नब्बे का स्वर्णिम काल और संगीत का वह जादुई सफर
भारतीय सिनेमा के इतिहास में नब्बे के दशक को सबसे यादगार और खूबसूरत दौर माना जाता है। इस दशक ने बॉलीवुड को कई बड़े सुपरस्टार्स के साथ-साथ ऐसे सदाबहार गीत दिए जो आज भी हर पीढ़ी के लोगों की पसंद बने हुए हैं। उस समय के रोमांटिक गानों में जो मिठास और गहराई हुआ करती थी, वह आज भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले इन गानों की फेहरिस्त में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो आज भी किसी न किसी महफिल की शान बढ़ाते हैं।
सिनेमा जगत में जब भी नब्बे के दशक की बात होती है, तो उस दौर की अभिनेत्रियों और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री का जिक्र लाजिमी हो जाता है। धक-धक गर्ल के नाम से मशहूर माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। उनकी फिल्मों के गाने न सिर्फ पर्दे पर सुपरहिट साबित हुए, बल्कि ऑडियो कैसेट के जमाने में भी रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज कराते थे। इन गानों के पीछे कुछ ऐसे दिग्गज कलाकारों और गीतकारों की मेहनत छिपी है जिन्होंने अपनी कला से इतिहास रच दिया।
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फिल्म 'कोयला' का वह आइकॉनिक गीत और शाह रुख-माधुरी की केमिस्ट्री
साल 1997 में रिलीज हुई निर्देशक राकेश रोशन की बहुचर्चित फिल्म 'कोयला' अपने दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म में शाह रुख खान ने शंकर नाम के एक ऐसे शख्स की भूमिका निभाई थी जो बोल नहीं सकता था, यानी गूंगा था। वहीं माधुरी दीक्षित ने गौरी नाम की एक भोली-भाली गांव की लड़की का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी भले ही एक खतरनाक विलेन राजा साहब (अमरीश पुरी) और जुल्म के इर्द-गिर्द घूमती हो, लेकिन इसके गाने आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
इसी फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय गाना था- 'देखा तुझे तो, हो गई दीवानी... पालूं तुझे तो मर ना जाऊं कहीं'। इस खूबसूरत गीत को स्वर कोकिला अलका याग्निक और मशहूर गायक कुमार साउ ने अपनी आवाज से सजाया था। गीत के बोल जाने-माने गीतकार इंदीवर ने लिखे थे और इसका संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना आज भी जब बजता है, तो लोग थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं। गूंगी मोहब्बत की दास्तां बयां करते इस गाने ने रिलीज के वक्त सिनेमाघरों में धूम मचा दी थी।
अस्पताल के बेड से निकला था माधुरी दीक्षित का एक और ऐतिहासिक गाना
माधुरी दीक्षित के करियर का एक और कल्ट सॉन्ग ऐसा है जिसके बनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा जुड़ा है। हम बात कर रहे हैं साल 1991 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'साजन' के सुपरहिट गाने 'देखै है पहली बार साजन की आंखों में प्यार...' की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सदाबहार गाने को गीतकार ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान लिखा था। बीमारी के बिस्तर पर लिखे गए इस गीत ने जब सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी, तो इसने देश भर के युवाओं के दिलों पर राज करना शुरू कर दिया।
अल्का याग्निक की जादुई और मधुर आवाज में गाए गए इस गाने को आज 35 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इसकी लोकप्रियता में जरा भी कमी नहीं आई है। उस दौर के संगीतकारों, गीतकारों और गायकों का समर्पण ऐसा था कि विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने ऐसे कलात्मक गीत रचे जो अमर हो गए। माधुरी दीक्षित की मनमोहक मुस्कान और नशीली आंखों पर फिल्माया गया यह गाना आज भी रोमांस का पर्याय माना जाता है।
जब एक ही दिन में लिखे गए थे 27 कल्ट और सुपरहिट गाने
हिंदी सिनेमा के गीत लेखन की दुनिया में कई ऐसे किस्से हैं जो हैरान कर देते हैं। नब्बे के दशक के एक और दिग्गज गीतकार समीर अनजान ने एक पॉडकास्ट के दौरान अपने जीवन का एक ऐसा पन्ना खोला था जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया था। समीर ने बताया था कि उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था जब उनके पास काम की कमी थी, लेकिन फिर किस्मत का पहिया ऐसा घूमा कि उन्हें लगातार काम मिलने लगा।
"एक दौर ऐसा भी आया जब मैंने अपनी जिंदगी के सबसे व्यस्त दिनों में केवल एक दिन के भीतर 27 कल्ट गानों को लिख डाला था। ये वे गाने थे जो 1995 से 1998 के बीच रिलीज हुईं कई बड़ी बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा बने और आज भी लोग उन्हें गुनगुनाते हैं।" — समीर अनजान, प्रसिद्ध गीतकार
यह इस बात का प्रमाण है कि नब्बे के दशक के रचनाकारों में किस स्तर की प्रतिभा और कार्यक्षमता हुआ करती थी। बिना किसी आधुनिक तकनीक या एआई की मदद के, केवल कलम और कागज के दम पर इतने कम समय में इतने शानदार गीत लिख देना किसी चमत्कार से कम नहीं है। यही वजह है कि आज भी जब पुराने दौर का संगीत बजता है, तो श्रोता पुरानी यादों में खो जाते हैं।
आज की म्यूजिक इंडस्ट्री और नब्बे के दौर के संगीत की तुलना
मौजूदा दौर के गानों और नब्बे के दशक के संगीत में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है। आज जहां रीमिक्स और तेज बीट्स वाले गानों का बोलबाला है, वहीं नब्बे के दशक के गानों में रूहानी सुकून, बेहतरीन शब्द और कानों को प्रिय लगने वाले सुर हुआ करते थे। अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति, उदित नारायण, कुमार सानू और सोनू निगम जैसे गायकों ने अपनी आवाज से भारतीय संगीत को जो ऊंचाई दी, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
माधुरी दीक्षित और शाह रुख खान जैसे कलाकारों की ऑन-स्क्रीन मौजूदगी ने इन गानों को हमेशा के लिए अमर बना दिया। आज की युवा पीढ़ी भी सोशल मीडिया रील्स और शॉर्ट्स के जरिए इन पुराने गानों को दोबारा जिंदा कर रही है। यह इस बात का सबूत है कि कला जब सच्ची और दिलों से जुड़ी होती है, तो वह समय की सीमाओं से परे हो जाती है। नब्बे के दशक का संगीत आज भी हमारे दिलों में एक खास जगह बनाए हुए है और हमेशा रहेगा।








