देश के शेयर बाजार में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाले दिनों में बड़ी राहत मिल सकती है। वित्त मंत्री की ओर से मिले कुछ खास संकेतों के बाद बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या शेयरों पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी एलटीसीजी और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी को कम या खत्म किया जा सकता है। इन संकेतों के सामने आते ही शेयर बाजार में निवेशकों का उत्साह साफ तौर पर देखने को मिला और सूचकांकों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। आम निवेशकों और बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर सरकार इस पर कोई सकारात्मक फैसला लेती है, तो इससे शेयर बाजार में पैसा लगाना और आसान हो जाएगा।
इस पूरे मामले पर देश के सबसे बड़े बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शोध विभाग ने भी एक महत्वपूर्ण सुझाव पेश किया है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों ने साफ तौर पर मांग की है कि इक्विटी पर लगने वाले इस कर को हटाया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस तरह के करों की वजह से देश से बाहर जाने वाली पूंजी पर रोक लगेगी और घरेलू निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार की तरफ और तेजी से बढ़ेगा। जानकारों का कहना है कि जब बाजार में टैक्स का बोझ कम होता है, तो बड़े और छोटे दोनों तरह के निवेशक खुलकर पैसा लगाते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट और अर्थशास्त्रियों की बड़ी मांग
एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में यह तर्क दिया है कि मौजूदा समय में निवेशकों पर कई तरह के करों का बोझ है। जब कोई निवेशक लंबे समय के लिए शेयर बाजार में निवेश करता है और उसे मुनाफा होता है, तो उसे एलटीसीजी के रूप में सरकार को टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा हर बार शेयर खरीदने और बेचने पर एसटीटी भी चुकाना पड़ता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन करों के कारण कई बार विदेशी और घरेलू निवेशक दूसरे देशों के बाजारों का रुख करते हैं। अगर सरकार इन करों में ढील देती है या इन्हें पूरी तरह समाप्त करती है, तो भारत दुनिया भर के निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा बाजार बन जाएगा।
बाजार के जानकारों और ब्रोकरेज फर्मों का भी यही कहना है कि इस तरह के कदमों से भारतीय पूंजी बाजार को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी। पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से खुदरा निवेशकों ने शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, वह वाकई में काबिले तारीफ है। छोटे शहरों और गांवों के युवा भी अब म्यूचुअल फंड और सीधे शेयरों में पैसा लगा रहे हैं। ऐसे में अगर सरकार टैक्स के नियमों को सरल और निवेशकों के अनुकूल बनाती है, तो यह देश के वित्तीय विकास के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। निवेशक अब आगामी बजट और सरकारी बैठकों में इस पर अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
बाजार पर इसका सीधा असर और निवेशकों का रिएक्शन
जैसे ही वित्त मंत्री के इन बयानों और संकेतों की खबर मीडिया में आई, शेयर बाजार के निवेशकों में एक नई ऊर्जा और उम्मीद जाग गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक लंबे समय से ऐसे सुधारों की मांग कर रहे थे जो उनके मुनाफे को सुरक्षित रखें। यदि एलटीसीजी और एसटीटी नियमों में कोई बदलाव होता है, तो ट्रेडिंग की लागत काफी कम हो जाएगी। कम लागत होने की वजह से लोग ज्यादा बार और बड़े पैमाने पर निवेश कर पाएंगे, जिससे कंपनियों को भी आगे बढ़ने के लिए आसानी से फंड मिल सकेगा।
हालांकि, अभी यह शुरुआती संकेत हैं और सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक अंतिम फैसला आना बाकी है। लेकिन जिस तरह से देश के बड़े वित्तीय संस्थान और बैंक इस मुद्दे को उठा रहे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में नीति निर्माताओं के स्तर पर इस पर गंभीर विचार-विमर्श जरूर होगा। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही इस पर कोई नया आधिकारिक अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक सटीक जानकारी पहुंचाएंगे। तब तक निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए ही अपनी रणनीति बनानी चाहिए।
आगामी नीतियां और सरकार का अगला कदम
वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि सरकार हमेशा से देश के आर्थिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के पक्ष में रही है। यदि एसबीआई रिसर्च के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो यह कर सुधार भारतीय पूंजी बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है। निवेशकों की निगाहें अब पूरी तरह से वित्त मंत्रालय के अगले कदमों पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में इन करों में कोई बड़ी राहत दी जाएगी या नियमों में आंशिक बदलाव किए जाएंगे।







