आम आदमी के आशियाने पर महंगाई की मार, सीमेंट खरीदना हुआ और अधिक खर्चीला
देशभर में अपने खुद के घर का सपना संजोने वाले मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। निर्माण कार्यों में सबसे बुनियादी और अनिवार्य रूप से इस्तेमाल होने वाली सामग्री यानी सीमेंट की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन और निर्माण कार्यों के मुख्य सत्र से ठीक पहले सीमेंट उत्पादक कंपनियों ने इसके दामों में इजाफा कर दिया है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। बाजार से मिल रही ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में सीमेंट के प्रति बैग के दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं।
आर्थिक मामलों के जानकारों और ब्रोकरेज फर्म्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले कुछ महीनों के दौरान सुस्त रहने के बाद सितंबर महीने में सीमेंट के बाजार ने अचानक रफ्तार पकड़ी है। जुलाई और अगस्त के महीनों में कीमतों में स्थिरता या मामूली गिरावट थी, लेकिन सितंबर आते ही हालात बदल गए। अखिल भारतीय स्तर पर औसत व्यापार मूल्य में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे मकान बनाने की कुल लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब हर बोरी के पीछे ज्यादा पैसे चुकाने की मजबूरी ने घर बनाने वालों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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अक्टूबर में फिर बढ़ सकते हैं दाम, 5 से 20 रुपये प्रति बोरी तक महंगी होने की आशंका
सितंबर की इस तेजी के बाद भी महंगाई का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों और वित्तीय विश्लेषण रिपोर्टों का दावा है कि आने वाले अक्टूबर महीने में सीमेंट के दाम और भी ऊंचे स्तर पर जा सकते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि विभिन्न कंपनियों द्वारा सीमेंट की प्रति बोरी कीमत में 5 से लेकर 20 रुपये तक की और बढ़ोतरी की जा सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इन बढ़ी हुई कीमतों का बाजार में टिके रहना इस बात पर पूरी तरह निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में निर्माण सामग्री की मांग में किस हद तक सुधार होता है।
सेंट्रम ब्रोकिंग की एक विस्तृत रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि यदि बाजार में मांग मजबूत बनी रहती है, तो कंपनियां बढ़ी हुई कीमतों को आसानी से लागू रखेंगी। इसके विपरीत, यदि ग्राहकों और डीलरों की तरफ से इसका विरोध होता है या मांग कमजोर पड़ती है, तो कंपनियों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल, जिस प्रकार की स्थितियां बन रही हैं, उससे साफ है कि अक्टूबर का महीना घर बनाने वालों के लिए और अधिक आर्थिक बोझ लेकर आने वाला है।
अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में कीमतों का हाल, दक्षिण भारत में दिखा सबसे ज्यादा असर
देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में सीमेंट की कीमतों में उतार-चढ़ाव का अलग-अलग पैटर्न देखा गया है। सितंबर महीने के दौरान सबसे अधिक उछाल दक्षिण भारत के बाजारों में रिकॉर्ड किया गया, जहां सीमेंट की प्रति बोरी पर औसतन 11 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, पश्चिम भारत के बाजारों में लगभग 9 रुपये प्रति बैग की तेजी आई, जबकि मध्य, पूर्व और उत्तर भारत के राज्यों में 5 रुपये प्रति बोरी की दर से दाम बढ़ाए गए।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रेड और नॉन-ट्रेड दोनों ही सेगमेंट में यह तेजी देखने को मिली है, हालांकि गैर-व्यापार सेगमेंट में कीमतों में बढ़ोतरी का प्रतिशत थोड़ा ज्यादा रहा है। कई प्रमुख बाजारों में कंपनियों द्वारा अपने बिलिंग रेट तो बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन उसका पूरा भार तुरंत अंतिम उपभोक्ता तक नहीं पहुंचा है। कई डीलरों ने अपने पुराने तिमाही लक्ष्यों और वॉल्यूम टारगेट को पूरा करने के लिए पुराने दामों पर ही पुराना स्टॉक खपाया है, लेकिन अब नए स्टॉक पर पूरी बढ़ी हुई कीमतें लागू हो रही हैं।
ईंधन की बढ़ती लागत और कंपनियों का मुनाफा बनाए रखने का दबाव
सीमेंट निर्माण में ऊर्जा और ईंधन की खपत सबसे बड़ा खर्च होती है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में कोयला, पेटकोक और अन्य ईंधनों की लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस भारी भरकम उत्पादन लागत के कारण सीमेंट कंपनियों पर अपने मार्जिन और मुनाफे को बचाए रखने का गंभीर दबाव बना हुआ है। यही मुख्य वजह है कि कंपनियां लगातार बढ़ रही लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं।
"हाल के हफ्तों में ईंधन की कीमतों में जिस तरह का तीव्र उछाल आया है, उससे सीमेंट कंपनियों के लिए अपने मुनाफे के स्तर को बरकरार रखना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि कंपनियां उत्पादन लागत को संतुलित करने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी का सहारा ले रही हैं, जो सीधे तौर पर खुदरा बाजार को प्रभावित कर रहा है।" — बाजार विश्लेषक, सेंट्रम ब्रोकिंग
इस बीच, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मांग का रुख मिला-जुला रहा है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित हुए, तो कुछ इलाकों में मौसम अनुकूल रहने से मांग बनी रही। हालांकि, तिमाही के अंतिम हफ्तों में निर्माण गतिविधियों में अचानक तेजी आई, जिसने कंपनियों को कीमतें बढ़ाने का एक और अवसर प्रदान कर दिया।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण प्रतिबंध और भविष्य की चुनौतियां
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी दिल्ली-एनसीआर में आने वाले महीनों में लागू होने वाले कड़े प्रदूषण विरोधी प्रतिबंध भी सीमेंट उद्योग और बाजार को गहराई से प्रभावित करने वाले हैं। दिल्ली सरकार के नियमों के अनुसार आगामी 1 नवंबर से लेकर जनवरी के अंत तक बाहरी सिविल निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर भारी प्रतिबंध रहने की योजना है। इसके अलावा, सर्दियों के चरम प्रदूषण काल के दौरान कुछ हफ्तों के लिए निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक भी लगाई जा सकती है।
इन प्रशासनिक प्रतिबंधों के चलते दिल्ली और आसपास के इलाकों में सीमेंट की मांग में भारी गिरावट आने की पूरी संभावना है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जब क्षेत्र में निर्माण कार्य ही अस्थायी रूप से बंद रहेंगे, तब सीमेंट कंपनियां अपनी कीमतों में बढ़ोतरी के इस दौर को कैसे संभालती हैं। कुल मिलाकर, मकान बनवाने की सोच रहे आम आदमी के लिए आने वाला समय आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।








