रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर एक नया कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। यूरोप के इस सुलगते संकट को सुलझाने के लिए अब वैश्विक मंच पर भारत की मध्यस्थता की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। यूक्रेन के शीर्ष राजनयिक की ओर से दिए गए बयानों ने यह साफ कर दिया है कि कीव प्रशासन अब नई दिल्ली की कूटनीतिक क्षमता और शांति प्रयासों को कितनी गंभीरता से देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हमेशा से तटस्थ लेकिन सक्रिय रुख अपनाया है। यही वजह है कि दोनों तरफ के देश अब भारत को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में देखने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पन्नों पर यह घटनाक्रम भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक वजन की एक बड़ी मिसाल बनकर उभर रहा है।
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यूक्रेन के विदेश मंत्री ने की भारत की तारीफ
कीव से मिल रही खबरों के अनुसार, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने एक अहम प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अंतरराष्ट्रीय शांति प्रस्तावों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया कि इस समय मेज पर चार प्रमुख शांति प्रस्ताव मौजूद हैं, जिनमें से भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक और व्यावहारिक है।
एंड्री सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन के साझेदार देशों के सामने शांति स्थापना को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण रखे गए हैं। उन्होंने पहली बार खुलकर इस बात के संकेत दिए कि यूक्रेन युद्ध को रोकने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए भारत एक सक्रिय और महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। यूक्रेन का यह रुख दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
"हमारे सामने चार शांति प्रस्ताव विचाराधीन हैं। इनमें सबसे व्यापक भारत का प्रस्ताव है। यह पहली बार है जब भारत ने इस कूटनीतिक प्रक्रिया में इतनी सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जाहिर की है।" — एंड्री सिबिहा, विदेश मंत्री, यूक्रेन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बड़ा बयान
एक तरफ जहां यूक्रेन ने भारत की भूमिका की सराहना की है, वहीं दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। वाल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब की वार्षिक बैठक के दौरान पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी उन गिने-चुने विश्व नेताओं में शामिल हैं जो रूस के साथ गहरे और दोस्ताना संबंध होने के बावजूद लगातार यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने का मुद्दा उठाते हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के पास इस जटिल समस्या का समाधान निकालने के लिए बेहद सकारात्मक और अच्छे विचार हैं। पुतिन के मुताबिक, पीएम मोदी की इस युद्ध को बातचीत के जरिए समाप्त कराने में गहरी रुचि है और वे दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य रास्ता तलाशने में मददगार साबित हो सकते हैं।
वैश्विक मंच पर शांति स्थापना के अन्य प्रस्ताव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की पहलों के अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ और देशों ने भी युद्धविराम को लेकर अपने सुझाव रखे हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री के अनुसार, तुर्किये और मिस्र ने काला सागर के जरिए अनाज और कृषि उत्पादों के परिवहन को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष युद्धविराम का सुझाव दिया है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका की ओर से भी ऊर्जा क्षेत्र को निशाना न बनाने और वहां युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम का यह मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच हुई वार्ताओं के दौरान भी प्रमुखता से उठाया गया था।
भारत का संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण
शुरुआत से ही भारत ने रूस और यूक्रेन युद्ध के मामले में न तो किसी का पक्ष लिया है और न ही चुप्पी साधी है। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह दोहराया है कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि संवाद तथा कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है।
जापानी मीडिया को दिए गए एक साक्षात्कार में भी प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत का रुख पूरी तरह से मानवीय और सिद्धांतों पर आधारित रहा है। चूंकि भारत के संबंध रूस और यूक्रेन दोनों के साथ ऐतिहासिक रूप से मजबूत और प्रगाढ़ रहे हैं, इसलिए दोनों राष्ट्रों के बीच विश्वास का सेतु बनने की क्षमता केवल भारत के पास ही सबसे अधिक नजर आती है।
निष्कर्ष: क्या भारत ला पाएगा शांति?
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस खूनी संघर्ष को तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। ऐसे समय में जब पश्चिमी देश और नाटो संगठन लगातार तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों में व्यस्त हैं, भारत का शांतिपूर्ण और संतुलित रुख दुनिया के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर आया है। यदि पुतिन और जेलेंस्की दोनों ही देश भारत की मध्यस्थता पर सहमति जताते हैं, तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की सबसे बड़ी विजय होगी, जो दुनिया को एक बार फिर शांति के मार्ग पर ला सकती है।








