घरों में पाले जाने वाले कुत्तों का बढ़ता खतरा
आज के दौर में घरों में पालतू जानवर रखने का शौक तेजी से बढ़ रहा है। लोग शौक से कुत्ते पालते हैं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। लेकिन कई बार यही पालतू जानवर खतरनाक साबित हो जाते हैं, विशेष तौर पर तब जब घर में छोटे बच्चे, बुजुर्ग या ऐसे लोग हों जो अपनी रक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं। हाल ही में चिकित्सा जगत से सामने आए कुछ मामलों ने हर किसी को चौंका कर रख दिया है, जहां घरों में पाले गए कुत्तों ने बिस्तर पर पड़े लाचार बुजुर्गों पर खौफनाक हमले किए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों की प्रवृत्ति अप्रत्याशित हो सकती है। खासकर जब वे बच्चों को जन्म देते हैं या किसी खास माहौल में रहते हैं, तो उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही परिवार के किसी सदस्य के लिए भारी पड़ सकती है। हाल ही में हुई घटनाओं ने एक बार फिर इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या घरों में खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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अस्पताल पहुंचे गंभीर जख्मों के मामले
हाल ही में चिकित्सा संस्थानों में ऐसे कई मरीज भर्ती किए गए हैं जिन्हें पालतू कुत्तों ने बुरी तरह नोंच डाला था। एक मामले में एक बुजुर्ग महिला पर उसके ही घर के पालतू कुत्ते ने हमला कर दिया, जिससे उनके शरीर पर गहरे जख्म बन गए। डॉक्टरों के अनुसार, काटने और नोंचने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मरीज की हड्डी तक में खुला फ्रैक्चर हो गया था। ऐसे घाव न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी मरीज को झकझोर कर रख देते हैं।
दूसरा मामला एक ऐसी बुजुर्ग महिला का था जो लंबे समय से बिस्तर पर अचल अवस्था में थीं। खुद का बचाव करने में पूरी तरह असमर्थ होने के कारण वे घर में पाले गए कुत्ते के हमले का शिकार बन गईं। कुत्ते के जबड़े की ताकत से त्वचा और अंदरूनी ऊतकों को भारी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद उन्हें तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। डॉक्टरों की टीम ने काफी मशक्कत के बाद उनकी जान बचाई और घावों का उपचार किया।
जानवरों के काटने पर क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
चिकित्सकों का कहना है कि जानवरों के काटने से होने वाली चोटें सामान्य चोटों से काफी अलग और खतरनाक होती हैं। कुत्ते के दांतों और नाखूनों में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया होते हैं जो त्वचा के जरिए शरीर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच जाते हैं। इससे टेंडन, जोड़ों और हड्डियों में गंभीर संक्रमण होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यदि समय पर उचित इलाज न मिले तो यह संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है।
इन मामलों में इलाज की प्रक्रिया भी काफी लंबी और जटिल होती है। डॉक्टरों को संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए पहले कई दिनों तक लगातार घाव की ड्रेसिंग करनी पड़ती है और एंटीबायोटिक्स व रेबीज रोधी टीके देने होते हैं। कई बार गंभीर मामलों में प्लास्टिक सर्जरी या जटिल ऑर्थोपेडिक सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ जाती है, ताकि मरीज के अंग सुरक्षित रह सकें।
"जानवरों के काटने से त्वचा के नीचे के ऊतकों को गहरा नुकसान पहुंचता है। कुत्ते के मुंह में मौजूद बैक्टीरिया सीधे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं, जिससे हड्डियों और जोड़ों में गंभीर संक्रमण का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे मामलों में फौरन चिकित्सकीय सहायता बेहद जरूरी है।" — डॉ. वू जियांग आन, ऑर्थोपेडिक ट्रॉमा विशेषज्ञ
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं
इस तरह की दुर्घटनाओं से बचने के लिए पालतू पशुओं के मालिकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। सबसे पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि घर में मौजूद सभी कुत्तों को रेबीज और अन्य जरूरी टीके समय पर लगाए गए हों। इसके अलावा, स्तनपान कराने वाली मादा कुत्तों के पास बच्चों या बुजुर्गों को बिल्कुल न जाने दें, क्योंकि इस दौरान उनका स्वभाव बहुत आक्रामक हो जाता है।
जिन घरों में बुजुर्ग, दिव्यांग या किसी बीमारी के चलते बिस्तर पर रहने वाले लोग हैं, वहां पालतू जानवरों को अलग और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। बिना किसी की निगरानी के कमजोर और असमर्थ सदस्यों को आक्रामक कुत्तों के संपर्क में आने से बचाना हर परिवार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय हादसे को समय रहते रोका जा सके।
कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए
यदि दुर्भाग्य से कभी किसी को कुत्ता काट ले, तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले घाव को बहते हुए साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए ताकि बैक्टीरिया का प्रभाव कम हो सके। इसके बाद बिना देर किए किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए ताकि डॉक्टर उचित इलाज शुरू कर सकें।
आम तौर पर लोग घरेलू नुस्खे या अज्ञात जड़ी-बूटियां घाव पर लगा लेते हैं, जो स्थिति को और बिगाड़ सकता है। ऐसा करने से बचना चाहिए। यदि घाव गहरा है, खून ज्यादा बह रहा है या सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो बिना एक पल गंवाए डॉक्टर की सलाह लें और रेबीज तथा टेटनस का टीका समय पर लगवाएं। थोड़ी सी सावधानी और समझदारी जीवन की रक्षा कर सकती है।







