'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) को लेकर देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में इन दिनों प्रशासनिक हलचल अपने चरम पर है। गूगल ट्रेंड्स पर पिछले चौबीस घंटों से शीर्ष पर चल रहे इस विषय की तह तक जाने के लिए जब हमने पड़ताल की, तो एक बेहद जटिल और विरोधाभासी तस्वीर सामने आई। एक तरफ जहां कई जिलों में उत्सव का माहौल है और रिकॉर्ड समय में लाभार्थियों के खातों में तीसरी किस्त पहुंचाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सूची में धांधली, अपात्रों के नाम और ग्राम सभाओं में उमड़ती ग्रामीणों की भीड़ ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीनी हकीकत: एक तरफ राहत, तो दूसरी तरफ गड़बड़ियों का अंबार
बिहार के दरभंगा जिले के जाले क्षेत्र से लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक, तस्वीर मिली-जुली है। जाले में पीएम आवास योजना की नई सूची सामने आते ही उसमें व्यापक गड़बड़ियों की शिकायतें मिलने लगी हैं। ग्रामीण इलाकों में इस बात को लेकर भारी रोष और असमंजस है कि आखिर वास्तविक जरूरतमंदों के बजाय संपन्न लोगों के नाम सूची में कैसे शामिल हो गए। स्थिति को संभालने और पारदर्शिता लाने के लिए अब प्रशासन ने सूचियों को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।
इसी कड़ी में, मोहनपुर के दूधेला स्थित पंचायत सरकार भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां पंचायत स्तर पर योजना की सूची को सार्वजनिक किया जा रहा है ताकि छूटे हुए और पात्र लोगों के नाम जोड़े जा सकें। प्रभात खबर से मिले इनपुट बताते हैं कि इन सूचियों के सत्यापन और उन्हें सुनने के लिए ग्रामीण दूर-दूर से पंचायत भवनों में उमड़ रहे हैं, जो इस योजना की महत्ता को दर्शाता है।
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रायपुर में 1393 अपात्रों की पहचान, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू
छत्तीसगढ़ के रायपुर में जिला प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। यहां प्रशासनिक जांच के दौरान 1393 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है जो पीएम आवास योजना के मानदंडों के अनुसार अपात्र पाए गए हैं। हालांकि, प्रशासन ने निष्पक्षता का परिचय देते हुए इन अपात्रों को दस अक्टूबर तक संबंधित ग्राम सभा में अपनी दावा-आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है, लेकिन यह इस बात की भी गवाही देता है कि शुरुआती स्तर पर जमीनी सर्वेक्षण में किस हद तक लापरवाही बरती गई थी।
प्रशासनिक समन्वय और भविष्य की राह
सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि जहां प्रशासनिक सख्ती बरती जा रही है, वहां पात्र लाभार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। हाल ही में एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, एक लाभार्थी को तीसरी किस्त मिलने के मौके पर एक साथ 22 विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। यह इस बात का संकेत है कि सरकार इस योजना को लेकर कितनी गंभीर है और जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार या लेटलतीफी रोकने के लिए मल्टी-डिपार्टमेंटल मॉनिटरिंग की जा रही है।
निष्कर्ष
द फ्रीलान्स की इस खोजी पड़ताल का निष्कर्ष यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना अपनी मंशा में भले ही देश के बेघर गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही हो, लेकिन निचले स्तर पर बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर सर्वे में हुई चूक के कारण यह विवादों में भी घिर रही है। जब तक हर पंचायत में पारदर्शी तरीके से सूचियों का सत्यापन नहीं होता और अपात्रों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस महात्वाकांक्षी योजना का शत-प्रतिशत लाभ सही हाथों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।







