इस्लामाबाद से हमारे ग्राउंड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत की जांच से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने का मन बना लिया है। सरकार इस मामले में अदालत के सामने पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रही है। पिछले कुछ हफ्तों से इमरान खान की जेल में सेहत को लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आ रही हैं। उनके समर्थकों और पार्टी के नेताओं ने लगातार उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने पहले इस मामले में कुछ निर्देश दिए थे जिनका पालन कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि सरकार का यह कदम राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला सकता है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने सरकार के इस फैसले को तानाशाही रवैया करार दिया है। पार्टी का कहना है कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री को बुनियादी मेडिकल सुविधाएं देने से भी बचना चाहती है। दूसरी तरफ, सरकारी वकीलों का यह तर्क है कि अदालत के पिछले आदेश में कुछ तकनीकी खामियां थीं जिन्हें ठीक करना बेहद जरूरी है। अदियाला जेल के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
जेल में बंद इमरान खान के स्वास्थ्य पर सियासत तेज
रावलपिड़ी की अदियाला जेल में बंद इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर पिछले कई दिनों से देश और विदेश में चर्चाएं गर्म हैं। उनके परिवार के सदस्यों और निजी डॉक्टरों को उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग बार-बार उठाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश में उनकी मेडिकल जांच के लिए एक स्वतंत्र बोर्ड बनाने की बात कही गई थी। सरकार अब उसी आदेश के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जता रही है। अधिकारियों का कहना है कि जेल मैनुअल के हिसाब से ही सभी कैदियों को चिकित्सा सुविधा दी जाती है और किसी को भी विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।
इस पूरे मामले में मानवाधिकार संगठनों ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका साफ कहना है कि हर कैदी को समय पर सही इलाज मिलना उसका मौलिक अधिकार है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से ताल्लुक रखता हो। जेल प्रशासन ने हालांकि इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और दावा किया है कि इमरान खान पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें जेल के भीतर ही डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है। लेकिन पार्टी के नेता इन दावों को झूठा और मनगढ़ंत बता रहे हैं।
कानूनी दांवपेंच और सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई
अब सबकी निगाहें देश की सर्वोच्च अदालत पर टिकी हैं कि वह सरकार की इस पुनर्विचार याचिका को किस रूप में लेती है। क्या अदालत अपने पुराने फैसले पर कायम रहेगी या फिर सरकार के तर्कों को ध्यान में रखते हुए कोई नया निर्देश जारी करेगी? वकीलों की मानें तो इस याचिका पर सुनवाई आने वाले कुछ दिनों में शुरू हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार और न्यायपालिका के बीच चल रही खींचतान की एक और कड़ी मान रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर जूझ रही सरकार के लिए यह नया कानूनी सिरदर्द साबित हो सकता है।
आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक तरफ जहां इमरान खान के समर्थक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं प्रशासन ने भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करने वाला है। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर
राजधानी इस्लाबाद समेत देश के तमाम बड़े शहरों में सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया गया है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दल इस मुद्दे पर बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने की फिराक में हैं। पुलिस प्रशासन ने धारा 144 का हवाला देते हुए किसी भी तरह के बड़े जमावड़े पर रोक लगा रखी है। जेल के आसपास के इलाकों में सेना और रेंजर्स के जवानों की तैनाती बढ़ाई गई है ताकि परिंदा भी पर न मार सके। सरकार किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने नहीं देना चाहती है।
दूसरी ओर, इमरान खान की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जनता के बीच जाकर इस नाइंसाफी का पर्दाफाश करेंगे। उनका आरोप है कि सरकार अदालती फैसलों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। आने वाला हफ्ता पाकिस्तान की सियासत के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरा रहने की पूरी संभावना है।



