नई दिल्ली/हैदराबाद: 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों माइथोलॉजिकल और पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों का एक नया दौर चल रहा है। इसी कड़ी में अभिनेता सुमंत की बहुचर्चित तेलुगु सुपरनैचुरल और माइथोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म 'महेंद्रगिरि वाराही' (Mahendragiri Varahi) ने अब डिजिटल प्लेटफॉर्म (OTT) पर अपनी दस्तक दे दी है। सिनेमाघरों में अपनी रिलीज के बाद, जहां इसे आलोचकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी, वहीं अब ओटीटी दर्शकों के बीच यह चर्चा का विषय बन गई है।
माइथोलॉजिकल थ्रिलर और बॉक्स ऑफिस का गणित
पिछले कुछ समय से भारतीय बॉक्स ऑफिस पर पौराणिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दो सालों में लगभग एक दर्जन ऐसी बड़ी फिल्में आने वाली हैं जो माइथोलॉजिकल जॉनर पर आधारित होंगी। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अत्याधुनिक वीएफएक्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। 'महेंद्रगिरि वाराही' भी इसी ट्रेंड का एक हिस्सा है, जो पौराणिक मान्यताओं और रहस्यमयी थ्रिलर का मिश्रण पेश करती है।
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समीक्षकों की नजर में 'महेंद्रगिरि वाराही'
द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों की समीक्षाओं पर गौर करें तो इस फिल्म को लेकर आलोचकों की राय बंटी हुई नजर आती है। एक तरफ जहां फिल्म के कॉन्सेप्ट और 'रॉयल लीजेंड' की थीम को रोमांचक माना गया है, वहीं दूसरी तरफ इसकी स्क्रिप्ट और पटकथा को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कई समीक्षकों का मानना है कि कमजोर और थका देने वाली पटकथा के बीच केवल अभिनेता सुमंत का अभिनय ही इस सुपरनैचुरल थ्रिलर को डूबने से बचाता है। एक समीक्षक ने तो यहां तक लिखा कि 'फिल्म की कहानी को दैवीय हस्तक्षेप (Divine Intervention) की जरूरत थी।'
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर री-एंट्री: क्या दर्शक पसंद करेंगे?
सिनेमाघरों में बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन के बाद, अब 'महेंद्रगिरि वाराही' के डिजिटल रिलीज पर सबकी निगाहें टिकी हैं। ओटीटी स्पेस में दर्शकों का मिजाज सिनेमाघरों से थोड़ा अलग होता है। यहां कॉन्टेंट-ड्रिवन और थ्रिलर जॉनर की फिल्मों को अक्सर दूसरा मौका मिल जाता है। क्या सुमंत की यह फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन कमियों को पाटने में कामयाब होगी जो सिनेमाघरों में खटकी थीं? यह आने वाले हफ़्तों के व्यूअरशिप ट्रेंड्स से ही साफ हो पाएगा।
भविष्य का सिनेमा: एआई और माइथोलॉजी का संगम
'महेंद्रगिरि वाराही' जैसे प्रोजेक्ट्स इस बात का संकेत हैं कि फिल्म निर्माता लीक से हटकर नए प्रयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, तकनीक और पौराणिक कथाओं का यह मेल तभी सफल हो सकता है जब पटकथा उतनी ही मजबूत हो। 'द फ्रीलान्स' की पड़ताल यह बताती है कि आने वाले दिनों में जब मेकर्स एआई और डिजिटल टूल्स का सहारा लेंगे, तो दर्शकों की उम्मीदें और अधिक बढ़ जाएंगी।
निष्कर्ष
अंततः, 'महेंद्रगिरि वाराही' का ओटीटी पर आना इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय सिनेमा अब राष्ट्रीय और डिजिटल फलक पर अपनी पहुंच व्यापक कर रहा है। भले ही इसकी कहानी को लेकर आलोचनाएं हुई हों, लेकिन माइथोलॉजिकल थ्रिलर के रूप में इसने दर्शकों को एक नया विकल्प जरूर दिया है।








