एशियन गेम्स के मैदान पर बारिश का कहर
महाद्वीपीय खेलों के इस महाकुंभ में मौसम का मिजाज लगातार खेल प्रेमियों और टीमों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। मुकाबलों के दौरान आसमान से बरस रही आफत ने कई अहम मैचों के रोमांच पर पानी फेर दिया है। ऐसा ही एक मुकाबला सोमवार को कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में आयोजित होना था, जहां दर्शकों को एक कड़े संघर्ष की उम्मीद थी। लेकिन प्रकृति के आगे तमाम इंतजाम धरे के धरे रह गए और मैदान पर उतरने से पहले ही किस्मत ने अपनी चाल चल दी।
सुबह से हो रही झमाझम बारिश और रातभर के पानी के जमाव ने खेल के मैदान को पूरी तरह से नाकाबिल बना दिया था। मैदान की हालत ऐसी थी कि नियत समय पर टॉस तो दूर, पांच-पांच ओवर के छोटे मैच की संभावना भी खारिज हो गई। ग्राउंड्समैन की तमाम कोशिशों के बावजूद आउटफील्ड को खेलने लायक नहीं बनाया जा सका, जिसके बाद खेल अधिकारियों को मैच रद्द करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा। इस अनचाहे व्यवधान ने मुकाबले के रोमांच को पूरी तरह से फीका कर दिया।
टूर्नामेंट के इस चरण में बेहतर सीडिंग वाली टीमों को सीधे नॉकआउट दौर में प्रवेश मिला था, जिसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश शामिल थे। वहीं दूसरी तरफ, हॉन्ग-कॉन्ग, अफगानिस्तान, नेपाल और मलेशिया जैसी टीमों ने ग्रुप चरण की कठिन बाधाओं को पार करते हुए नॉकआउट में अपनी जगह बनाई थी। पाकिस्तान का इस महाधिवेशन में यह शुरुआती मुकाबला था, जो बिना एक भी गेंद फेंके इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
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रैंकिंग का नियम बना पाकिस्तान के लिए वरदान
जब खराब मौसम के कारण खेल का कोई भी विकल्प नहीं बचा, तो टूर्नामेंट की नियमावली को लागू किया गया। प्रतियोगिता के नियमों के मुताबिक, यदि नॉकआउट चरण का कोई मैच बारिश या अन्य कारणों से रद्द होता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर रैंकिंग वाली टीम को अगले दौर में स्वतः प्रवेश मिल जाएगा। इस नियम के तहत जिस टीम की स्थिति कागज पर मजबूत होती है, उसे किस्मत का साथ मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की पुरुष टी20 रैंकिंग में पाकिस्तान की स्थिति काफी मजबूत है और टीम फिलहाल दुनिया की छठे नंबर की टीम है। इसके विपरीत, हॉन्ग-कॉन्ग की टीम वैश्विक पदानुक्रम में 24वें स्थान पर काबिज है। रैंकिंग के इस बड़े अंतर ने पाकिस्तान के लिए सेमीफाइनल का दरवाजा खोल दिया, जबकि हॉन्ग-कॉन्ग के खिलाड़ियों को मैदान पर अपनी कला दिखाने का मौका तक नहीं मिला।
इस फैसले के बाद खेल पंडितों के बीच भी इस नियम को लेकर लंबी चर्चा छिड़ गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि नॉकआउट मुकाबलों के लिए रिजर्व डे या अल्टरनेटिव विकल्पों का होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी टीम को बिना खेले बाहर होने का मलाल न रहे। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में नियम सर्वोपरि रहे और पाकिस्तान की टीम बिना पसीना बहाए अंतिम चार में पहुंच गई।
हॉन्ग-कॉन्ग के अभियान का बेहद निराशाजनक अंत
किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए बिना मुकाबला खेले टूर्नामेंट से बाहर होना सबसे बड़ा मानसिक आघात होता है। हॉन्ग-कॉन्ग की टीम ने ग्रुप चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए नॉकआउट तक का कठिन सफर तय किया था। खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत कर इस बड़े मंच पर अपनी जगह बनाई थी, लेकिन मौसम की बेरुखी ने उनके सारे सपनों को एक झटके में तोड़ दिया।
मैदान पर पसीना बहाने और अपनी रणनीति को आजमाने का मौका न मिलने से पूरी टीम और उसका सहयोगी स्टाफ काफी निराश दिखा। ड्रेसिंग रूम का माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया, क्योंकि वे अपनी क्षमता साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। इस तरह का अंत किसी भी खेल प्रेमी को दुखी करने के लिए काफी है, जहां मेहनत करने वाली टीम को प्रकृति की वजह से बाहर होना पड़ा।
"मौसम पर किसी का जोर नहीं होता, लेकिन नॉकआउट दौर के बड़े मैचों में इस तरह बिना खेले टीमों का बाहर होना खेल की भावना के लिहाज से सही नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि हमें नियमों का सम्मान करना होगा।"— खेल विशेषज्ञ
अन्य मुकाबलों पर भी मंडरा रहा है बारिश का साया
इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में केवल एक ही मैच पर मौसम की मार नहीं पड़ी है, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण मुकाबलों पर भी लगातार संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आयोजकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती खराब मौसम के बीच समय पर मैच कराना और परिणामों को सुनिश्चित करना बन गया है। यदि आने वाले अन्य मुकाबलों में भी यही स्थिति बनी रहती है, तो रैंकिंग के आधार पर ही निर्णय लेने की मजबूरी बनी रहेगी।
क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब अगले मुकाबलों पर टिकी हुई हैं, जहां फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि कम से कम उन्हें पूरा खेल देखने को मिले। खेल आयोजकों के सामने भी मैदान को जल्द से जल्द सुखाने और खेल की स्थिति बहाल करने की भारी चुनौती है। इस प्रकार की घटनाएं खेल के नियमों और प्रारूप में भविष्य में बदलाव की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं।

