नई दिल्ली और देश के कई अन्य राज्यों में इन दिनों ठगी और धोखाधड़ी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधी आम लोगों को फंसाने के लिए बड़े नामों, सेलिब्रिटी और सरकारी अधिकारियों की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोगों को निवेश या लॉटरी के नाम पर चूना लगाया गया है। इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब कमर कस ली है और कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है।
ताजा मामलों में मशहूर हस्तियों के नाम का दुरुपयोग करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने ऐसे ही एक बड़े मामले में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इन मामलों में आरोपियों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए बड़े विज्ञापनों और फर्जी वादों का सहारा लिया। जब पीड़ित लोग अपने पैसे वापस मांगते हैं, तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं। इस तरह के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि ठगी का दायरा अब गांव से लेकर शहरों तक फैल चुका है।
फर्जी टिकट और लॉटरी के नाम पर हो रहा बड़ा खेल
ठगों ने अब त्योहारों और लोकप्रिय आयोजनों को भी अपने मुनाफे का जरिया बना लिया है। हाल ही में त्योहारों पर बिकने वाले बंपर टिकटों के नाम पर बड़ा ऑनलाइन फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। ठगों ने असली टिकटों की तरह दिखने वाले हूबहू नकली टिकट तैयार किए और उन्हें ऑनलाइन माध्यमों से लोगों को बेच दिया। जब ड्रॉ का समय आया तब लोगों को पता चला कि उनके पास मौजूद टिकट पूरी तरह फर्जी थे। इस तरह के मामलों में कई लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं और ठगों का सुराग तक नहीं मिल पाता है।
ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह तकनीकी रूप से बहुत शातिर हो चुके हैं। वे इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों से संपर्क बनाते हैं। कई मामलों में पुलिस अधिकारियों और बड़े प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों के नाम पर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाए जा रहे हैं। इन नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों पर दबाव बनाया जाता है या फिर पैसों की मांग की जाती है। पुलिस विभाग ने ऐसे मामलों का संज्ञान लेते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं और तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
कॉरपोरेट घोटालों और वित्तीय धोखाधड़ी के पुराने जाल
सिर्फ छोटे स्तर पर ही नहीं, बल्कि बड़े वित्तीय संस्थानों और कंपनियों के स्तर पर भी गंभीर धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहे हैं। देश के बड़े वित्तीय समूहों से जुड़े पूर्व चेयरपर्सन और वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि वित्तीय अनियमितताएँ कितनी गहराई तक फैली हुई हैं। इन मामलों में जनता का पैसा गलत जगह पर निवेश किया जाता है और बाद में कंपनी दिवालिया होने का नाटक करती है। जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के एंगल से लगातार पूछताछ कर रही हैं ताकि असली दोषियों को सजा मिल सके।
आम नागरिकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे किसी भी लुभावने ऑफर या अनजान व्यक्ति के साथ वित्तीय लेनदेन करने से पहले पूरी तरह सतर्क रहें। सोशल मीडिया पर मिलने वाले हर संदेश या विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि आपके साथ किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस और प्रशासन का मानना है कि जनता की जागरूकता ही इस तरह के अपराधों को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।
जांच एजेंसियों की सख्त कार्रवाई और भविष्य की रणनीति
बढ़ते मामलों को देखते हुए देश की विभिन्न राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब मिलकर काम कर रही हैं। संदिग्ध वेबसाइटों को ब्लॉक किया जा रहा है और फर्जी खातों से जुड़े बैंक खातों को सीज किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क की जड़ें बहुत गहरी हैं, इसलिए तह तक जाने के लिए समय लग रहा है। आने वाले दिनों में इस तरह के साइबर अपराधियों और ठगों के खिलाफ और भी बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।





