राजस्थान में ग्रामीण चुनावों की सुगबुगाहट तेज, आज तय होगा पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ने लगा है. शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के शांतिपूर्ण संपन्न होने के बाद अब सूबे का पूरा ध्यान ग्रामीण इलाकों की ओर केंद्रित हो गया है. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायत चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद आज यानी 3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई है. इस हाई-प्रोफाइल प्रेसवार्ता में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 के कार्यक्रमों और मतदान की तारीखों का औपचारिक ऐलान होने की पूरी संभावना है. इस घोषणा के साथ ही प्रदेश के गांवों में अपनी सरकार चुनने की चुनावी प्रक्रिया का औपचारिक आगाज हो जाएगा.
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस जयपुर स्थित शासन सचिवालय के विकास खंड के पंचायती राज सभागार में आयोजित की जाएगी. निर्वाचन आयोग की इस घोषणा पर न केवल तमाम राजनीतिक दलों बल्कि देश-प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषकों और संभावित उम्मीदवारों की भी पैनी नजरें टिकी हुई हैं. यह चुनाव तय करेगा कि आने वाले समय में ग्रामीण स्तर पर किस राजनीतिक दल का दबदबा कायम होता है.
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शहरी निकाय चुनावों के बाद अब ग्रामीण सियासत बनी राजनीतिक दलों का मुख्य अखाड़ा
हाल ही में राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव की लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया सितंबर माह में सफलतापूर्वक पूरी की गई थी. इन निकाय चुनावों में दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को मतदान संपन्न हुआ था, जिसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव के नतीजे भी सामने आ चुके हैं. शहरी सरकार के गठन के बाद अब राजनीतिक दलों के रणनीतिकार अपनी पूरी ताकत ग्रामीण क्षेत्रों झोंकने के लिए तैयार बैठे हैं. पंचायती राज चुनाव केवल स्थानीय नेतृत्व चुनने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इन्हें आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता के मूड को भांपने का एक बड़ा पैमाना माना जा रहा है.
ग्राम पंचायतों से लेकर पंचायत समितियों और जिला परिषदों तक के त्रिस्तरीय चुनावों में हर कोई अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने का सबसे बड़ा अवसर है. आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद उम्मीदवारों के चयन, टिकट बंटवारे और स्थानीय समीकरणों को साधने की कवायद और अधिक तेज हो जाएगी.
कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी जंग, क्या पंचायत चुनाव बनेंगे विधानसभा का सेमीफाइनल?
जैसे-जैसे पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राज्य की प्रमुख पार्टियों—भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग भी तेज होती जा रही है. कांग्रेस पार्टी ने इन चुनावों को लेकर अपनी तैयारियों को पुख्ता बताते हुए सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर देने का दावा किया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली लगातार यह कह रहे हैं कि कांग्रेस ग्रामीण चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार है और जनता का रुझान बदलाव की तरफ है.
दूसरी ओर, बीजेपी भी इन चुनावों में अपनी जीत का परचम फहराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. दोनों ही दलों के दिग्गज नेता ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए जनसंपर्क अभियानों और रणनीतिक बैठकों में जुट गए हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव के नतीजे आने वाले वक्त में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
"कांग्रेस पार्टी पंचायत चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार है. निकाय चुनाव में हमने कड़ी टक्कर दी है और अब ग्रामीण क्षेत्रों की जनता बीजेपी सरकार की नीतियों से त्रस्त होकर बदलाव का मन बना चुकी है." — गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
चुनाव आयोग की रूपरेखा: कितने चरणों में होंगे मतदान और क्या होगी आचार संहिता की स्थिति
राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही यह संकेत दे चुका है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव तय समय सीमा के भीतर ही निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए जाएंगे. ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, वार्डों के निर्धारण और आरक्षण की सभी कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं. आज दोपहर होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह साफ हो जाएगा कि मतदान कुल कितने चरणों में कराया जाएगा, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि क्या होगी और किस दिन वोटों की गिनती कर नतीजे घोषित किए जाएंगे.
चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही संबंधित जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी जाएगी, जिसके बाद सरकारी मशीनरी और प्रशासनिक अमला पूरी तरह से निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अधीन काम करना शुरू कर देगा. सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मतदान केंद्रों के निर्धारण तक की सभी तैयारियां पहले ही जिला प्रशासन द्वारा पूरी की जा चुकी हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए.








