मेरठ से एक बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। स्थानीय अदालत ने चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड के मुख्य दोषी मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई थीं। अपराध की क्रूरता को देखते हुए न्यायपालिका ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।
फैसला आने से पहले कोर्ट परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सजा का ऐलान होते ही अदालत कक्ष में मौजूद दोनों दोषी मुस्कान और साहिल फूट-फूटकर रो पड़े। जज के हर सवाल पर दोनों की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया और वे पूरी तरह मौन रहे। इस खौफनाक वारदात ने पूरे समाज को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था।
न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी: 'दंड भी धर्म है'
सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए साफ शब्दों में कहा कि 'दंड भी धर्म है'। अदालत का मानना था कि ऐसे अमानवीय अपराधों में नरमी बरतना समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह मामला क्रूरता की सभी सीमाओं को पार कर चुका था, इसलिए इसमें मृत्युदंड ही एकमात्र न्याय संगत विकल्प था।
घटना के बाद से ही पुलिस और जांच एजेंसियों ने बहुत बारीकी से सबूत जुटाए थे। वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को इस खौफनाक कृत्य का दोषी माना। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूत सबूत पेश किए, जिसके बाद दोषियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। पीड़ित परिवार को इस फैसले से थोड़ी राहत मिली है।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया और सुप्रीम कोर्ट तक की चेतावनी
अदालत के फैसले से पहले मृतक के परिवार और जेठ ने अपनी बात रखी थी। परिवार का साफ कहना था कि अगर निचली अदालत से दोषियों को फांसी की सजा नहीं मिलती, तो वे न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। परिवार लगातार सख्त सजा की मांग कर रहा था। आज आए इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने न्यायपालिका पर अपना भरोसा जताया है।
यह मामला कुछ महीने पहले तब सामने आया था जब एक नीले ड्रम के अंदर से शव बरामद हुआ था। इस सनसनीखेज खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया था कि कैसे आपसी रिश्तों और साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था और तेजी से चार्जशीट दाखिल की थी।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह
निचली अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब इस मामले को उच्च न्यायालय में भेजा जाएगा। नियम के अनुसार डेथ पेन्सी के मामलों में हाईकोर्ट की मुहर लगना अनिवार्य होता है। दोषियों के पास कानूनी विकल्पों के तहत उच्च अदालतों में अपील करने का अधिकार सुरक्षित है। लेकिन आज के इस फैसले ने साफ संदेश दे दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाती रही है। समाज में इस तरह के अपराधों के खिलाफ लोगों का गुस्सा लगातार फूट रहा था। अब कोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि ऐसे अपराधियों के मन में कानून का डर जरूर पैदा होगा।



