नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में इस समय निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। बाजार के जानकारों ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में निफ्टी पांच प्रतिशत तक टूट सकता है। अगर ऐसा हुआ तो निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बाजार में बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ रहा है और विदेशी निवेशक भी लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। आम निवेशक इस बात को लेकर काफी डरे हुए हैं कि उनकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित बचेगी या नहीं।
बाजार की चाल बिगड़ने के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर हो रहे घटनाक्रम और कंपनियों के कमजोर वित्तीय नतीजे बाजार को नीचे खींच रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी अवधि में बाजार संभलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में निवेशकों को बहुत सोच-समझकर अपने पैसे का प्रबंधन करने की सलाह दी जा रही है। बाजार में इस समय डर का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है।
रसोई के बजट पर महंगाई की दोहरी मार
एक तरफ जहां शेयर बाजार निवेशकों को डरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी की रसोई का बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है। बाजार में प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके साथ ही लहसुन, अदरक और नींबू ने भी महंगाई की आग में घी डालने का काम किया है। रोजमर्रा की इन चीजों के दाम बढ़ने से आम परिवार की थाली का स्वाद फीका पड़ गया है। मध्यम वर्ग के लोग बढ़ती कीमतों के कारण अपने महीने के खर्च का हिसाब नहीं लगा पा रहे हैं। सरकार और प्रशासन पर महंगाई को नियंत्रित करने का लगातार दबाव बढ़ रहा है।
सब्जी मंडियों में हालात यह हैं कि लोग जरूरत से कम मात्रा में सब्जियां खरीद रहे हैं। लहसुन और अदरक के दाम इतने ज्यादा हो गए हैं कि वे आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। त्योहारी सीजन के नजदीक आते ही खाद्य पदार्थों की कीमतें और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गृहिणियों का कहना है कि घर चलाना अब बहुत मुश्किल हो गया है। एक तरफ शेयर बाजार का घाटा और दूसरी तरफ घर की रसोई का खर्च, आम आदमी दोनों तरफ से पिस रहा है।
8वें वेतन आयोग को लेकर सुगबुगाहट तेज
इन तमाम आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकारी कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। चर्चा है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है और दशहरा के तुरंत बाद इसको लेकर बड़ी बैठक हो सकती है। केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बैठक में उनके वेतन और भत्तों को लेकर कोई सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। महंगाई के इस दौर में अगर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ती है, तो बाजार में मांग भी बढ़ेगी। हालांकि, इस पर अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है।
कर्मचारी संगठन लंबे समय से नए वेतन आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं। सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है ताकि बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम किया जा सके। जानकारों का मानना है कि वेतन आयोग के गठन से देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। लेकिन तब तक आम जनता को अपनी बचत और निवेश पर बहुत बारीकी से नजर रखनी होगी। पर्सनल फाइनेंस के जानकारों का कहना है कि इस समय लोन, टैक्स, और इंश्योरेंस के मामलों में सावधानी बरतना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
बाजार में निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि मौजूदा हालात में बिना सोचे-समझे पैसे लगाना खतरनाक हो सकता है। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों को अपने पोर्टफोलियो की नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए। वित्तीय सलाहकारों का सुझाव है कि इस समय सुरक्षित विकल्पों में ही निवेश करना बेहतर रहेगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है। इसलिए निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की सख्त जरूरत है।






