अंतरिक्ष की गहराइयों में सवा करोड़ बीजों का रहस्यमयी सफर
इंसान जब भी पृथ्वी से बाहर चांद या मंगल ग्रह पर लंबे मिशनों की योजना बनाता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि वहां भोजन की व्यवस्था कैसे होगी। क्या अंतरिक्ष के खतरनाक वातावरण में धरती के बीज जीवित रह सकते हैं? क्या कॉस्मिक रेडिएशन और शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहने के बाद भी पौधे फल दे सकते हैं? इसी पहेली को सुलझाने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दशकों पहले एक ऐसा महाप्रयोग शुरू किया था, जिसके परिणाम आज भी पूरी दुनिया के वनस्पति विज्ञानियों और खगोलविदों को चकित करते हैं।
नासा ने इस महत्वाकांक्षी मिशन के तहत करीब 1.25 करोड़ टमाटर के बीजों को एक खास अंतरिक्ष यान में बंद करके अंतरिक्ष में भेजा था। यह कोई दो-चार महीने का मिशन नहीं था, बल्कि इन बीजों ने अंतरिक्ष के बेहद शून्य और बर्फीले वातावरण में लगभग छह साल का लंबा वक्त गुजारा। जब ये बीज पृथ्वी पर वापस लौटे और इन्हें 40 अलग-अलग देशों में बोया गया, तो जो आंकड़े सामने आए, उसने वैज्ञानिकों की पूरी सोच ही बदल कर रख दी।
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लॉन्ग ड्यूरेशन एक्सपोजर फैसिलिटी: जब अंतरिक्ष में लटका दिया गया बीजों का संदूक
इस पूरे प्रयोग की शुरुआत साल 1984 में हुई थी, जब नासा ने स्पेस शटल चैलेंजर के जरिए 'लॉन्ग ड्यूरेशन एक्सपोजर फैसिलिटी' (LDEF) नामक एक विशाल उपग्रह को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया था। यह उपग्रह एक बस के आकार का था और इसमें कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोग शामिल थे। इन्हीं में से एक बेहद खास प्रयोग था 'सीड्स' (SEEDS - Space Exposed Experiment Developed for Students), जिसमें कैनिस्टर के भीतर 12.5 मिलियन यानी सवा करोड़ टमाटर के बीज रखे गए थे।
मूल योजना के मुताबिक इस उपग्रह को महज 10 से 18 महीनों के भीतर वापस धरती पर लाया जाना था। लेकिन साल 1986 में हुए भयानक चैलेंजर हादसे ने नासा के पूरे स्पेस शटल प्रोग्राम को हिलाकर रख दिया। उड़ानों पर रोक लग गई और LDEF अंतरिक्ष में ही अपनी कक्षा में चक्कर काटता रहा। नतीजतन, ये बीज महीनों की जगह लगभग 5.7 साल यानी करीब छह साल तक लगातार अंतरिक्ष की भयानक मार झेलते रहे।
"हम यह देखना चाहते थे कि क्या जीवित कोशिकाएं अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान के उतार-चढ़ाव और जानलेवा कॉस्मिक किरणों का सामना करने के बाद भी अंकुरित हो सकती हैं। यह भविष्य की अंतरग्रहीय यात्राओं के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।" — नासा वैज्ञानिक दल, मिशन रिपोर्ट
40 देशों के लाखों बच्चों और वैज्ञानिकों ने मिलकर किया महाप्रयोग
साल 1990 में स्पेस शटल कोलंबिया ने अंतरिक्ष में जाकर इस उपग्रह को सफलतापूर्वक पकड़ा और धरती पर सुरक्षित वापस लाया। जब वैज्ञानिकों ने सीलबंद कंटेनरों को खोला, तो बीज पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रहे थे। इसके बाद नासा ने इतिहास का सबसे बड़ा 'सिटिजन साइंस' प्रोजेक्ट शुरू किया। इन बीजों को अमेरिका सहित दुनिया भर के करीब 40 देशों के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में भेजा गया।
लाखों स्कूली छात्रों और विज्ञान के जानकारों को दो तरह के पैकेट दिए गए। एक पैकेट में अंतरिक्ष से लौटे 'स्पेस सीड्स' थे, जबकि दूसरे पैकेट में धरती पर सुरक्षित रखे गए सामान्य बीज (कंट्रोल ग्रुप) थे। किसी को यह नहीं बताया गया था कि कौन सा बीज अंतरिक्ष से आया है ताकि परिणाम पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक रहें। बच्चों और शिक्षकों ने नियमित रूप से पानी दिया, तापमान दर्ज किया और अंकुरण की प्रक्रिया पर बारीक नजर रखी।
जब जमीन पर फूटी कोपलें: क्या अंतरिक्ष के बीजों में कोई म्यूटेशन हुआ?
वैज्ञानिकों को सबसे बड़ा डर इस बात का था कि 6 साल तक अंतरिक्ष में कॉस्मिक रेडिएशन झेलने के कारण बीजों का डीएनए पूरी तरह नष्ट हो गया होगा या फिर उनमें खतरनाक जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक बदलाव) आ गया होगा। कई लोगों को अंदेशा था कि इन बीजों से पौधे उगेंगे ही नहीं, या फिर उगने वाले फल जहरीले और अजीबोगरीब आकार के हो सकते हैं।
लेकिन जब 40 देशों के क्लासरूम और ग्रीनहाउस से आंकड़े आने शुरू हुए, तो नतीजे अप्रत्याशित थे। अंतरिक्ष से लौटे बीजों की अंकुरण दर धरती पर रखे गए बीजों की तुलना में लगभग बराबर और कुछ मामलों में थोड़ी बेहतर पाई गई। अंतरिक्ष के बीजों ने सामान्य बीजों से औसतन कुछ घंटे पहले ही अंकुरण शुरू कर दिया था। पौधों की पत्तियां, तने और जड़ों का विकास सामान्य गति से हुआ और उन पर स्वस्थ टमाटर लगे।
क्या अंतरिक्ष में उगाए टमाटर खाने लायक थे?
इस शोध का सबसे अहम पड़ाव यह जानना था कि क्या अंतरिक्ष की यात्रा कर चुके बीजों से पैदा हुए टमाटर इंसानों के खाने के लिए सुरक्षित हैं। नासा और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन पौधों से मिले फलों का गहन रासायनिक और जैविक विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि इन टमाटरों में किसी भी प्रकार का विषैला तत्व या खतरनाक रेडियोधर्मी प्रभाव नहीं था।
पौधों में पोषण की मात्रा, शर्करा का स्तर और विटामिन की मौजूदगी बिल्कुल सामान्य टमाटरों जैसी ही थी। इस खोज ने वैश्विक स्तर पर यह साबित कर दिया कि प्राकृतिक बीज बेहद लचीले और मजबूत होते हैं। अगर बीजों को सही तरीके से पैक करके अंतरिक्ष में ले जाया जाए, तो वे बिना नष्ट हुए वर्षों तक जीवित रह सकते हैं और धरती या किसी अन्य ग्रह की मिट्टी में दोबारा जिंदगी शुरू कर सकते हैं।
मंगल और चंद्रमा मिशन के लिए इस प्रयोग ने खोले नए दरवाजे
इस प्रयोग की सफलता ने मौजूदा दौर के 'आर्टेमिस मिशन' और भविष्य के मंगल अभियानों के लिए बुनियादी जमीन तैयार की। आज जब वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर मानव बस्तियां बसाने की बात करते हैं, तो भोजन की आत्मनिर्भरता सबसे बड़ी चुनौती होती है। धरती से हर महीने खाना भेजना आर्थिक और व्यावहारिक दोनों रूपों में असंभव है।
टमाटर के बीजों के इस 6 साल लंबे अंतरिक्ष प्रवास ने यह भरोसा दिया कि अंतरिक्ष यात्री अपने साथ विभिन्न फसलों के बीजों को लंबी यात्राओं पर ले जा सकते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर चलने वाला 'वेज-01' (Veggie) प्रयोग और आधुनिक एस्ट्रोबॉटनी (अंतरिक्ष वनस्पति विज्ञान) इसी ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की नींव पर खड़े हैं। नासा का यह प्रयोग साबित करता है कि अंतरिक्ष की असीम गहराइयों में भी जीवन पनपने की असीम संभावनाएं छिपी हुई हैं।








