संसद में विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का नया खाका तैयार
देश की संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा ने विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समितियों का नया पुनर्गठन कर दिया है। पिछले एक साल से चल रहे कार्यकाल के पूरा होने के बाद राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने मिलकर इन समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों में फेरबदल किया है। इस बार के पुनर्गठन में कई बड़े और अनुभवी चेहरों को उनकी पुरानी जिम्मेदारियों पर ही बनाए रखा गया है, तो वहीं कुछ राजनीतिक दलों को बड़ा झटका भी लगा है। खासकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आंतरिक समीकरणों और बगावत का असर इन समितियों के पदों पर साफ देखने को मिला है।
संसदीय समितियों का यह पुनर्गठन देश की नीतिगत और विधायी प्रक्रिया में बेहद अहम माना जाता है। सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, बजट के उपयोग और प्रस्तावित विधेयकों की बारीकी से समीक्षा करने की जिम्मेदारी इन समितियों के पास होती है। यही वजह है कि इन कमेटियों की कमान संभालने वाले नेताओं का चयन काफी सोच-समझकर किया जाता है। इस बार की सूची सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि किस दल को क्या मिला और किसने अपनी साख बचाए रखी।
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शशि थरूर और अनुराग ठाकुर की पुरानी पोजीशन बरकरार
इस बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल में विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं के रुतबे पर कोई आंच नहीं आई है। तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और अपनी बेहतरीन संवाद शैली के लिए पहचाने जाने वाले शशि थरूर को एक बार फिर से बेहद महत्वपूर्ण 'विदेश मामलों की संसदीय समिति' का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मामलों पर उनकी पकड़ को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दोबारा सौंपी गई है।
इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर भी कोयला, खान और इस्पात से जुड़ी स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। इसी तरह जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कोटे से राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष फिर से नियुक्त किया गया है। इन नेताओं के अपने पदों पर बने रहने से यह साफ है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हाथों से फिसली दो अहम कमेटियों की कमान
इस बार के संसदीय समिति पुनर्गठन में सबसे बड़ा नुकसान ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को उठाना पड़ा है। TMC के हाथ से दो महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता चली गई है। पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और आंतरिक उठापटक का असर इन नियुक्तियों पर साफ नजर आया है। लोकसभा में ममता गुट के 8 और राज्यसभा में 8 यानी कुल 16 सांसद हैं, और उनकी इस अंदरूनी कलह का सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिला है।
वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति जो पहले TMC की राज्यसभा सांसद डोला सेन के पास थी, अब भारतीय जनता पार्टी के पाले में चली गई है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी को इस वाणिज्य समिति का नया अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा, रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय समिति की कमान भी अब बदल चुकी है।
कीर्ति आजाद को झटका, बागी गुट को मिली तरजीह
TMC के भीतर मचे घमासान का असर रसायन और उर्वरक (केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स) समिति पर भी पड़ा है। पहले इस समिति की अध्यक्षता तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद संभाल रहे थे। लेकिन इस बार के पुनर्गठन में उन्हें हटाकर TMC के ही बागी धड़े की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को इस समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। इस बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा था। इसके बावजूद संसद सचिवालय की तरफ से जारी की गई अंतिम सूची में यह बदलाव बरकरार रखा गया है, जिसे ममता बनर्जी की पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इन दिग्गजों के पास भी सुरक्षित रहीं पुरानी जिम्मेदारियां
फेरबदल के इस दौर में कई अन्य दलों के प्रमुख नेताओं के पदों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह चन्नी कृषि संबंधी समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की समिति की कमान पर बरकरार रखा गया है। वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी समिति के अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
इसके अलावा, DMK सांसद तिरुचि शिवा उद्योग समिति और कनिमोझी खाद्य, उपभोक्ता मामलों की समिति के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राधामोहन सिंह को एक बार फिर से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण 'रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति' का अध्यक्ष चुना गया है। अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा:
"राष्ट्र की सुरक्षा, सशस्त्र सेनाओं की क्षमता के सुदृढ़ीकरण तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े इस दायित्व को मैं संसदीय गरिमा, पूर्ण निष्ठा और राष्ट्रहित की सर्वोच्च भावना के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।" — राधामोहन सिंह, अध्यक्ष, रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक सुगबुगाहट
संसदीय समितियों का यह नया पुनर्गठन आने वाले संसद सत्रों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष ने अपने प्रमुख और भरोसेमंद चेहरों को मजबूत कमेटियों की कमान सौंपकर नीतिगत नियंत्रण बनाए रखा है, वहीं विपक्ष के भी धारदार नेताओं को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर बरकरार रखा गया है। हालांकि, क्षेत्रीय दलों विशेषकर TMC के भीतर चल रही खींचतान ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकजुटता और समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इन समितियों की बैठकों में गर्मागरम बहस देखने को मिल सकती है।








