बिग बॉस के घर में खुले मनोज तिवारी की बेटी के राज
लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस' के घर में इन दिनों रिश्तों, विवादों और कई बड़े खुलासों का दौर चल रहा है। शो में जब भी कोई सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट आता है, तो दर्शक उनकी निजी जिंदगी के बारे में जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। इस बार शो में जाने-माने भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और राजनेता मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी ने शिरकत की है। रीति ने शो के दौरान अपनी जिंदगी के ऐसे पन्नों को पलटा, जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। पर्दे पर एक मशहूर और बड़े राजनीतिक चेहरे की बेटी होने के बावजूद, रीति की जिंदगी किसी 'सिल्वर स्पून' यानी ऐशो-आराम वाली कहानी जैसी नहीं रही है। उनके इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है कि कैसे बड़े सितारों के बच्चों को भी अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।
रीति ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके माता-पिता के रिश्ते में खटास आने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। तलाक की प्रक्रिया और उसके बाद के हालाول ने उन्हें पिता के प्यार से लंबे समय तक दूर रखा। उन्होंने बताया कि किस तरह से पारिवारिक दूरियों ने उनके शुरुआती जीवन को प्रभावित किया और उन्हें एक सामान्य बच्चे की तरह नहीं, बल्कि कई मुश्किलों के बीच बड़ा होना पड़ा। शो के दौरान उनके चेहरे पर वह दर्द साफ झलक रहा था जो उन्होंने कम उम्र में महसूस किया था।
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माता-पिता के तलाक और बचपन की कड़वी यादें
रीति तिवारी ने अपने माता-पिता के रिश्ते के बारे में खुलकर बात करते हुए बताया कि जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके मम्मी-पापा का तलाक हो गया था। इसके बाद उनके पिता मनोज तिवारी उनसे काफी दूर हो गए। रीति ने बताया, जब मेरी मम्मी का तलाक हुआ तो मेरे पापा चले गए। वो फोन भी करते थे तो मेरी बात नहीं हो पाती थी, क्योंकि मेरे मम्मी-पापा का उस वक्त बहुत झगड़ा चलता था। पारिवारिक कलह और दूरियों के कारण उन्हें अपने पिता का साथ नियमित रूप से नहीं मिल पाया।
स्थिति यह थी कि वह साल में सिर्फ एक बार ही अपने पिता से मिल पाती थीं। एक बच्चे के लिए पिता का साया और उनका प्यार बेहद जरूरी होता है, लेकिन रीति इन दोनों चीजों के लिए तरसती रहीं। जैसे-जैसे वह बड़ी हुईं, उनके मन में अपने पिता को करीब से जानने और समझने की इच्छा और ज्यादा प्रबल होती चली गई। आखिरकार, जब वह 18 साल की हुईं, तो उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला लिया, जिसने उनके आगे के सफर की दिशा तय कर दी।
18 की उम्र में लिया पिता के साथ रहने का फैसला
अपनी जिंदगी के सबसे अहम मोड़ के बारे में बताते हुए रीति ने कहा कि जब वह बालिग यानी 18 साल की हुईं, तब उन्होंने खुद तय किया कि अब वह अपने पिता के साथ रहना चाहती हैं। वह यह जानना चाहती थीं कि असल जिंदगी में उनके पिता एक इंसान के रूप में कैसे हैं। रीति ने बताया, जब मैं 18 साल की हुई, तब मैंने फैसला लिया कि मुझे मेरे पापा के साथ रहना है। मुझे जानना है कि वो कैसे इंसान हैं। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि शायद तब तक बहुत देर हो चुकी थी और जिंदगी के शुरुआती अहम साल बिना पिता के सानिध्य के बीत चुके थे।
जब वह अपने पिता के पास गईं, तो उन्हें दुनिया की चकाचौंध के पीछे छिपी असलियत का सामना करना पड़ा। लोगों को अक्सर यह भ्रम होता है कि किसी बड़े सेलिब्रिटी या राजनेता के बच्चे होने का मतलब असीम संपत्ति और ऐशो-आराम होता है। लेकिन रीति की कहानी इस आम धारणा से बिल्कुल उलट थी। उन्हें अपने पिता से नाम और पहचान तो मिली, लेकिन वह आर्थिक सहूलियतें नहीं मिलीं जो आमतौर पर स्टार किड्स के पास मानी जाती हैं।
'पिता की दौलत नहीं मिली, सिर्फ उनका नाम मिला'
मनोज तिवारी की शोहरत और संपत्ति के बारे में बात करते हुए रीति ने बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें अपने पिता की कमाई या धन-दौलत का कोई हिस्सा नहीं मिला। उन्होंने कहा, उनकी जो कमाई की चीजें हैं—धन-दौलत, नाम-शोहरत, वो सब मुझे नहीं मिला। लेकिन मेरे तक आया उनका नाम—मैं मनोज तिवारी की बेटी हूं। उससे मुझे बहुत रिस्पेक्ट मिला। मैं जहां भी जाती हूं लोग मुझे इज्जत देते हैं।
रीति मानتی हैं कि उनके पिता के नाम की वजह से समाज में उन्हें एक अलग पहचान और सम्मान जरूर मिला, लेकिन यह सम्मान उनकी अपनी मेहनत का नतीजा नहीं था। उन्होंने महसूस किया कि बिना अपनी खुद की कमाई और संघर्ष के, सिर्फ किसी दूसरे के नाम पर मिलने वाली पहचान अधूरी होती है। यही वजह है कि उन्होंने अपने पिता के नाम के सहारे अपनी जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ाने के बजाय खुद अपने पैरों पर खड़े होने की ठानी।
करियर को लेकर पिता की दो टूक: अपना नाम खुद बनाओ
करियर के मोर्चे पर भी मनोज तिवारी ने अपनी बेटी के सामने अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी थी। रीति ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें कभी भी अपने प्रभाव या नाम का इस्तेमाल करके करियर में आगे बढ़ाने का भरोसा नहीं दिया। मनोज तिवारी ने उन्हें साफ शब्दों में समझा दिया था कि उन्हें अपनी जिंदगी की लड़ाई खुद लड़नी होगी।
"उन्होंने मुझे एक और चीज बहुत क्लियर बोल दी थी कि वो मेरे करियर में मेरी कोई हेल्प नहीं करने वाले। गंदी तरह से नहीं बोला था, पर साफ कर दिया था कि मुझे अपना नाम खुद ही बनाना होगा। वो कहते हैं कि तुम खुद से कर ली, मैं करके नहीं दूंगा।" — रीति तिवारी, कंटेस्टेंट (बिग बॉस)
पिता की इन बातों ने रीति को अंदर से मजबूत बनाया। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं था कि उन्हें बिल्कुल भी आर्थिक मदद नहीं मिलती थी। रीति ने स्पष्ट किया कि उन्हें महीने के खर्च के लिए एक सीमित रकम मिलती थी, लेकिन उस राशि में आज के समय में गुजारा करना बेहद कठिन होता है। उन्होंने बताया कि मिलने वाले पैसों से उनकी रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल से ही पूरी हो पाती थीं।
आम इंसान की तरह संघर्ष भरी है जिंदगी
रीति का सबसे भावुक कर देने वाला खुलासा उनकी रोजमर्रा की तंगी को लेकर था। उन्होंने बताया कि सीमित खर्च के कारण कई बार उन्हें खाने-पीने के मामले में भी काफी समझौता करना पड़ता है। रीति ने साझा किया कि कई बार गुजारा करने के लिए उन्हें दिन में दो बार सिर्फ 10 रुपये वाला वड़ा पाव खाकर ही पेट भरना पड़ता है। वह अपनी गाड़ी में भी जरूरत के हिसाब से ही 500 रुपये का डीजल डलवाती हैं।
अंत में रीति ने उस सामाजिक सोच पर भी सवाल उठाया जो स्टार्स के बच्चों को लेकर हमेशा बनी रहती है। लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि सेलिब्रिटी की बेटी होने के नाते उनकी जिंदगी में कभी कोई कमी नहीं आई होगी। लेकिन रीति ने इन सभी मिथकों को तोड़ते हुए कहा कि वह भी आम इंसान की तरह ही जीवन जी रही हैं और उनका यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। 'बिग बॉस' के घर में उनके इन खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे कई बार संघर्षों की एक लंबी दास्तान छिपी होती है।



