नई दिल्ली/इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र पर इस समय हलचल अपने चरम पर है। पाकिस्तान की सेना एक साथ दो बड़े और गंभीर मोर्चों पर घिरती नजर आ रही है। एक तरफ जहाँ बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की आक्रामक कार्रवाइयों ने पाकिस्तानी फौज की नींद उड़ा रखी है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों का सब्र का बांध टूट चुका है। 'द फ्रीलान्स' के इनपुट और विभिन्न खुफिया व मीडिया रिपोर्ट्स के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी सैन्य तंत्र के खिलाफ अंदरूनी बगावत अब एक बड़े जन आंदोलन और सशस्त्र संघर्ष का रूप ले चुकी है।
बLए की महिला ब्रिगेड का कहर और सैन्य साख को झटका
बलूचिस्तान के दुर्गम इलाकों में पाकिस्तानी सेना को एक के बाद एक करारा झटका लग रहा है। ताजा घटनाक्रम में BLA की विशेष महिला विंग ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन महिला लड़ाकों, जिन्हें स्थानीय स्तर पर 'शेरनियां' भी कहा जाता है, ने घात लगाकर किए गए हमले में पाकिस्तानी फौज के 9 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहला मौका नहीं है जब बलूच महिलाओं ने इस तरह के फिदायीन या गुरिल्ला हमलों का नेतृत्व किया हो, लेकिन इस हालिया हमले ने यह साबित कर दिया है कि बलूचिस्तान का सशस्त्र प्रतिरोध अब और अधिक संगठित और घातक हो चुका है।
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PoK में सुलगता जनाक्रोश: तारबंदी हटाने की मांग
दूसरी तरफ, नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार यानी PoK में हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। पाकिस्तानी सेना की क्रूरता, अमानवीय दमन और आर्थिक शोषण के खिलाफ वहां की आम जनता सड़कों पर उतर आई है। पिछले कुछ हफ्तों से PoK के विभिन्न शहरों और कस्बों में जिस तरह का जनसैलाब उमड़ रहा है, उसने इस्लामाबाद के हुक्मरानों की सांसे अटका दी हैं। स्थानीय नागरिकों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ इतना भारी आक्रोश है कि वे अब LoC पर खींची गई कृत्रिम विभाजक रेखा यानी तारबंदी को खुद ही उखाड़ फेंकने की बात खुलेआम कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा इस बात का प्रतीक है कि दशकों के उत्पीड़न के बाद अब वहां के अवाम का डर पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहें और LoC पार करने की सुगबुगाहट
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू PoK की आम जनता का भारत के प्रति बदलता दृष्टिकोण है। जमीनी रिपोर्ट बताती हैं कि प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार यह चर्चा तेज हो रही है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो वे LoC की सीमाओं को पार कर भारत की ओर रुख कर सकते हैं। पाकिस्तान सरकार और सेना द्वारा PoK के संसाधनों का दोहन करने और बुनियादी मानवाधिकारों का हनन करने से जनता का मोहभंग हो चुका है। लोग अब खुली चर्चा कर रहे हैं कि उनका भविष्य भारत के साथ जुड़ने में ही सुरक्षित है। हालांकि, कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर इस संवेदनशीलता को बेहद सावधानी से परखा जा रहा है, लेकिन जनता की यह जिद पाकिस्तानी सेना के लिए एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक हार है।
पाकिस्तान सेना के लिए दोतरफा रणनीतिक विफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना अपनी पारंपरिक दमनकारी नीतियों के बल पर अब आंतरिक असंतोष को ज्यादा दिनों तक दबा नहीं पाएगी। एक तरफ पश्चिम में बलूच विद्रोहियों की बढ़ती ताकत और अत्याधुनिक रणनीतिक हमले फौज को भारी जनहानि पहुंचा रहे हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर-पूर्व में PoK की अवाम का खुला विद्रोह सेना के लिए अपने ही घर में अजनबी बनने जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के पास न तो इस आर्थिक संकट का कोई ठोस समाधान है और न ही जनता के इस जनसैलाब का सामना करने का कोई लोकतांत्रिक तरीका। वे केवल बल प्रयोग का सहारा ले रहे हैं, जो आग में घी का काम कर रहा है।
भविष्य का असर और भू-राजनीतिक परिणाम
- सैन्य मनोबल में गिरावट: लगातार हो रहे हमलों और आंतरिक बगावत से पाकिस्तानी सैनिकों और अधिकारियों का मनोबल टूट रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब: मानवाधिकारों के हनन के मुद्दे पर पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक मंचों पर कटघरे में खड़ा है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण: PoK और बलूचिस्तान के हालात दक्षिण एशिया की सुरक्षा संरचना में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में यदि PoK का यह जनसैलाब और अधिक उग्र होता है या बलूच विद्रोह अपनी गति पकड़ता है, तो पाकिस्तान का आंतरिक ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखर सकता है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे भी हर सच को आप तक पहुंचाता रहेगा।






