नसीरुद्दीन शाह ने सीजेपी के आंदोलन को दिया समर्थन, अभिजीत दीपके से की खास मुलाकात
देश के जाने-माने और अपने बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में मुंबई के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल पैदा कर दी, जब वे सीधे शिवाजी पार्क पहुंच गए। यहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'जेल भरो आंदोलन' का आगाज किया जा रहा था। इस विरोध प्रदर्शन की कमान सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके संभाल रहे हैं। इस दौरान नसीरुद्दीन शाह की अचानक मौजूदगी ने न सिर्फ वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गई।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अभिनेता नसीरुद्दीन शाह मंच पर पहुंचते हैं और सीधे अभिजीत दीपके को अपने गले से लगा लेते हैं। दोनों के बीच हुई इस गर्मजोशी भरी मुलाकात का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे के प्रति अपना समर्थन और सम्मान जाहिर किया, जिससे वहां मौजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह भी काफी बढ़ गया।
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'मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं': जब दिग्गज अभिनेता ने युवा नेता से कही यह बात
मुलाकात के दौरान का एक दिलचस्प वाकया सामने आया है, जिसमें दोनों हस्तियां एक-दूसरे की तारीफ करती नजर आईं। वीडियो फुटेज के अनुसार, नसीरुद्दीन शाह ने अभिजीत दीपके से कहा कि वह विशेष रूप से उन्हें धन्यवाद देने, हाथ मिलाने और गले लगाने के लिए आए हैं। इस पर अभिजीत दीपके ने हैरानी और खुशी जताते हुए कहा कि वह अभिनेता के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उन्हें अंदाजा नहीं था कि वह वहां मौजूद होंगे।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नसीरुद्दीन शाह ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें पहले से पता था कि वह यहां मौजूद हैं और वह खुद अभिजीत दीपके के बहुत बड़े फैन हैं। अभिनेता ने युवा नेता के संघर्ष और उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों की सराहना की। उन्होंने दीपके के उज्ज्वल भविष्य और उनकी भላይ के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं। सीजेपी के साथ नसीरुद्दीन शाह का यह जुड़ाव कोई पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी वह इस संगठन के कई मुद्दों पर मुखर होकर समर्थन जता चुके हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवाजी पार्क में प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। पार्टी का मुख्य आरोप है कि चुनाव आयोग में असहमति का विवाद और वोटर लिस्ट का 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सीजेपी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य प्रमुख शहरों तक भी फैलाया जाएगा।
इससे पहले सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसके बाद काफी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी। इस बार पार्टी ने अपनी रणनीति बदलते हुए आंदोलन की शुरुआत महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के प्रतिष्ठित शिवाजी पार्क से की है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि जनता के बीच जाकर इन गंभीर मुद्दों को उठाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
पुलिस की अनुमति से इनकार और नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ आयोजकों की खींचतान भी देखने को मिली। मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट के साल 2013 के एक आदेश का हवाला देते हुए शिवाजी पार्क में इस तरह के विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, सीजेपी के संस्थापकों ने इस आपत्ति को दरकिनार करते हुए कहा कि जब सत्ताधारी दल और अन्य राजनीतिक पार्टियां उसी मैदान पर बड़ी रैलियां और जलसे कर सकती हैं, तो असहमति जताने के लिए नागरिकों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम पर बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी अपनी सोशल मीडिया प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि शिवाजी पार्क के स्थानीय निवासी शोर-शराबे और प्रदूषण को लेकर इतने जागरूक हो गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब भी भविष्य में किसी राजनीतिक दल का कोई बड़ा जलसा इस मैदान पर होगा, तो स्थानीय लोग इसी तरह की आपत्तियां दर्ज कराएंगे।
दादर रेलवे स्टेशन के पास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आगे की रणनीति
विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन और शिवाजी पार्क के आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गेट नंबर 6 के पास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे। सीजेपी नेताओं ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका यह पूरा आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा और इसका मकसद किसी भी तरह की अशांति फैलाना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक दायरे में अपनी बात को जनता तक पहुंचाना है।
"नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गज कलाकारों का समर्थन इस बात का प्रमाण है कि देश के नागरिक अब लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं और बदलाव चाहते हैं। हमारा यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक न्यायसंगत कदम नहीं उठाए जाते।" — अभिजीत दीपके, संस्थापक, कॉकरोच जनता पार्टी
विश्लेषकों का मानना है कि इस आंदोलन में जिस तरह से बॉलीवुड की नामचीन हस्तियां खुलकर सामने आ रही हैं, उससे इस प्रकार के राजनीतिक और सामाजिक अभियानों को एक अलग राष्ट्रीय मंच मिल रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीजेपी का यह 'जेल भरो आंदोलन' मुंबई से निकलकर देश के अन्य राज्यों तक किस प्रकार अपनी पहुंच बनाता है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।





