नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के वरिष्ठ और वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात की। सरकार के मुखिया के तौर पर नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक सेवा में 25 साल पूरे हो गए हैं। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री ने आडवाणी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। यह मुलाकात राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि दोनों नेताओं का पुराना और गहरा नाता रहा है।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी को पुष्पगुच्छ भेंट किया। दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई और पुरानी यादें भी ताजा हुईं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच का आपसी सम्मान साफ नजर आ रहा है। देश की राजनीति में आडवाणी को एक मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है।
गुजरात से दिल्ली तक का लंबा सफर
नरेंद्र मोदी ने साल 2001 में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। वहां से शुरू हुआ उनका सफर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंचा। साल 2014 में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री की कमान संभाली और तब से लगातार इस पद पर हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के कुल 25 साल पूरे हो चुके हैं। इस लंबी यात्रा में उन्होंने कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए और देश की राजनीति की दिशा तय की।
इस पूरे सफर में लालकृष्ण आडवाणी की भूमिका एक संरक्षक और मार्गदर्शक की रही है। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब पार्टी संगठन में आडवाणी की पकड़ बहुत मजबूत थी। आडवाणी की रथ यात्रा के दौरान भी मोदी ने संगठन के स्तर पर अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं। यही वजह है कि आज जब मोदी ने सफलता के 25 साल पूरे किए हैं, तो वह अपने वरिष्ठ नेता का आशीर्वाद लेने पहुंचे।
वरिष्ठ नेता का देश के लिए बड़ा योगदान
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं। उन्होंने देश में पार्टी को खड़ा करने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। देश के गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में भी आडवाणी ने लंबे समय तक देश की सेवा की। आज बढ़ती उम्र के कारण वे सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन उनका राजनीतिक कद और सम्मान आज भी उतना ही बड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह बात कही है कि आडवाणी जी का मार्गदर्शन उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा के लिए बहुत जरूरी रहा है। आज की इस मुलाकात ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि राजनीति में वैचारिक मतभेदों के बावजूद आपसी सम्मान और रिश्तों की एक मजबूत परंपरा जीवित है। देश भर के कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भी इस मुलाकात की सराहना की है।
भविष्य के संकेत और राजनीतिक संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं होती हैं। यह देश की राजनीतिक संस्कृति का एक अहम हिस्सा हैं। जब देश का शीर्ष नेता अपने से वरिष्ठ और मार्गदर्शक नेता से मिलता है, तो यह पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए भी एक बड़ा संदेश होता है। इससे यह साफ होता है कि पुरानी पीढ़ी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जाता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में पुरानी यादों और संघर्ष के दिनों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में सरकार और पार्टी संगठन स्तर पर कई और कार्यक्रमों के जरिए इस 25 साल के सफर को याद किया जा सकता है। फिलहाल देश भर में इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं और आम लोग भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।







