लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हंगामे के बाद भारी तोड़फोड़ और लूटपाट
पंजाब के जालंधर-फगवाड़ा हाईवे पर स्थित प्रतिष्ठित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शन और हंगामे के मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने यूनिवर्सिटी के भीतर स्थित व्यावसायिक परिसरों और शोरूम्स को अपना निशाना बनाया। रात के समय चले इस बवाल में न केवल संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि दुकानों से कीमती सामान और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स चोरी होने की भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और छात्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच कुछ असामाजिक तत्व भी घुस आए थे जिन्होंने इस पूरी हिंसा का फायदा उठाया। कैंपस के भीतर बने मॉल्स और बाजारों में स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि सुरक्षाकर्मी भी मूकदर्शक बने रहने को मजबूर हो गए। इस दौरान न केवल दुकानों के शीशे तोड़े गए बल्कि अंदर रखा महंगा सामान भी तितर-बितर कर दिया गया। स्थानीय दुकानदारों और ब्रांड आउटलेट्स के प्रबंधकों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस विभाग अब इस पूरी घटना की तह तक जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। शुरुआती दौर में केवल प्रदर्शन की बात सामने आ रही थी, लेकिन अब दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की वारदातों ने पूरे मामले को एक गंभीर आपराधिक दिशा दे दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा में कहां चूक हुई और किन लोगों ने इस सुनियोजित उपद्रव को अंजाम दिया, इसकी गहनता से पड़ताल की जा रही है।
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हाथों में तलवारें और नियंत्रण से बाहर हुई सुरक्षा व्यवस्था
कैंपस के भीतर रात के समय बने हालात बेहद डरावने थे। कई छात्रों ने मीडिया और पुलिस को दी गई जानकारियों में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ संदिग्ध लोग खुलेआम हाथों में तलवारें और अन्य नुकीले हथियार लेकर घूम रहे थे। इस तरह के खतरनाक हथियारों की मौजूदगी ने सामान्य छात्रों के मन में खौफ पैदा कर दिया। कैंपस की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था इस भीड़ के सामने पूरी तरह असहाय नजर आई, जिसके कारण उपद्रवियों को मनमानी करने का खुला मौका मिल गया।
हालात इतने बिगड़ चुके थे कि यूनिवर्सिटी के बड़े हिस्से में पुलिस बल को तैनात करना पड़ा ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सके। जिन शोरूम्स को खासतौर पर निशाना बनाया गया उनमें डेल, लेनेवो और ट्रेसर जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के आउटलेट्स शामिल हैं। इसके अलावा कुछ कपड़े की दुकानों और खान-पान के आउटलेट्स को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया। दुकानों के अंदर बिखरा सामान और टूटे हुए कांच इस बात की गवाही दे रहे थे कि उपद्रवियों ने किस हद तक तबाही मचाई थी।
छात्रों और स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के हिंसक प्रदर्शन शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा पर एक बड़ा धब्बा हैं। ज्ञान और विज्ञान के मंदिर कहे जाने वाले परिसरों में इस तरह की हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। पुलिस अब उन सभी चेहरों की पहचान करने में जुटी है जो इस पूरी हिंसा के दौरान हथियारों के साथ नजर आए थे और जिन्होंने तोड़फोड़ की इस घटना को बढ़ावा दिया था।
तीन छात्राओं के दो वायरल वीडियो ने बढ़ाई पहेली
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर तीन छात्राओं से जुड़े दो वीडियो ने एक नई पहेली खड़ी कर दी है। इन दोनों वीडियो के सामने आने के बाद से ही मामले को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पहला वीडियो यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार की तरफ से साझा किया गया था, जिसमें वे तीनों छात्राएं यह कहती हुई दिखाई दे रही हैं कि उनके साथ किसी प्रकार की कोई अनहोनी या गलत घटना नहीं हुई है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
लेकिन इसके तुरंत बाद एक दूसरा वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल होने लगा। इस दूसरे वीडियो में वही तीनों छात्राएं बिल्कुल अलग बयान देती नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी मर्जी से पहला वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया था और उनका इस्तेमाल किया गया है। इस नाटकीय घटनाक्रम ने इंटरनेट पर खलबली मचा दी है और लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि आखिर सच क्या है और इन छात्राओं पर किस तरह का दबाव था।
"हम इस पूरे मामले की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इन वीडियो को कब, किन परिस्थितियों में और किसके द्वारा रिकॉर्ड किया गया तथा किसने इन्हें सबसे पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जालंधर ग्रामीण
सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के सहारे पुलिस की जांच
पुलिस प्रशासन अब सोशल मीडिया पर तैर रहे इन दोनों वीडियो के तकनीकी विश्लेषण में जुट गया है। साइबर सेल की मदद से यह खंगाला जा रहा है कि इन वीडियो को अपलोड करने के पीछे किन लोगों का हाथ था। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला जा रहा है ताकि उन चेहरों की पहचान की जा सके जिन्होंने दुकानों में तोड़फोड़ की थी और सामान चुराया था।
यूनिवर्सिटी के भीतर शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती अभी भी जारी है। प्रशासन ने छात्रों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पुलिस जांच में सहयोग करें। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वीडियो के जरिए गुमराह करने वालों और तोड़फोड़ में शामिल उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही पूरे मामले से पर्दा उठा दिया जाएगा।






