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देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

भारत के बिना नहीं चल सकता काम: मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने पड़ोसी देशों को दी बड़ी नसीहत

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में भारत की अहमियत पर जोर दिया है। ढाका में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि छोटे देशों की सुरक्षा और खुशहाली के लिए भारत का साथ होना बेहद जरूरी है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•6 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•30
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भारत के बिना नहीं चल सकता काम: मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने पड़ोसी देशों को दी बड़ी नसीहत
📷 भारत के बिना नहीं चल सकता काम: मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने पड़ोसी देशों को दी बड़ी नसीहत — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सुरक्षा भूमिका को सराहा।
  • उन्होंने कहा कि छोटे देश अपनी सेना पर भारी खर्च नहीं कर सकते, इसलिए शांति के लिए भारत का सहयोग जरूरी है।
  • बांग्लादेश को नसीहत देते हुए नशीद ने कहा कि दोनों देशों को अपने आपसी मतभेद जल्द सुलझा लेने चाहिए।
  • मुइज़ू सरकार के रुख पर कहा कि सत्ता में आने से पहले नेता कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन हकीकत में कूटनीतिक तालमेल बिठाना ही पड़ता है।

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का बड़ा बयान, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका अहम

क्षेत्रीय कूटनीति और कूटनीतिक समीकरणों पर इन दिनों नए सिरे से चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत की भूमिका को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट बयान दिया है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित 'बे ऑफ़ बंगाल कन्वर्सेशन' नामक तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस के दौरान नशीद ने खुलकर स्वीकार किया कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमन-चैन बनाए रखने के लिए भारत का साथ होना अनिवार्य है। उनके इस बयान को दक्षिण एशिया की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है।

यह कॉन्फ्रेंस थिंक टैंक 'सेंटर फ़ॉर गवर्नेंस स्टडीज़' (CGS) द्वारा आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम के एक सत्र के दौरान मोहम्मद नशीद ने दक्षिण एशिया के देशों के बीच आपसी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मालदीव जैसे छोटे द्वीपीय देश अपनी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में भारत इस क्षेत्र में एक मजबूत और भरोसेमंद धुरी के रूप में काम करता है, जिसकी जरूरत हर पड़ोसी देश को महसूस होती है।

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'हम अपनी सेना पर कितना खर्च कर सकते हैं?', भारत के साथ सहयोग पर बोले नशीद

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मालदीव के पूर्व नेता ने व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया का कोई भी छोटा देश अपनी सेना पर उतना बजट खर्च नहीं कर सकता, जिससे वह पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सके। इसलिए क्षेत्र के सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस भू-भाग में शांति बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत बहुत तेजी से आर्थिक और तकनीकी विकास कर रहा है और पड़ोसी देशों को इस तरक्की का हिस्सा बनना चाहिए।

मोहम्मद नशीद ने भारतीय अधिकारियों के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं। उन्होंने कहा कि एक छोटे देश का प्रतिनिधि होने के बावजूद जब वे किसी भारतीय अधिकारी के सामने अपनी बात रखते हैं, तो उन्हें हमेशा सुना जाता है। यह आपसी सम्मान और क्षेत्रीय सहयोग की भावना को और मजबूत करता है। उनके मुताबिक, भारत के साथ मिलकर चलना ही इस क्षेत्र के आम नागरिकों की खुशहाली की सबसे बड़ी गारंटी है।

सत्ता में आने से पहले और बाद की राजनीति पर दिया बड़ा बयान

जब मोहम्मद नशीद से मालदीव की मौजूदा सरकार के रुख और राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू के 'इंडिया आउट' कैंपेन से जुड़े बदलावों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई दल या नेता चुनावी मैदान में होता है और सत्ता हासिल करना चाहता है, तो वह कई तरह के नारे और बयान दे सकता है। हालांकि, वास्तविक धरातल पर सरकार चलाने की जिम्मेदारी आती है, तो नेताओं को भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का अहसास हो जाता है।

नशीद ने कहा कि सरकार में आने के बाद पुरानी बयानबाजी के साथ काम करना संभव नहीं रहता और नई व्यवस्था के मुताबिक कूटनीतिक कदम उठाने ही पड़ते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मालदीव जैसे देश के लिए यह असंभव है कि वह भारत के बिना अपने विकास और सुरक्षा के एजेंडे को आगे बढ़ा सके। इस वास्तविकता को स्वीकार करना ही सभी के हित में है।

बांग्लादेश को आपसी मतभेद भुलाने की सलाह

ढाका में चल रहे इस सम्मेलन के दौरान मोहम्मद नशीद ने बांग्लादेश के साथ अपने पुराने और गहरे रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश उन्हें अपने घर जैसा लगता है और मालदीव के विकास में वहां के मेहनतकश नागरिकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेशी प्रवासियों की कड़ी मेहनत के कारण ही मालदीव आज मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंच पाया है।

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के मौजूदा दौर पर टिप्पणी करते हुए नशीद ने दोनों देशों से अपील की कि वे अपने आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझा लें। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक मोर्चे पर बहुत सी बातें कही जा सकती हैं, लेकिन अंततः शांति और प्रगति के लिए विवादों को पीछे छोड़ना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है।

"देखिए, हम सबकी अपनी-अपनी भूमिकाएँ हैं, लेकिन भूमिकाएँ अलग-अलग हैं। अपनी सुरक्षा के लिए हमें भारत की जरूरत है... कृपया अपने मतभेद सुलझा लें।" — मोहम्मद नशीद, पूर्व राष्ट्रपति, मालदीव

क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति के लिए क्यों अहम है यह बयान

विशेषज्ञों का मानना है कि मोहम्मद नशीद का यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण एशिया के कई देशों में कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ जहां मालदीव में भारत के साथ संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया चल रही है, वहीं बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नए सिरे से कूटनीति की जा रही है। ऐसे माहौल में एक वरिष्ठ क्षेत्रीय नेता द्वारा भारत की अनिवार्यता को स्वीकार करना यह साबित करता है कि इस उपमहाद्वीप में स्थिरता के लिए आपसी सहयोग कितना आवश्यक है।

यह पूरा घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि दक्षिण एशिया के देशों के बीच चाहे जितने भी राजनीतिक उतार-चढ़ाव आएं, लेकिन भूगोल और सुरक्षा की जरूरतें अंततः संवाद और सहयोग के रास्ते ही तय करती हैं। भारत की आर्थिक प्रगति और सुरक्षा का दायरा पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आता है, जिसे अब पड़ोसी देश भी खुलकर महसूस करने लगे हैं।

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