नई दिल्ली से वडोदरा तक और गंगा तट से लेकर देश की राजधानी के सियासी गलियारों तक इन दिनों एक ही चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक सफर के पूरे पच्चीस साल दर्ज कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को पार करने के मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने काम करने के पुराने अंदाज को फिर से सामने रखा है। उन्होंने देश की जनता को साफ संदेश दिया है कि उनके भीतर का जोश और काम करने की रफ्तार आज भी वैसी ही है जैसी दो दशक पहले हुआ करती थी।
राजधानी दिल्ली में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के भविष्य को लेकर अपनी बात रखी और पक्के इरादों के साथ आगे बढ़ने की बात कही। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महंगाई और पुराने समय की व्यवस्थाओं पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2014 से पहले देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जिंदगी किस तरह की परेशानियों से जूझ रही थी। उन्होंने कहा कि बीते सालों में उनकी सरकार ने उन तमाम पुरानी अड़चनों को दूर करने का काम किया है जो देश की तरक्की के रास्ते में बड़ी दीवार बनकर खड़ी थीं।
पचास मिनट में छह बार दोहराया गया वो खास संकल्प
इस पूरे भाषण का सबसे बड़ा आकर्षण उनका वो बार-बार बोला जाने वाला वाक्य रहा जिसमें उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि 'हम यह करके दिखाएंगे'। प्रधानमंत्री ने अपने महज पचास मिनट के भाषण में इस बात को अलग-अलग संदर्भों में कुल छह बार दोहराया। उनका यह अंदाज साफ बताता है कि सरकार साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर कितनी गंभीर है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने छोटे-छोटे स्वार्थों से ऊपर उठकर देश के निर्माण में अपना पूरा योगदान दें ताकि लक्ष्य समय पर हासिल हो सके।
इस खास मौके पर देश भर में कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। गुजरात के वडोदरा से लेकर उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों तक जश्न का माहौल देखा जा रहा है। वाराणसी में प्रधानमंत्री के इन पच्चीस सालों के सफल कार्यकाल और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस सेवा संकल्प अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री के लंबे राजनीतिक सफर को देश की सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया।
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सत्ता के केंद्र में पच्चीस साल और आगे की बड़ी चुनौतियां
वर्ष 2001 में जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी, तब से लेकर आज तक वे लगातार सत्ता के मुख्य केंद्र में बने हुए हैं। इन पच्चीस सालों के सफर में उन्होंने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए हैं। आलोचकों के तीखे सवालों का सामना करने से लेकर देश की जनता का भारी समर्थन हासिल करने तक उनका यह सफर भारतीय राजनीति की एक बड़ी कहानी बन चुका है। आज जब वे देश के प्रधानमंत्री के तौर पर तीसरा कार्यकाल चला रहे हैं, तो उनके सामने देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनाने की बड़ी चुनौती है।
मैदान पर उतरी हमारी टीम ने जब आम लोगों से बातचीत की तो पता चला कि जनता की उम्मीदें आज भी आसमान छू रही हैं। महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर भले ही लोगों के मन में सवाल हों, लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर उनका भरोसा अभी भी कायम नजर आता है। लोग यह देखना चाहते हैं कि आने वाले सालों में सरकार इन वादों को जमीन पर कैसे उतारती है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह साफ कर दिया है कि वे रुकने वाले नहीं हैं और उनका पूरा ध्यान देश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तय किए गए रास्तों पर ही टिका हुआ है।
विकास की रफ्तार और जनता की बढ़ती उम्मीदें
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि इस राजनीतिक सफर के पच्चीस साल पूरे होने का जश्न केवल राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी बहुत अहम है। आने वाले दिनों में सरकार के सामने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने की बड़ी परीक्षा होगी। प्रधानमंत्री ने खुद देश को यह भरोसा दिलाया है कि वे बिना रुके अपने तय रास्ते पर चलते रहेंगे। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में ये बड़े दावे जमीन पर कितना असर दिखाते हैं और आम आदमी की जिंदगी में इससे कितना बदलाव आता है।







