नब्बे के दशक का वह स्वर्णिम संगीत और माधुरी का जादू
भारतीय सिनेमा के इतिहास में नब्बे का दशक एक ऐसा कालखंड माना जाता है, जब संगीत ने फिल्मों की सफलता में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। उस दौर के रोमांटिक और मेलोडियस गाने आज भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं। जब भी आइकॉनिक गानों की बात होती है, तो गायिका अलका याग्निक का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने अपनी सुरीली और रूहानी आवाज से अनगिनत ऐसे गीत गाए हैं जो आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट का मुख्य हिस्सा बने हुए हैं। ऐसा ही एक बेहद लोकप्रिय और सदाबहार गाना लगभग तीन दशक पहले आया था, जो आज भी उतना ही ताजा महसूस होता है जितना तब हुआ करता था।
यह खूबसूरत गाना बॉलीवुड की धड़कन कही जाने वाली खूबसूरत अभिनेत्री माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था। स्क्रीन पर माधुरी के दिलकश अंदाज और नृत्यों ने इस गीत में जान फूंक दी थी। फिल्म जगत के गलियारों में आज भी इस गाने की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। जब भी प्रेमी जोड़े या संगीत के दीवाने पुराने दौर के गानों को याद करते हैं, तो इस ट्रैक का जिक्र जरूर आता है। यह गीत सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि नब्बे के दशक के उस दौर की एक खूबसूरत याद है जब संगीत में सादगी और गहराई हुआ करती थी।
इस गाने की सबसे बड़ी खासियत इसके बोल और इसका संगीत संयोजन था, जो सीधे सुनने वालों के दिलों में उतर जाता था। आज के डिजिटल दौर में जहां गाने जल्दी बनते और उतनी ही जल्दी भुला दिए जाते हैं, वहीं इस तरह के क्लासिक गाने अपनी मजबूत नींव के कारण आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। नई पीढ़ी के संगीत प्रेमी भी रील्स और सोशल मीडिया के जरिए इन गानों से लगातार जुड़ रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि अच्छा संगीत कभी पुराना नहीं होता।
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फिल्म 'कोयला' और शाह रुख-माधुरी की यादगार जोड़ी
यह सदाबहार गाना वर्ष 1997 में रिलीज हुई निर्देशक और निर्माता राकेश रोशन की बहुचर्चित एक्शन ड्रामा फिल्म 'कोयला' का हिस्सा था। इस फिल्म में बॉलीवुड के किंग खान यानी शाह रुख खान और धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित की मुख्य जोड़ी ने पर्दा पर आग लगा दी थी। फिल्म की कहानी जितनी रोमांचक और ड्रामा से भरी थी, उसके गाने उतने ही मधुर और कर्णप्रिय थे। पर्दे पर शाह रुख और माधुरी की केमेस्ट्री ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
फिल्म में शाह रुख खान ने 'शंकर' नाम के एक ऐसे युवक का किरदार निभाया था जो बोल नहीं सकता था, यानी गूंगा था। वह एक ताकतवर और बेरहम खदान मालिक राजा साहब का बेहद वफादार नौकर था। अपनी बेबाक और दमदार एक्टिंग के दम पर शाह रुख ने इस गूंगे किरदार को भी अमर कर दिया। फिल्म की कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब राजा साहब की नजर एक सीधी-सादी गांव की लड़की गौरी (माधुरी दीक्षित) पर पड़ती है और वह धोखे से उससे शादी करने की साजिश रचता है।
शंकर और गौरी की यह प्रेम कहानी दर्शकों को भावनाओं के एक अलग ही सफर पर ले जाती है। फिल्म के एक्शन दृश्यों के बीच पिरोए गए यह रोमांटिक गाने कहानी को एक नई राहत और खूबसूरती देते थे। 'कोयला' फिल्म आज भी अपने बेहतरीन संगीत, शानदार एक्शन और दमदार अभिनय के लिए याद की जाती है, और इसका श्रेय इसकी पूरी स्टार कास्ट के साथ-साथ इसके संगीतकारों को भी जाता है।
'देख तुझे तो हो गई दीवानी' गाने के पीछे की सुरीली दास्तां
फिल्म 'कोयला' के इस आइकॉनिक गाने के बोल थे— 'देख तुझे तो हो गई दीवानी, पा लूं तुझे तो मर ना जाऊं कहीं'। इस खूबसूरत गीत को अपने सुरों से सजाने का जिम्मा उस दौर की सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायिका अलका याग्निक ने उठाया था। उनका साथ देने के लिए इंडस्ट्री के दिग्गज और सुरीले गायक कुमार सानू ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा था। दोनों की जुगलबंदी ने इस गाने को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया था।
गीत के बोल जाने-माने गीतकार इंदीवर जी ने लिखे थे, जिनके शब्दों में हमेशा से एक अलग गहराई और अपनापन होता था। वहीं, इस गाने का जादुई संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था। राजेश रोशन की धुनें हमेशा से अपनी मेलोडी के लिए जानी जाती रही हैं और इस गाने में भी उनका वही पुराना और जादुई संगीत देखने को मिला। जब यह गाना पर्दे पर माधुरी दीक्षित की अदाओं के साथ चला, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग झूम उठे थे।
"नब्बे के दौर के गाने सिर्फ आवाज का जादू नहीं थे, वे इंसानी जज्बातों का ऐसा दस्तावेज थे जिन्हें पीढ़ियां याद रखेंगी। अलका याग्निक और कुमार सानू की गायकी ने उन धुनों को अमर बना दिया जो आज भी हर दिल की धड़कन पर राज करती हैं।" — वरिष्ठ संगीत समीक्षक
आज भी जब यह गाना किसी रेडियो स्टेशन या संगीत ऐप पर बजता है, तो लोग बरबस ही इसके सुरों में खो जाते हैं। यह गीत इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि जब बेहतरीन गीतकार, सुरीले गायक और दिग्गज संगीतकार एक साथ आते हैं, तो कला का एक ऐसा नमूना तैयार होता है जो समय की सीमाओं से परे हो जाता है।
सिनेमाई इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए ये सुर
समय बहुत तेजी से बदल रहा है और इसके साथ ही संगीत के पैमाने और रूप भी बदल चुके हैं। आज के दौर में इलेक्ट्रॉनिक बीट्स और रीमिक्स का बोलबाला है, लेकिन 90 के दशक के उन क्लासिक गानों की रूह आज भी जिंदा है। माधुरी दीक्षित और शाह रुख खान पर फिल्माया गया यह गाना इस बात का सबूत है कि सच्ची कला कभी पुरानी नहीं होती। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग सुकून तलाशते हैं, तो ऐसे ही पुराने और मधुर गाने उन्हें एक अलग दुनिया में ले जाते हैं।
अलका याग्निक की आवाज का जादू आज भी उतना ही असरदार है जितना तीन दशक पहले हुआ करता था। उनके गाए गीत आज भी हर उम्र के लोगों की जुबान पर आसानी से मिल जाते हैं। 'कोयला' फिल्म का यह गाना सिर्फ एक इंटरटेनमेंट का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत उद्योग की एक अमूल्य धरोहर है। आने वाली पीढ़ियां भी इन गानों के जरिए उस दौर के संगीत की मिठास और गहराई को महसूस करती रहेंगी।








