जीएल बजाज कॉलेज में एमबीए छात्रों का फूटा गुस्सा, कैंपस बदलने के आरोप पर जोरदार प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर ग्रेटर नोएडा के शैक्षणिक गलियारों में उस वक्त खलबली मच गई, जब नॉलेज पार्क स्थित प्रसिद्ध जीएल बजाज कॉलेज के छात्र प्रशासनिक भवन के सामने धरने पर बैठ गए। मामला एमबीए पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर धोखाधड़ी और मनमानी का आरोप लगाया है। परिसर के भीतर छात्रों की यह नाराजगी अचानक से सामने नहीं आई, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से सुलग रहा असंतोष था जो आखिरकार विरोध प्रदर्शन के रूप में फूट पड़ा।
इस विरोध प्रदर्शन में करीब डेढ़ सौ से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल रहे। छात्रों का साफ कहना है कि उन्होंने दाखिला लेते वक्त इस बात को पूरी तरह सुनिश्चित किया था कि उनकी पढ़ाई और कक्षाएं ग्रेटर नोएडा के मुख्य परिसर में ही चलेंगी। इसके एवज में उन्होंने कॉलेज द्वारा निर्धारित पूरी फीस भी समय पर जमा कर दी थी। लेकिन जब अकादमिक सत्र आगे बढ़ा और परीक्षाओं का वक्त नजदीक आया, तब उन्हें कॉलेज प्रशासन की तरफ से एक ऐसा फरमान मिला जिसने उनके होश उड़ा दिए।
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फीस ग्रेटर नोएडा कैंपस की और रजिस्ट्रेशन मथुरा का? जानिए क्या है पूरा विवाद
छात्रों के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें यह मौखिक या लिखित रूप से जानकारी दी कि उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन मथुरा स्थित कैंपस से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। उनका तर्क था कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा की सुविधाओं, संकाय और प्लेसमेंट के अवसरों को ध्यान में रखकर इस संस्थान को चुना था, न कि मथुरा स्थित कैंपस के लिए।
विवाद तब और गहरा गया जब छात्रों को यह विकल्प दिया गया कि वे कक्षाएं भले ही ग्रेटर नोएडा में कर लें, लेकिन उनकी मुख्य डिग्री और परीक्षा से जुड़े तमाम दस्तावेज मथुरा संस्थान के अंतर्गत प्रोसेस होंगे। छात्रों ने इस दोहरे रवैये को मानने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसके पीछे किसी प्रकार की अंदरूनी प्रशासनिक चूक या वित्तीय हेराफेरी हो सकती है।
छात्रों का कड़ा रुख: ग्रेटर नोएडा कैंपस में ही पढ़ाई जारी रखने की पुरजोर मांग
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने एकजुट होकर कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने अपनी मांगें बुलंद कीं। उनका स्पष्ट संदेश था कि जब तक उन्हें लिखित रूप में यह आश्वासन नहीं मिलता कि उनका पूरा पाठ्यक्रम और संबद्धता केवल ग्रेटर नोएडा कैंपस से ही संचालित होगी, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों ने कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और इस बात पर जोर दिया कि उनके भविष्य को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं बरती जानी चाहिए।
विद्यार्थियों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो वे इस आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाएंगे। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे इन युवाओं का मानना है कि इस तरह के बदलाव अचानक से थोपना पूरी तरह से अनुचित है और इससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रभावित हो रही है।
कॉलेज प्रबंधन की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
दूसरी ओर, छात्रों के इस भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन भी हरकत में आ गया। संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और उनके गुस्से को शांत करने का प्रयास किया। प्रबंधन की तरफ से यह भरोसा दिलाया गया है कि छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा और इस तकनीकी या प्रशासनिक उलझन को जल्द ही बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा।
"हमने अपनी पूरी फीस ग्रेटर नोएडा कैंपस के मानकों के हिसाब से भरी है। कॉलेज प्रशासन अब अचानक से हमें मथुरा कैंपस से जोड़ने की बात कह रहा है, जो हमें बिल्कुल मंजूर नहीं है। हम अपना हक लेकर ही रहेंगे।" — प्रदर्शनकारी एमबीए छात्र, जीएल बजाज कॉलेज
फिलहाल कॉलेज परिसर में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन छात्रों के बीच असमंजस और रोष का माहौल अभी भी बना हुआ है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत में इस बात की चर्चा है कि क्या बड़े संस्थान प्रवेश के समय पारदर्शी नीतियां अपनाने में विफल हो रहे हैं, जिसका खमियाजा अंततः विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है।




