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देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

एक फीट से भी कम संकरी जगह: दो दीवारों के बीच फंसे 70 साल के बुजुर्ग, ऐसे बचाई जान

महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक 70 वर्षीय बुजुर्ग दो मकानों के बीच बनी बेहद संकरी जगह में फंस गए। करीब दो घंटे चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दमकल कर्मियों ने दीवार तोड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•3 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•43
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एक फीट से भी कम संकरी जगह: दो दीवारों के बीच फंसे 70 साल के बुजुर्ग, ऐसे बचाई जान
📷 एक फीट से भी कम संकरी जगह: दो दीवारों के बीच फंसे 70 साल के बुजुर्ग, ऐसे बचाई जान — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • पालघर के नवली-भीमाईनगर इलाके में हुई यह अनूठी और हैरान करने वाली घटना
  • 70 वर्षीय विनोद विष्णु जाधव दो मकानों की दीवारों के बीच एक फीट से कम चौड़ी जगह में फंसे
  • अग्निशमन दल ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दीवार तोड़कर बचाई जान
  • घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और रेस्क्यू टीम की हो रही है तारीफ

पालघर में सामने आया हैरान करने वाला मामला

महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरानी में डाल दिया है। यहां एक बुजुर्ग अचानक दो मकानों के बीच की ऐसी जगह में जा फंसे जहां से निकलना तो दूर, हिलना-डुलना भी नामुमकिन था। मामला पालघर पूर्व के नवली-भीमाईनगर इलाके का है, जहां रहने वाले 70 वर्षीय विनोद विष्णु जाधव अचानक अपने घर से लापता हो गए। सुबह के वक्त जब परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की तो उनका कहीं पता नहीं चला। घर के आसपास छानबीन करने के बाद भी जब बुजुर्ग का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों की चिंता बढ़ती चली गई।

तलाश के दौरान अचानक पास ही बने दो मकानों की दीवारों के बीच से किसी के कराहने और मदद मांगने की आवाज सुनाई दी। जब परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने उस संकरी गली की तरफ जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। विनोद जाधव दो दीवारों के बीच बनी एक फीट से भी कम चौड़ी जगह में बुरी तरह फंसे हुए थे। वह वहां कैसे पहुंचे और कब गिरे, इस बात को लेकर शुरुआती दौर में हर कोई असमंजस में था।

तंग जगह होने के कारण परिवार के लोग खुद उन्हें बाहर निकालने में नाकामयाब रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को इस अनोखी दुर्घटना की सूचना दी गई। इस घटना की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और लोग इस बात पर हैरान हैं कि आखिर बुजुर्ग इतनी खतरनाक जगह तक पहुंचे कैसे।

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एक फीट से भी कम चौड़ाई और मौत का खतरा

यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कब और कहां किस तरह की मुसीबत सामने आ जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है। विनोद जाधव जिस जगह पर फंसे हुए थे, वह दो दीवारों के बीच की वह संकरी जगह थी जिसे आमतौर पर खाली छोड़ दिया जाता है। उस जगह की चौड़ाई एक फीट से भी बहुत कम थी। इतनी तंग जगह में हवा का आना-जाना भी मुश्किल होता है और शरीर का कोई भी अंग हिलाना मु मुमकिन नहीं होता।

बुजुर्ग लंबे समय तक उसी स्थिति में फंसे रहे, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था। लगातार चिल्लाने के कारण उनकी आवाज भी धीमी पड़ने लगी थी। यदि समय रहते उनकी आवाज परिजनों तक नहीं पहुंचती, तो यह हादसा किसी बड़ी अनहोनी में बदल सकता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, जगह इतनी संकरी थी कि वहां किसी का पैर फिसलना या फिर किसी अन्य कारण से गिर जाना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा था।

परिवार के सदस्यों ने खुद उन्हें खींचने या बाहर निकालने के तमाम संभव प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। जगह की बनावट ऐसी थी कि कोई भी बाहरी व्यक्ति हाथ डालकर उन्हें पकड़ नहीं पा रहा था। ऐसे में बिना पेशेवर मदद के बुजुर्ग को बचा पाना पूरी तरह असंभव नजर आ रहा था, जिसके बाद फायर ब्रिगेड को बुलाने का निर्णय लिया गया।

दो घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण और जान जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन

मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे पालघर नगर परिषद के अग्निशमन दल को इस अजीबोगरीब हादसे की सूचना मिली। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम और पुलिस प्रशासन फौरन मौके पर पहुंच गया। हालात का जायजा लेने के बाद रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बुजुर्ग को बिना किसी शारीरिक चोट के कैसे बाहर निकाला जाए। चूंकि सीधे बाहर खींचने का कोई रास्ता नहीं था, इसलिए दमकल कर्मियों ने एक बेहद जोखिम भरा लेकिन जरूरी कदम उठाने का फैसला किया।

अग्निशमन दल के जवानों ने बिना समय गंवाए एक मकान की दीवार को तोड़ने की योजना बनाई। दीवार तोड़ते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा था कि ईंटों या मलबे का कोई भी टुकड़ा बुजुर्ग को चोट न पहुंचा दे। हथौड़ों और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से बहुत ही सावधानी के साथ दीवार को काटा गया। यह पूरा ऑपरेशन बेहद तनावपूर्ण था क्योंकि जरा सी भी लापरवाही बुजुर्ग की जान पर भारी पड़ सकती थी।

करीब दो घंटे तक चले इस कठिन और मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार दमकल कर्मियों को सफलता मिल गई। दीवार का एक हिस्सा हटाकर रास्ता बनाया गया और विनोद जाधव को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर आते ही राहत की सांस लेते हुए परिजनों ने प्रशासन और रेस्क्यू टीम का आभार व्यक्त किया।

अग्निशमन दल के जवानों की सूझबूझ और साहस की सराहना

इस पूरे सफल अभियान को अंजाम देने वाली पालघर नगर परिषद के अग्निशमन दल की टीम की हर तरफ तारीफ हो रही है। इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन में लीडिंग फायरमैन रुचित दवणे, वाहन चालक निलेश पाटील, फायरमैन संकेत पाटील, रुपेश पामाले और मोहनिष पागधरे ने अपनी जान की परवाह किए बिना अद्भुत सूझबूझ का परिचय दिया। टीम के हर सदस्य ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए एक बुजुर्ग की जान बचाई।

बचाव अभियान के बाद बुजुर्ग विनोद जाधव को फौरन प्राथमिक उपचार के लिए पालघर के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर रेस्क्यू हो जाने के कारण उनकी स्थिति खतरे से बाहर है।

"घटना की सूचना मिलते ही हमारी टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। जगह बेहद संकरी थी और जरा सी भी चूक भारी पड़ सकती थी। हमारे जवानों ने अपनी तकनीकी दक्षता और सूझबूझ का परिचय देते हुए सुरक्षित तरीके से दीवार का एक हिस्सा तोड़ा और बुजुर्ग को सकुशल बाहर निकाल लिया।" — दमकल विभाग अधिकारी, पालघर

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो और सीख

इस अनोखी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कितनी मुश्किल परिस्थितियों में दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग की जान बचाई। इंटरनेट पर लोग रेस्क्यू टीम के जज्बे को सलाम कर रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे कोरोना काल और आधुनिक दौर में भी हमारे सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।

यह घटना परिवार के सदस्यों के लिए भी एक बड़ी सीख है कि घर के बुजुर्ग सदस्यों का विशेष ध्यान रखा जाए, खासकर जब वे उम्र के ऐसे पड़ाव पर हों जहां उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति अक्सर अप्रत्याशित हो जाती है। पालघर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया फैसला और आपदा प्रबंधन की सूझबूझ किसी की भी जिंदगी बचा सकती है।

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