे संवाददाताओं ने पाया कि एलपीजी वितरकों के यहां उपभोक्ताओं की भीड़ अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। लोग यह पुष्टि करने पहुंच रहे हैं कि उनके खाते में पैसे कब तक आएंगे। महंगाई के इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार का यह कदम भले ही राजकोष पर भारी पड़े, लेकिन सामाजिक सुरक्षा और जनहित के लिहाज से इसे एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरी प्रक्रिया पर आगे भी अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आपको हर अपडेट से अवगत कराता रहेगा।
वित्तीय बोझ और आगे की क्या है तैयारी?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार को इस भारी भरकम खर्चे को उठाने के लिए दूसरे क्षेत्रों में संतुलन बनाना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें जिस तरह से उतार-चढ़ाव दिखा रही हैं, उसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। ऐसे में सब्सिडी का यह मॉडल भविष्य में कितना टिकाऊ साबित होगा, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल आम नागरिक अपनी रसोई के बिगड़े बजट को सुधारने में जुट गए हैं और सरकार के इस फैसले से उन्हें कुछ हद तक मानसिक और आर्थिक सुकून जरूर मिला है।





